Hindi Essay On Cinema And Younger Generation

Hindi Essay On Cinema And Younger Generation

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Hindi Essay On Cinema And Younger Generation

सिनेमा व युवा पीढ़ी पर हिंदी निबंध 

संकेत बिंदु / विषय सूची

  1. प्रस्तावना
  2. सिनेमा का महत्व 
  3. युवा पीढ़ी पर सिनेमा का सकारात्मक प्रभाव 
  4. युवा पीढ़ी पर सिनेमा का नकारात्मक प्रभाव 
  5. उपसंहार 

प्रस्तावना

सिनेमा विज्ञान की बड़ी देन है। विज्ञान के इस अविष्कार हैं ने ,  न सिर्फ मनुष्य का मनोरंजन किया बल्कि इसके साथ-साथ सामाजिक चेतना व राष्ट्रप्रेम को भी बढ़ाने का काम किया। सिनेमा के माध्यम से ही मनुष्य ने अपनी सभ्यता , संस्कृति व अपने रीति रिवाजों को पूरे विश्व में फ़ैलाने का काम किया। सिनेमा का प्रभाव न सिर्फ बड़े-बड़े शहरों में बल्कि छोटे-छोटे गांवों में भी आसानी से देखा जा सकता है।

सिनेमा अब एक उद्योग में बदल गया हैं। जिसका कारोबार दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। सिनेमा मनोरंजन का एक लोकप्रिय व सस्ता साधन है। 

सिनेमा का महत्व 

चाहे अमीर हो या गरीब , सभी लोग सिनेमा देखना पसंद करते हैं। और हर वर्ग की पसंद अलग-अलग तरह के सिनेमा में है। जैसे बच्चे कार्टून फिल्में देखना पसंद करते हैं तो युवा वर्ग प्रेमकथाओं व मारधाड़ , एक्शन पर आधारित फिल्में देखना ज्यादा पसंद करता है। इसी तरह बुजुर्ग व्यक्ति धार्मिक व सामाजिक संदेश देती हुई फिल्मों को देखना ज्यादा पसंद करते हैं। 

वैसे भी सिनेमा की दिलचस्प कहानियां दर्शकों के दिलों पर जादू कर देती है। फिल्मों के मधुर गीत संगीत से मन झूम उठता है। फिल्मों के मनोरंजक दृश्यों को देखकर चिंता और तनाव दूर हो जाता है। फिल्में किसी ने किसी कहानी को लेकर बनाई जाती है। कुछ कहानियां पारवारिक व प्रेम कथाएं होती है तो कुछ ऐतिहासिक कहानियों पर फिल्में बनाई जाती हैं। जो लोगों को कुछ न कुछ संदेश अवश्य देती हैं। 

कुछ फिल्में समाज में फ़ैली बुराइयां व कुरीतियों जैसे घरेलू हिंसा , दहेज प्रथा , कन्याभूण हत्या , देशद्रोह , भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं पर भी बनाई जाती है। ये फिल्में समाज को जागरूक करने का काम करती हैं। 

सिनेमा समाज को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसके माध्यम से मनोरंजन के साथ साथ कोई न कोई संदेश दिया जाता है। कुछ फिल्मों ने तो लोगों के अंदर राष्ट्रप्रेम की भावना को जगाने का बहुत सुंदर काम किया। 

सिनेमा के निर्माण में अनेक कलाकारों व मजदूरों की जरूरत पड़ती है। बड़े-बड़े कलाकारों को उनके काम की बहुत अच्छी कीमत दी जाती है। वहीं अनेक लोगों को भी सिनेमा से रोजी रोटी मिलती है।  सिनेमा के विकास के साथ-साथ अभिनय , गीत-संगीत , नृत्य आदि विधाओं का भी विकास होता है। हिंदी फिल्मों ने हिंदी भाषा को लोकप्रिय बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

युवा पीढ़ी पर सिनेमा का सकारात्मक प्रभाव 

सिनेमा युवा वर्ग पर अच्छा और बुरा , दोनों तरह का प्रभाव डालता है। पारिवारिक कहानियों पर बनी फिल्मों में हमारे देश के विभिन्न प्रांतों की संस्कृति , सभ्यता , रीति रिवाजों व पारवारिक मूल्यों को दिखाया जाता है जिससे हमारे देश के नव युवाओं को उनसे परिचित होने का मौका मिलता है।ज्यादातर युवा वर्ग को प्रेमकथाओं और हिंसा-प्रधान फिल्में देखनी अच्छी लगती है

