डिजिटल इंडिया: कोविड -19 और उसके बाद के अवसर निबन्ध

डिजिटल इंडिया: कोविड -19 और उसके बाद के अवसर पर हिन्दी निबन्ध , Essay On Digital India: Opportunities in COVID-19 and Beyond

डिजिटल इंडिया

कोविड -19 और उसके बाद के अवसर 

Digital India: Opportunities in COVID-19 and Beyond

Content /संकेत बिन्दु /विषय सूची 

  1. प्रस्तावना 
  2. क्या हैं डिजिटल इंडिया
  3. कोविड -19 के बाद डिजिटल इंडिया में अवसर
  4. बदलता व आत्मनिर्भर होता भारत 
  5. उपसंहार 

प्रस्तावना 

आज पूरी दुनिया वैश्विक महामारी कोरोना की चपेट में है। सुरसा राक्षसी के मुंह के जैसे कोरोना का आतंक भी हर दिन बढ़ता ही जा रहा है। ऐसा लगता है मानो पूरी दुनिया के इंसानों को खा कर ही दम लेगी।लेकिन इंसान स्वभाव से जुझारू व जिद्दी होता है और अंतिम श्वास तक जीने के लिए हर प्रयत्न करता है। इसीलिए एक न एक दिन हम इस कोरोनावायरस को हरा ही देंगे।

Digital India: Opportunities in COVID-19 and Beyond

यह भी सच हैं कि जब भी दुनिया में कोई संकट या आपदा आती है तो , साथ में कई अवसरों को भी लेकर आती है। कोरोना महामारी भी अपने साथ दुनिया भर की मुसीबतों के साथ , ढेर सारे अवसरों को भी लेकर आई है। सबसे बड़ा अवसर मिला डिजिटल क्षेत्र को।

क्या हैं डिजिटल इंडिया प्रोग्राम (Digital India Program )

भारत को डिजिटल तौर पर सशक्त बनाने के लिए शुरू किया गया कार्यक्रम है। इस अभियान के तहत सभी सरकारी दफ्तरों , सरकारी योजनाओं , स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं  , शिक्षा, अस्‍पताल समेत अन्य सभी चीजों को डिजिटल तौर जोड़ा जाएगा। जिसके माध्यम से आम आदमी सरकार से प्रत्यक्ष तौर पर जुड़े जायेगा।

इसके अलावा सरकार देशभर में वाई-फाई की सुविधा और कस्बों व गांवों तक ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध उपलब्ध कराएगी। ताकि आम आदमी को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके साथ ही सारे काम ऑनलाइन होने से कागज की भारी बचत होगी जिससे पर्यावरण को भी फायदा होगा।

डिजिटल इंडिया के तहत कुछ क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा हैं। जिनमें प्रमुख हैं सभी नागरिकों की टेलिफ़ोन सेवाओं तक पहुंच , ब्रॉडबैंड हाइवे से शहरों को जोड़ना , ई-गवर्नेंस के तहत तकनीक के माध्यम से शासन प्रशासन में सुधार लाना।

ई-क्रांति के तहत विभिन्न सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप में लोगों को मुहैया कराना , सार्वजनिक इंटरनेट ऐक्सेस कार्यक्रम के तहत इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराना , इंफ़ॉर्मेशन फ़ॉर ऑल यानी सभी को जानकारियां उपलब्ध कराना , भारत में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए कल-पुर्जों के आयात को शून्य करना , सूचना प्राद्योगिकी के ज़रिए अधिक नौकरियां पैदा करना और प्रारंभिक कृषि कार्यक्रम आदि ।

कोविड -19 के बाद डिजिटल इंडिया में अवसर (Digital India: Opportunities in COVID-19 and Beyond)

इस वैश्विक महामारी ने इंसानों के जीवन जीने की शैली को ही बदल दिया है। हम जिन चीजों के बारे में पहले सोचते भी नहीं थे। आज वही सब करने पर मजबूर हुए हैं।

