मानवीय करुणा की दिव्य चमक : Question and Answer

Question and Answer of Manviya Karuna Ki Divya Chamak

hindi class 10 ncert solution manviya karuna ki divya chamak , मानवीय करुणा की दिव्य चमक के प्रश्न व उनके उत्तर 

Question And Answer Of Manviya Karuna Ki Divya Chamak

मानवीय करुणा की दिव्य चमक

प्रश्न व उनके उत्तर 

question and answer of manviya karuna ki divya chamak

नोट : 

मानवीय करुणा की दिव्य चमक पाठ का सार (Summary ) पढ़ने के लिए Click करें — Next Page

प्रश्न 1.

फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी ?

उत्तर –

देवदार का वृक्ष काफी लंबा , चौड़ा व घना होता हैं जिसकी वजह से वह अपने नीचे बैठने वाले व्यक्तियों को तपती गर्मी में भी शीतल छांव प्रदान करता है। देवदार के वृक्ष की छाँव में लोगों को एक अजीब सा सुकून व शांति मिलती हैं।

ठीक उसी प्रकार फादर बुल्के भी अपने पास आने वाले व्यक्तियों पर अपनी ममता , करुणा व अपनत्व उड़ेल देते थे। उनकी हर संभव मदद करने का प्रयास करते थे और अपने मधुर वचनों से उनके हृदय को शीतलता प्रदान करने का काम करते थे। इसलिए उनकी उपस्थिति देवदार की छाया-सी लगती है।

प्रश्न 2.

फ़ादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग हैं। किस आधार पर ऐसा कहा गया है ?

उत्तर-

फ़ादर बुल्के भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग बन चुके थे। क्योंकि उन्होंने हिंदी , हिन्दुस्तान , हिन्दुस्तानी संस्कृति को पूरी तरह से आत्मसात कर लिया था। जब से वो बेल्जियम छोड़ भारत आये। तब से वो भारत के ही होकर रह गये। भारत ही अब उनका अपना देश था और भारतीय जनमानस ही उनके अपने परिजन थे । वो भारतीय संस्कृति की “वसुधैव कुटुंबकम” की विचारधारा से प्रेरित थे। और उसी के अनुरूप कार्य भी करते थे। 

फादर बुल्के ने हिंदी को राष्ट्रभाषा की मान्यता दिलाने के लिए बहुत बार प्रयास किया। उन्होंने “ब्लू बर्ड” और “बाइबिल” का भी हिंदी में रूपांतरण कर हिंदी भाषा को समृद्ध करने का काम किया। साथ में उन्होंने प्रसिद्ध अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश भी तैयार किया था । 

प्रश्न 3.

पाठ में आए उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए , जिनसे फ़ादर बुल्के का हिंदी प्रेम प्रकट होता है ?

उत्तर-

फ़ादर बुल्के का हिंदी प्रेम प्रकट करने वाले प्रसंग कुछ इस प्रकार हैं।

  1. फ़ादर बुल्के ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए की डिग्री हासिल की।
  2. इलाहाबाद में फ़ादर बुल्के “परिमल” नाम की एक हिंदी संस्था से भी जुड़े थे। वे अक्सर हिंदी भाषा व साहित्य से संबंधित गोष्ठियों और सभाओं में भी सम्मिलित होते थे।
  3. फ़ादर बुल्के अन्य लेखकों की रचनाओं में स्पष्ट व बेबाक राय रखते थे। और जरूरत होने पर उन्हें सुझाव भी देते थे। 
  4. फादर बुल्के ने ” रामकथा : उत्पत्ति और विकास” में शोध भी किया था। उन्होंने “ब्लू बर्ड नामक नाटक का “नील पंछी” और बाइबिल का हिंदी में अनुवाद भी तैयार किया था। 
  5. फादर बुल्के रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज में हिंदी तथा संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने अंग्रेजी-हिंदी कोष भी बनाया था। 
  6. फादर बुल्के हमेशा ही हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में देखना चाहते थे। 

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प्रश्न 4.