हमारे देश में फिल्मों कई भाषाओं में बनती हैं। मगर हिंदी भाषा में बनने वाली फिल्मों का कारोबार व दर्शक वर्ग सबसे बड़ा है जिससे राजभाषा हिंदी को भी खूब फलने फूलने का मौका मिलता है। और युवाओं को भी अपनी राजभाषा हिंदी से जुड़ने का मौका मिलता है।

देश के युवाओं के हाथ में ही देश का भविष्य सुरक्षित है। इसलिए उनके मन में अपने देश के लिए प्रेम होना चाहिए और उन्हें राष्ट्रीय एकता का महत्व पता होना चाहिए। युवाओं के मन में अपने देश के लिए देश प्रेम की भावना भरने का काम फिल्में बहुत आसानी से कर जाती हैं। क्योंकि फिल्मों का असर बहुत गहरा होता है।और देशभक्ति पर बनी कई फिल्मों ने युवाओं के दिल में राष्ट्रप्रेम की भावना को जगाया भी है। 

युवा वर्ग कुम्हार की कच्ची मिट्टी के समान होते हैं जिनके मन में अच्छी फिल्मों के द्वारा जीवन जीने के नैतिक मूल्यों , राष्ट्रप्रेम की भावना , सामाजिक मूल्यों को डालकर उन्हें एक आदर्श नागरिक बनाया जा सकता है ।

फिल्में युवाओं के दिलों में असर डालने का , उनके मन मस्तिष्क को बदलने का सबसे सरल , सस्ता और प्रभावशाली माध्यम है। 

ज्यादातर युवा वर्ग फिल्मों के नायकों को अपना आदर्श मान बैठते हैं। अगर ऐसे में फिल्मों में नायक मनोरंजन के साथ-साथ कोई सकारात्मक संदेश भी देता है तो युवा उसे बहुत जल्दी ग्रहण करते हैं।

इसीलिए फिल्म के नायक / नायिकाओं का भी यह दायित्व है कि वह ऐसी फिल्में बनाने को प्राथमिकता दें जिससे हमारी युवा पीढ़ी प्रेरणा ले , अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित हो सके , राष्ट्र विकास में अपना योगदान दे सकें और समाज में फैली सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में अपना पूरा सहयोग दें। सिनेमा युवाओं के अंदर मानव मूल्यों का भी विकास करती हैं। 

सिनेमा का युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव 

जहां सिनेमा के ढेर सारे सकारात्मक प्रभाव युवा वर्ग में पडते हैं वहीं कुछ नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। फिल्मों के अश्लील गीतों , उत्तेजक नृत्य व मारामारी के क्रूर व हिंसक दृश्यों  का युवाओं पर बुरा असर पड़ता है। इस तरह की फिल्में युवाओं को यौन अपराधों , हिंसा व अपराध जगत की तरफ धकेलते हैं। 

कुछ युवा फिल्मों से हत्या , चोरी , ठगी आदि तरकीबें भी सीख जाते हैं। सिनेमा के कारण समाज में तरह-तरह के खर्चीली उटपटांग फैशन भी प्रचलित होते हैं।

क्योंकि ज्यादातर युवा फिल्मों के नायक या नायिका को अपना आदर्श मानते हैं। इसीलिए उनकी ख़राब आदतों जैसे शराब , बीड़ी , सिगरेट या अन्य चीजों के सेवन को भी अपनाना शुरू कर देते  है।  आज समाज में अनैतिकता फैलाने में कुछ हद तक सिनेमा भी जिम्मेदार है। 

उपसंहार 

सिनेमा मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक बदलाव का भी एक सशक्त माध्यम है। इसीलिए फिल्म निर्माताओं का कर्तव्य है कि वह ऐसी फिल्में का निर्माण करें जो मनोरंजन के साथ साथ राष्ट्र हित में भी हो। अच्छी फिल्में देश के संपूर्ण विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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