75 साल का भारत: आत्म निर्भर भारत की ओर बढ़ता देश।

India at 75: A Nation Marching towards Atmanirbhar Bharat , 75 साल का भारत: आत्म-निर्भर भारत की ओर बढ़ता देश।

India at 75: A Nation Marching towards Atmanirbhar Bharat

75 साल का भारत : आत्म-निर्भर भारत की ओर बढ़ता देश।

Content / विषय सूची। संकेत बिंदु 

  1. प्रस्तावना 
  2. आत्म-निर्भर भारत की ओर बढ़ता देश
  3. भारत की अर्थव्यवस्था एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
  4. अंतरिक्ष में लम्बी छलांग
  5. संचार क्रांति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति
  6. स्टार्टअप के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना
  7. तकनीकी क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता  
  8. कृषि क्षेत्र में आत्‍मनिर्भर भारत 
  9. निर्माण क्षेत्र पर आत्मनिर्भर 
  10. उपसंहार 

प्रस्तावना 

15 अगस्‍त 1947 को अंग्रेजी हुकूमत की नींव उखाड़कर भारत ने स्वतंत्रता प्राप्‍त की थी। हालाँकि इस आजादी के साथ-साथ देश को बंटवारे का दंश भी झेलना पड़ा। लेकिन अब भारत को आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं। इन बीते सात दशकों में भारत ने विकास के कई अहम पड़ाव पार कर लिए है।

India at 75: A Nation Marching towards Atmanirbhar Bharat

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने हर क्षेत्र में विकास के पथ पर अपने छोटे छोटे कदम बढ़ाने शुरू कर दिए।बीते कुछ वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में विदेशों पर अपनी निर्भरता को खत्म करने के उद्देश्य से  भारत को आत्मनिर्भर भारत बनाने की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। अब भारत हर रोज आत्मनिर्भर होने की तरफ छोटे-छोटे लेकिन मजबूत कदम बढ़ा रहा है। 

आत्म-निर्भर भारत की ओर बढ़ता देश

भारत ने हालांकि इन 73 सालों में हर क्षेत्र में काफी विकास किया है। भारत ने बैलगाड़ी से लेकर चंद्रयान-2 तक का सफर अकेले अपने दम पर तय किया है। नए नए आविष्‍कारों , खोजों और तकनीकी विकास से भारत ने विश्व में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।आज विश्व समुदाय भारत की तरफ बढ़े उम्मीद व आशा भरी नजरों से देखता है। 

भारत की अर्थव्यवस्था एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

आजादी के बाद भारत तेजी से विश्व शक्ति बनकर उभरा है।भारत की अर्थव्यवस्था आज एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इस कारण सामाजिक और आर्थिक रूप से कई बदलाव भी हुए हैं।

अंतरिक्ष में लम्बी छलांग

भारत ने अंतरिक्ष में लम्बी छलांग लगाई हैं।19 अप्रैल 1975- इसरो ने अंतरिक्ष युग की दुनिया में प्रवेश कर एक अभूतपूर्व कीर्तिमान रचा था।भारतीय वैज्ञानिकों ने देश के पहले 360 किलोग्राम वजनी उपग्रह आर्यभट्ट को अंतरिक्ष में छोड़ा था।

लेकिन आज एक ओर जहाँ भारत ने अंतरिक्ष में स्वदेशी उपग्रह स्‍थापित कर सैटेलाइट की दौड़ में अपना अग्रणी स्‍थान बनाया है।वहीं दूसरी ओर Chandrayaan-2 को चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने का प्रयास किया गया। यह chandrayaan-2 पूरी तरह से स्वदेशी था। इसके निर्माण से लेकर इसका डिजाइन तथा इसका प्रक्षेपण , सब कुछ भारत के वैज्ञानिकों के द्वारा ही किया गया था।

 मंगल ग्रह का पहला मिशन नवंबर 2013 में लॉन्च किया गया था। जो सफलतापूर्वक 24 सितंबर 2014 को ग्रह की कक्षा में पहुँच गया। इसके अलावा और कई उपलब्धियां भी भारतीय अंतरिक्ष विभाग व वैज्ञानिकों के खातों में दर्ज हैं। इस क्षेत्र में भारत आप दिन प्रतिदिन आत्मनिर्भर होता जा रहा है। 

संचार क्रांति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति 

भारत ने संचार के क्षेत्र में बीते 70 दशकों में महत्वपूर्ण व क्रांतिकारी प्रगति की है। गांव-गांव तक इंटरनेट व स्मार्टफोन पहुंच चुके हैं। अब भारत का एक छोटा सा गांव भी पूरे विश्‍व से जुड़ गया है। भारत में सबसे सस्ती दरों पर वायरलेस टेलिफोनी सुविधा भी उपलब्ध की जाती है।

