Explanation And Question Answers Of Dhwani : ध्वनि

Dhwani class 8

Dhwani Class 8 CBSE Hindi Basant 3 , Summary Of Dhwani , Explanation Of Dhwani , Dhwani of Question And Answers.  ध्वनि कक्षा 8 बसंत -3 , ध्वनि पाठ का सार भावार्थ व ध्वनि पाठ के प्रश्नों के उत्तर कक्षा 8 बसंत -3। 

ध्वनि ( Dhwani Class 8 Hindi)

ध्वनि कविता के कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निरालाजी हैं। 

निरालाजी मुख्यरूप से छायावादी कवि हैं। उनकी अधिकतर कविताएं प्रकृति से ही प्रेरित होती हैं।सूर्यकांत निरालाजी को बसंत का मौसम बहुत अधिक प्रिय था। इसीलिए उन्होंने बसंत ऋतु पर अनेक कविताएं लिखी हैं।

निरालाजी के जीवन में बहुत सारे उतार चढ़ाव आये। उनके माता-पिता , पत्नी और उसके बाद पुत्री की भी मृत्यु हो गयी। इतनी विपरीत परिस्थितियोँ के बाबजूद भी उन्होंने कभी अपने जीवन में हार नहीं मानी और हमेशा आगे बढ़ कर एक नई शुरुआत की।

अपनी कविताओं के माध्यम से उन्होंने हमेशा ही नई पीढ़ी को जागृत करने का काम किया। उनकी कविताओं में हमेशा ही कुछ न कुछ गूढ़ रहस्य अवश्य छिपा हुआ रहता है।

“ध्वनि” कविता में सूर्यकांत त्रिपाठी निरालाजी ने प्रकृति की मदद से नई पीढ़ी को जागृत करने का काम किया है। वे नई पीढ़ी को पथभ्रष्ट होने से बचाना चाहते हैं और उनके हताश व निराश मन में फिर से आशा का एक दीप जला कर उन्हें उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करना चाहते हैं। 

बसंत ऋतु को “ऋतुराज” कहा जाता है यानि सभी ऋतुओं में बसंत ऋतु को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पतझड़ के बाद जब बसंत ऋतु का आगमन होता है तो पेड़ पौधों में नई-नई कोपलें यानी नई-नई कोमल पत्तियां आने लगती हैं।

बाग , बगीचों , खेत-खलियानों में हरियाली छाने लगती है। चारों तरफ रंग-बिरंगे एक से एक सुंदर फूल खिलते हैं। और जब हवा चलती है तो उन फूलों की भीनी भीनी सुगंधित खुशबू वातावरण में फैल जाती है।

यह सब देख कर लोगों के भी तन-मन खिल उठते हैं। उनमें एक नई ऊर्जा , उत्साह , उमंग का संचार हो जाता है। चारों तरफ खुशहाली छाने लगती हैं। कवि ने उसी समय का वर्णन बहुत खूबसूरती से किया है। और अपनी इस कविता के माध्यम से नवयुवाओं को जागृत करने का काम किया है। 

ध्वनि का भावार्थ 

( Explanation Of Dhwani Class 8)

काव्यांश 1 .

अभी न होगा मेरा अंत
अभी-अभी तो आया है
मेरे वन में मृदुल वसंत
अभी न होगा मेरा अंत। 

 भावार्थ

उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि मेरा अभी अंत नहीं होगा , क्योंकि मेरे मन रूपी वन में अभी-अभी बहुत ही सुंदर बसंत आया है। इसीलिए अभी मेरा अंत नहीं हो सकता। 

इन पंक्तियों में जो गूढ़ रहस्य छुपा है वह यह है कि कवि अपने हिम्मत , हौसले और जज्बे से अपने जीवन की अनगिनत कठिनाइयों को पार कर चुके हैं। इसीलिए वो कहते हैं कि अभी-अभी मैंने अपनी हिम्मत , हौसले से अपने आप को मजबूत किया है।

अपने मन में नई भावनाओं , नए उत्साह व नव ऊर्जा का संचार किया है। जीवन जीने के लिए एक नई आशा , एक नई उम्मीद अपने मन में जगाई है। अब मैं जोश और उत्साह से भरा हुआ हूँ । अब मैं हार नहीं मानूंगा। इसीलिए अभी मेरा अंत नहीं हो सकता। 

काव्यांश 2.