कोरोना महामारी इंसान के लिए एक अभिशाप बनकर आयी। लेकिन यही कोरोना काल और उसके बाद का समय कुछ उद्योगों के लिए तो वरदान साबित हुआ।इस समय सबसे ज्यादा वृद्धि जिन क्षेत्रों में देखने को मिली , उनमें डिजिटल उद्योग सबसे पहले स्थान पर है। 

डिजिटल उद्योग में भी डिजिटल भुगतान उद्योग में जबरदस्त उछाल आया। इस क्षेत्र ने लोगों के सामने कुछ चुनौतियों के साथ बड़े-बड़े मौके खड़े कर दिए। पिछले 5 महीनों में इस उद्योग ने सबसे ज्यादा रफ्तार पकड़ी। आज छोटे व मध्यम वर्ग के व्यापारियों भी ऑनलाइन भुगतान को प्राथमिकता दे रहा हैं । अब व्यापारी नगद भुगतान के बजाय ऑनलाइन भुगतान लेना ज्यादा पसंद करने लगे हैं। 

कोरोना महामारी के बाद देश में डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता बढ़ी। ग्राहक खुद भी नगद के बजाय डिजिटल भुगतान को ज्यादा महत्व देने लगे। फोनपे , गूगलपे ,पेटीएम आदि ऐप के जरिए लोगों को भुगतान करना अब ज्यादा आसान लगने लगा है।लाखों नए ग्राहक जुड़ने से इन कंपनियों के बिजनेस को भी एक नई ऊंचाई मिली है।

डिजिटल भुगतान पर ग्राहक को थोड़ा अरिक्त भुगतान करना पड़ता है। डेबिट कार्ड पर एमटीआर बहुत कम है लेकिन क्रेडिट कार्ड पर यह ज्यादा है। यही कारण है कि कारोबारी क्रेडिट कार्ड को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं। लेकिन बैंक बॉक्स पर कारोबारियों को किसी तरह का शुल्क नहीं देना होता है। 

कोरोना काल में जब सारे स्कूल , कॉलेज बंद हो गये तो , बच्चों की शिक्षा में रुकावट ना हो , इसीलिए शिक्षा के क्षेत्र को भी ऑनलाइन से जोड़ दिया गया। इसका सीधा फायदा स्कूल कॉलेज जाने वाले बच्चों को मिला।

यह नहीं कोचिंग संस्थाओं ने भी ऑनलाइन कोचिंग क्लासेज शुरू की। जिससे प्रतियोगिता परीक्षाओं में बैठने वाले बच्चों को भी लाभ मिला। कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा की स्वीकार्यता व विश्वसनीयता काफी बढ़ गई हैं।    

अब स्वास्थ्य सेवाएं तक ऑनलाइन दी जा रही है। और अनेक योजनाओं जैसे म्यूचल फंड , बीमा के बारे में डिजिटल शिक्षा दी जा रही है।

सबसे बड़ी बात है कि हमारे कृषि क्षेत्र में भी डिजिटल इंडिया का बड़ा प्रभाव पड़ा है। भारत में अब “डिजिटल कृषि” की शुरुवात की गयी है जिसके माध्यम से किसान अपने घर बैठे बैठे अपनी फसल , मिट्टी ,बीज आदि के बारे में जानकारी ले सकता है। कोई समस्या होने पर किसान कृषि वैज्ञानिकों से अपने घर बैठकर सुझाव लेकर अपनी समस्याओं को हल कर सकता है। 

इसी तरह अब पेंशन व वेतन भी सीधे लोगों के खाते तक पहुंच जाती हैं।क्योंकि सभी खातों को अब सीधे ऑनलाइन बैंकिग सिस्टम से जोड़ दिया है। 

किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए अब लोगों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता है। यहां तक कि बिजली , पानी आदि का बिल भरने के लिए लोगों को घंटों लाइन पर नहीं लगना पड़ता। अब ये सारे काम लोग अपने घर बैठे बैठे आराम से कर सकते हैं। 