इस पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के की जो छवि उभरती है , उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर-

फ़ादर बुल्के लंबे , गोरे , सफ़ेद भूरी दाढ़ी तथा नीली आँखों वाले एक असाधारण संन्यासी थे । जिनके हृदय में लोगों के लिए अथाह ममता व करुणा भरी थी। और उनके व्यक्तित्व से मानवीय करुणा की दिव्य चमक साफ झलकती थी। वे बहुत मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे।

वो अपने प्रियजनों के सुख दुःख का हमेशा ध्यान रखते थे। उनको रिश्ते निभाने खूब आते थे। वो हमेशा अपने रिश्तों को हृदय से निभाते थे। वो अपनी सौम्यता , गुणों व विद्वता के कारण लोगों में खासे प्रसिद्ध थे। जिस कारण सभी लोग उनका अत्यधिक सम्मान करते थे।

जब वो लोगों के पारिवारिक आयोजनों में उपस्थित होकर उनको अपने हृदय की गहराईयों से स्नेह और आशीर्वाद देते थे। तब ऐसा प्रतीत होता था मानो कोई देवदार का घना पेड़ सबको अपनी शीतल छांव प्रदान कर रहा हो। 

वो पूरी तरह से भारत को ही अपना देश मानते थे। इसीलिए उन्होंने यहां की संस्कृति , सभ्यता व भाषा को पूरी तरह से अपना लिया था। हिंदी भाषी ना होते हुए भी उनकी हिंदी भाषा में जबरदस्त पकड़ थी। जिस कारण उन्होंने ब्लू-बर्ड और बाइबिल का हिंदी में अनुवाद किया था। और एक अंग्रेजी-हिंदी कोष भी तैयार किया । उन्होंने हिंदी भाषा के राष्ट्रभाषा का सम्मान दिलाने का प्रयास भी किया । 

प्रश्न 5.

लेखक ने फ़ादर बुल्के को “मानवीय करुणा की दिव्य चमक” क्यों कहा है?

उत्तर-

लेखक ने फ़ादर बुल्के को “मानवीय करुणा की दिव्य चमक” इसलिए कहा है क्योंकि उनके हृदय में सभी लोगों के लिए प्यार , अपनत्व , वात्सलय और ममता भरी थी। वो प्रेम व वात्सल्य की साक्षात मूर्ति थे। वे सदैव लोगों के सुख दुख में शामिल होते थे। और दुख के वक्त लोगों को अपने मधुर वचनों से सांत्वना देकर उनके दुख को कम करने का प्रयास करते थे। उनकी आंखों में सबके लिए वात्सल्य और ममता साफ झलकती थी और वो अपने हृदय से सभी को आशीर्वाद देते थे। उनका पूरा व्यक्तित्व “मानवीय करुणा की दिव्य चमक” की आभा से प्रकाशित रहता था। 

लेखक के लिए उनको देखना करुणा के निर्मल जल में स्नान करने जैसा और उनसे बात करना कर्म के संकल्प से भरने जैसा था। और उनको याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा था। लेखक के अनुसार उनकी रगों में दूसरों के लिए मिठास भरे अमृत के अतिरिक्त और कुछ नहीं था।

प्रश्न 6.

फ़ादर बुल्के ने संन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नई छवि प्रस्तुत की है , कैसे ?

उत्तर-

जब कोई व्यक्ति सन्यास धारण करता है तो वह सारे सांसारिक रिश्तों को छोड़कर , रागद्वेष की भावना से ऊपर उठकर व मोह माया के जाल को काटकर सिर्फ प्रभु की भक्ति करने के लिए ही साधु का जीवन अपनाता है। उसे दुनिया का कोई दुख या सुख प्रभावित नहीं कर सकता हैं और वह किसी रिश्ते नाते में भी बंधा नहीं होता हैं। यानि सांसारिक मोह माया से बिल्कुल दूर एकांत में रह कर प्रभु भक्ति में लीन रहता  हैं।  