भारत में डिजिटल इंडिया प्रोग्राम की शुरुआत की गई। जिसके माध्यम से लोग हर सुबिधा व जानकारी घर बैठे बैठे ले सकते हैं। चाहे वो किसी सरकारी योजना की जानकारी हो या किसी अन्य विषय पर। बिजली , पानी का बिल भरना अब लोगों के लिए बहुत आसान हो गया , जिसके लिए पहले वह घंटो लाइन में लगा करते थे। 

स्टार्टअप के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना 

 भारत सरकार द्वारा स्टार्टअप स्टैंडअप योजना चलाई जा रही है , जिसका मुख्य उद्देश्य भारत के युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना , नए-नए इनोवेटिव आइडिया के जरिए नए-नए व्यवसायों को स्थापित करना। इसके लिए युवाओं को अच्छी खासी आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।

ताकि युवा अपने देश में ही रह कर अपने उद्योग धंधों को स्थापित करें। भारत में रोजगार पैदा हो सके। और अधिक से अधिक वस्तुओं का निर्माण भारत में ही हो , ताकि हमारी दूसरे देशों पर  निर्भरता खत्म हो जाए। और भारत की अर्थव्‍यवस्‍था मजबूत हो सके ।

तकनीकी क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता

अभी हाल ही में भारत की रेल पटरी पर भारत में निर्मित “बंदे भारत एक्सप्रेस” ने फर्राटे से दौड़ लगाई।यह ट्रेन पूरी तरह से भारत के “मेक इन इंडिया प्रोग्राम” के तहत बनी हुई थी। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी टेक्नोलॉजी से निर्मित थी। 

इसके अलावा भारत ने आईटी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करके पूरे विश्व को चकित कर दिया।

कृषि क्षेत्र में आत्‍मनिर्भर भारत 

भारत कृषि क्षेत्र में आत्‍मनिर्भर बन चुका है। आजादी के बाद भारत ने कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास किया है। उत्पादन के मामले में भारत ने कई देशों को पीछे छोड़ दिया है। भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक है। चीनी का यह दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और कपास का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

भारत पशुधन के मामले में भी सम्पन्न राष्ट्र है। जिस कारण भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध और मक्खन उत्पादक भी है।

सैन्‍य शक्ति का विस्‍तार

भारत ने अपनी सैन्‍य शक्ति में अभूतपूर्ण विस्‍तार किया है।अत्याधुनिक हथियारों , उपकरणों  के  साथ साथ राफेल से भी हमारी सेना सुसज्जित हो गयी हैं। दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल “ब्रह्मोस” को सैन्‍य रक्षा प्रणाली में शामिल किया गया है , जिसे भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया था । 

निर्माण क्षेत्र पर आत्मनिर्भर 

हाल ही के कुछ वर्षों में भारत में औद्योगिक क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ये सब भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ही उठाए गए हैं। भारत ने सबसे कम कीमत वाली नैनो कार बनाई। विश्व का सबसे बड़ा दुपहिया वाहनों का उत्पादक देश भारत ही है।

भारत की गिनती अब दुनिया के औद्योगीकृत देशों की श्रेणी में की जाती है। सड़कों, बंदरगाहों के अलावा विश्वस्तरीय निर्माणों में भी भारत ने आत्मनिर्भरता हासिल कर देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान की हैं

उपसंहार 

स्‍वतंत्रता से लेकर आज तक की भारत की विकास यात्रा शानदार रही हैं।चाहे क्षेत्र कोई भी हो ,कृषि  से लेकर अंतरिक्ष तक , संचार क्रांति से लेकर ट्रेन बनाने तक , हर काम में भारत धीरे-धीरे आत्मनिर्भर हो रहा है। नित नए-नए आविष्‍कारों और तकनीकी विकास को जन्म दे , भारत ने विश्‍व में अपनी एक अलग पहचान बनाई हैं। 

एक ओर जहां भारत ने आत्मनिर्भर बनने के लिए अभूतपूर्व विकास का मार्ग अपनाया। वहीं दूसरी ओर भारत अपने पूर्वजों के द्वारा दिए गए आदर्श मूल्यों , संस्कारों , समृद्ध परंपराओं को भी साथ लेकर चला है। भारत को अगर एक महाशक्ति के रूप में उभरना है तो उसे हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना ही होगा। 

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