इसके अलावा डिजिटल मार्केटिंग एक ऐसा क्षेत्र है जहां अपार संभावनाएं हैं। यह क्षेत्र खासकर  मेहनतकश युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। जो जितना मेहनत कर सकता है , इस क्षेत्र में वह उतना कमा सकता है। इसीलिए आजकल अधिकतर युवा डिजिटल मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़ रहे हैं।

इसी के साथ अनेक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक , व्हाट्सएप , इंस्टाग्राम पर भी लोग उत्पादों की मार्केटिंग कर अच्छा खासा पैसा कमा रहे हैं। 

ऑनलाइन बैंकिंग हो या ऑनलाइन शॉपिंग , लोग इस तरफ काफी आकर्षित हुए हैं। किसी को भी पैसा भेजना या लेना इतना आसान पहले कभी नहीं था। जब सब बाजार व दुकानें बंद थी , तब ऑनलाइन शॉपिंग के रास्ते खुले थे और लोगों ने इसका फायदा उठाते हुए अपनी जरूरत  के सामानों की जमकर खरीदारी की। अब तो खाना व दवाईयाँ तक ऑनलाइन मंगाई जा रही हैं।

सभी बड़े फूड उद्योग से जुड़े लोग रेडीमेट (बना बनाया ) खाना लोगों के घर घर तक पहुंचाने के लिए जोमैटो , स्विग्गी जैसे ऐप का सहारा ले रहे हैं। जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिला हैं।

अब तो गूगल जैसी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को घर बैठा कर ही काम करा रही है यानी Work From Home को प्राथमिकता दी जा रही है। अब लोग ऑफिस में बैठ कर काम करने के बजाय घर बैठ कर काम कर रहे हैं। 

बदलता व आत्मनिर्भर होता भारत 

भारतीय जनमानस के रहन-सहन तौर-तरीकों में पिछले कुछ वर्षों से काफी बदलाव आया है। शहरों में लोगों ने अधिकतर डिजिटल तौर-तरीकों को अपना लिया है। हालांकि गांव , कस्बों में अभी इसका उतना ज्यादा प्रभाव नहीं बढ़ा है। लेकिन धीरे-धीरे ही सही , यह गांवों तक भी पहुंच जाएगा। यूपीआई पर ऋण सुविधा शुरू होने के बाद ग्रामीण इलाकों में भी सहज ही बदलाव आएगा। 

हालाँकि इस क्षेत्र में कंपनियों के बीच काफी प्रतिस्पर्धा है। मगर वह कहते हैं ना कि जिस क्षेत्र में जितनी ज्यादा प्रतिस्पर्धा , उतनी ही अच्छी गुणवत्ता। प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता किसी भी क्षेत्र में तरक्की के कारण होते हैं। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में काफी प्रतिस्पर्धा रहेगी। 

भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहे डिजिटल इंडिया प्रोग्राम का उद्देश्य ही यही था कि लोगों की सरकार तक सीधे-सीधे पहुंचा हो। हर चीज में पारपारदर्शिता हो। भारत ने संचार के क्षेत्र में भी काफी तरक्की की है।

धीरे धीरे इससे संबंधित सभी उपकरणों या अन्य सामानों का भारत में ही निर्माण करने का कार्य शुरू किया जा रहा है। यह आत्मनिर्भरता की तरफ एक बड़ा कदम है। 

उपसंहार 

कोरोना काल डिजिटल उद्योग के लिए तो वाकई में अवसर ही साबित हुआ हैं।इस क्षेत्र में अभूतपूर्व उन्नति देखने को मिली।  कंपनियों को हो या आम ग्राहक , इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को अच्छा खासा फायदा हुआ। 

वैसे इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। भविष्य में इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर और भी बढ़ेंगे। और लोगों को और सुबिधायें भी मिलेंगी। भारत के आत्मनिर्भर होने में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 

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