लेकिन फादर सन्यासी स्वभाव व रहन सहन के बिल्कुल विपरीत थे। वो लोगों के बीच में रहते थे। लोगों के सुख दुख में शामिल होते थे। लोगों से गहरा रिश्ता बनाते और फिर उसको पूरे दिल से निभाते थे। वे लोगों के पारिवारिक कार्यक्रमों में सम्मिलित होते या लोगों से मिलने उनके घर आते जाते रहते थे। वह हर किसी व्यक्ति को एक समान भाव से देखते और सब के प्रति प्रेम , आत्मीयता और करुणा का भाव रखते थे। फादर की यही वो बातें हैं जो उनको परंपरागत संन्यासी की छवि से हटकर अलग बनाती हैं।  

प्रश्न 7.

आशय स्पष्ट कीजिए

(क) नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है।

उत्तर-

फ़ादर की मृत्यु पर ईसाई धर्मानुयायी के साथ अनेक साहित्यकार , उनके मित्र जन , हिंदी प्रेमी व अन्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित होकर फादर को नम आँखों से भावभीनि विदाई दे रहे थे।उस वक्त फ़ादर को नम आँखों से विदाई देने वालों की संख्या इतनी अधिक थी कि उनकी गिनती कर उनके नामों का उल्लेख करना स्याही बर्बाद करने जैसा ही हैं। यानि अनगिनत संख्या में लोग वहाँ उपस्थित थे ।

(ख)
 
फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है।

उत्तर

“फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है” का आशय यह है कि जब हम कभी शांत मुद्रा में बैठकर धीमा-धीमा उदास शांत संगीत सुनते हैं। तो हमारा मन एक अजीब से दुख व करुणा से भर जाता है। और हमारे आंखों से अपने आप ही अश्रु धारा बहने लगती है।

पूरे माहौल में एक अजीब सी खामोशी छा जाती है। ठीक ऐसा ही लेखक को तब महसूस होता है जब लेखक फादर को याद करते है। 

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रचना एवं अभिव्यक्ति

प्रश्न 8.

आपके विचार से बुल्के ने भारत आने का मन क्यों बनाया होगा?

उत्तर-

प्राचीन काल से ही भारत ऋषियों-मुनियों की धरती होने के कारण आध्यात्मिक ज्ञान का मजबूत केंद्र रहा है। और आज भी भारत अपने समृद्ध आध्यात्मिक ज्ञान , सभ्यता व संस्कृति , जीवन दर्शन के कारण शेष विश्व के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।

सत्य , अहिंसा , प्रेम , त्याग जैसे श्रेष्ठ जीवन के मार्गों  और संत , महापुरुषों व ऋषि मुनियों के जीवन और गौरवमयी इतिहास से प्रेरित होकर फादर ने शायद भारत आने का मन बनाया होगा। क्योंकि भारत के जैसा दुनिया में और कोई देश नहीं है जिसके पास इतना समर्थ आध्यात्मिक ज्ञान , सत्य , अहिंसा ,त्याग और प्रेम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाले पौराणिक ग्रंथ मौजूद हों।   

प्रश्न 9.

‘बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि-रैम्सचैपल।’-इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएँ अभिव्यक्त होती हैं ? आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं?

उत्तर-

‘बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि-रैम्सचैपल’ इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के का अपनी मातृभूमि के प्रति असीम प्रेम का भाव प्रकट होता है।और वो भारत में रह कर भी अपनी जन्मभूमि-रैम्सचैपल को बहुत याद करते थे। और उसके लिए अपने दिल की गहराइयों से सम्मान व्यक्त करते थे।

आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं?

मैं भी अपनी जन्मभूमि के कण कण से बहुत अधिक प्यार करता हूँ। क्योंकि इसी भूमि में मैंने जन्म लिया। और इसी माटी ने मेरा पालन-पोषण किया। मैं दुनिया में कहीं भी रहूं। लेकिन मैं हमेशा दिल से अपनी जन्मभूमि को याद करता करता रहूंगा। उसके प्रति सम्मान व्यक्त करता रहूंगा।

मुझे अपनी जन्मभूमि की हर एक चीज अपने प्राणों से अधिक प्रिय हैं।अगर जरूरत पड़े तो मैं उसके सम्मान के लिए अपनी जान तक नैाछावर करने को हर पल तैयार हूं। लेकिन अपनी जन्मभूमि पर कोई आंच नहीं आने दूंगा। मुझे अपनी मातृभूमि पर गर्व है। मेरी मातृभूमि जैसा दुनिया में और कोई स्थान नहीं हैं। 

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प्रश्न 10 .

मेरा देश भारत विषय पर 200 शब्दों का निबंध लिखिए?

उत्तर –

मेरा देश भारत” पर निबंध के लिए Click करें – Next Page 

प्रश्न – 11.

आपका मित्र हडसन एंड्री ऑस्ट्रेलिया में रहता है। उसे इस बार की गर्मी की छुट्टियों के दौरान भारत के पर्वतीय क्षेत्र में भ्रमण हेतु निमंत्रण करते हुए पत्र लिखिए ?

उत्तर

358 /54 , कैलाश कॉलोनी

 शिवाजी रोड , अहमदाबाद

दिनांक : 12 जून 2018

प्रिय दोस्त हडसन एंड्री ,

                           सप्रेम नमस्ते।

तुम्हारा पत्र मिला। समाचार प्राप्त कर बड़ी खुशी हुई। यहाँ पर भी सब कुशल मंगल से हैं। मेरी पढाई ठीक चल रही हैं। दोस्त यह पत्र लिखने का खास कारण यह है कि अगले सप्ताह से मेरी गर्मियों की छुट्टियों प्रारंभ हो रही हैं। जो करीबन एक महीने तक चलेगी।और इन गर्मियों की छुट्टियों में मैने भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में भ्रमण करने की योजना बनाई हैं। 

एंड्री मेरी हार्दिक इच्छा है कि तुम भी मेरे साथ भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में भ्रमण के लिए चलो।  इसीलिए मैं तुम्हें इस पत्र के माध्यम से भारत आने तथा अपने साथ भ्रमण के लिए चलने का आमंत्रण दे रहा हूं। हम साथ में नई-नई जगहों को देखेंगे। वहां के रीति रिवाज , खान-पान , रहन- सहन और संस्कृति से रूबरू होंगे। और साथ में खूब मौज मस्ती भी करेंगे। बहुत मजा आएगा। 

एंड्री मेरा पत्र मिलते ही तुम जल्दी से अपने आने की तिथि लिखकर मुझे पत्र भेजना।ताकि जिस दिन तुम आओ , मैं तुम्हें लेने स्टेशन आ जाऊं। घर में मम्मी , पापा को मेरा प्रणाम कहना। मैं तुम्हारे आने का बेसब्री से इंतजार करूंगा।

तुम्हारा दोस्त

नीरज शाह

 प्रश्न 12 .

निम्नलिखित वाक्यों में समुच्यबोधक छांट कर अलग लिखिए ?

उत्तर –

 (1)  तब भी जब वह इलाहाबाद में थे और तब भी जब वह दिल्ली आते थे। 

उत्तर –  और

(2)  मां ने बचपन में ही घोषित कर दिया था कि लड़का हाथ से गया। 

उत्तर –  कि

(3)  वो रिश्ते बनाते थे तो तोड़ते नहीं थे। 

उत्तर –   तो

(4)  उनके मुख से सांत्वना के जादू भरे दो शब्द सुनना एक ऐसी रोशनी से भर देता था , जो किसी           गहरी तपस्या से जानमती है। 

उत्तर –  जो

(5)  पिता और भाइयों के लिए बहुत लगाव मन में नहीं था , लेकिन वह स्मृति में अक्सर डूब जाते हैं। 

उत्तर – लेकिन

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