हरे-हरे ये पात,
डालियाँ, कलियाँ, कोमल गात।
मैं ही अपना स्वप्न मृदुल- कर
फेरूंगा निद्रित कलियों पर
जगा एक प्रत्यूष मनोहर।

भावार्थ

बसंत ऋतु के आगमन से सभी पेड़ों पौधों में सुंदर कोमल हरे-हरे पत्ते , डालियाँ , कलियां निकल आती हैं । जो प्रकृति के सौन्दर्य में चार चाँद लगा देती हैं। और आपने देखा होगा कि हर नई सुबह जब सूर्योदय होता है।

और सूरज की पहली किरण जब नन्हीं-नन्हीं नई जन्मी कलियों (जिन्हें कविता में कवि नींद में सोई हुई कलियों कहते हैं ) पर पडती हैं तो वो कलियां सूरज की रोशनी पाकर धीरे-धीरे खिल उठती है। 

दूसरे अर्थ में उपरोक्त पंक्तियों में पत्ते , डालियाँ , कलियां से कवि का मतलब हमारे छोटे बच्चों व नवयुवकों से हैं। कवि कहते हैं कि आज की हमारी जो नई युवा पीढ़ी है , उनके दिमाग में आज जो  सदविचार डाले जाएगे। वह जीवन पर्यंत उनके साथ रहेगे। इसीलिए मैंने जो सुंदर सपने देखे हैं।

उनके साथ मिलकर मैं उन सपनों को पूरा करूंगा और जरूरत पड़ी तो , सोई हुई उस नई पीढ़ी को जागृत करूंगा , उनके मन में नई आशा का संचार करुँगा। उनको पथभ्रष्ट होने से बचाऊँगा। उनको एक उद्देश्य देकर उनके जीवन में एक नया सुंदर सा सवेरा लाऊंगा।

काव्यांश 3 .

पुष्प-पुष्प से तंद्रालस लालसा खींच लूँगा मैं।
अपने नव जीवन का अमृत सहर्ष सींच दूंगा मैं।

भावार्थ-

कवि कहते हैं कि इतना सुंदर सवेरा होने के बाद भी जो कलियों व फूल अभी भी सोये हुये है। मैं उनके आलस्य को दूर भागकर उनको नींद से जगा दूंगा। 

कवि यहाँ पर पुष्प-पुष्प नई पीढ़ी को क़ह रहे है। ऐसे नवयुवा जिनके जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है। यानि सवेरा होने के बाद भी जो , एक तरह की नींद में है। मैं उन सब से उनकी नींदों को छीन लूंगा। और उन सारे सोए हुए लोगों को जगा दूंगा । यानि कवि नवयुवाओं की हताशा व आलस्य को दूर भगा कर उनमें नये उत्साह का संचार करना चाहते है।

कवि कहते हैं कि मेरे मन में जो अमृत रूपी नए-नए विचार आये हैं। जिस नई भावना ने मेरे मन में अभी-अभी जन्म लिया हैं। उनसे ही प्रेरित होकर मैं उन्हें उनके जीवन का एक नया उद्देश्य दूंगा। 

काव्यांश 4.

द्वार दिखा दूंगा फिर उनको
हैं वे मेरे जहाँ अनंत
अभी न होगा मेरा अंत।

भावार्थ-

मेरे मन में आयी अच्छी-अच्छी भावनाएं से ही मैं उनको कुछ नया करने के लिए प्रेरित करूंगा। और उनका सारा आलस्य व उनके मन से निराशा व हताशा को दूर कर उनको सफलता का द्वार (दरवाजा ) दिखा दूँगा। जिसमें चलकर वो अपने जीवन को सार्थक बना सकेंगे।और अपने देश की उन्नति में भी सहयोग कर सकेंगे। 

कवि कहते हैं कि इसीलिए अभी मेरा अंत नहीं होगा क्योंकि अभी तो मेरे जीवन में मधुर बसंत आया है। अभी-अभी तो मेरे मन में नई-नई भावनाओं ने जन्म लिया है। और इन्हीं नई भावनाओं से मुझे अपनी आज की नई युवा पीढ़ी को नया रास्ता दिखना हैं।

अपने नींद में सोये हुए युवाओं को जागृत करना हैं। उनके जीवन को एक उद्देश्य देना हैं। उनका पथ प्रदर्शन करना हैं। यानि मुझे अभी बहुत सारे काम करने हैं। इसीलिए अभी मेरा अंत नहीं हो सकता हैं। 

कविता का संदेश

इस कविता में सूर्यकांत त्रिपाठी निरालाजी फूलों , कलियों और बसंत ऋतु के बहाने से अपनी नई युवा पीढ़ी को यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी विपरीत क्यों न हों , अपने हौसले व हिम्मत को बनाए रखना चाहिए ।

और विपरीत परिस्थितियां का डटकर मुकाबला करना चाहिए । अपने मन में हमेशा आशा की किरण को जगाए रखना चाहिए । और अपने जीवन के लक्ष्य को पाने तक बिना रुके लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए। 

इस कविता में पुनरुक्ति अलंकार , रूपक अलंकार व अनुप्रास अलंकारों का बहुत अच्छा प्रयोग किया गया हैं। 

ध्वनि पाठ के प्रश्न व उनके उत्तर 

प्रश्न 1. 

कवि को ऐसा विश्वास क्यों है कि उसका अंत अभी नहीं होगा ?

उत्तर –

कवि के मन में अभी-अभी नई-नई सुंदर भावनाओं रूपी बसंत ने जन्म लिया हैं। जीवन जीने के लिए एक नया उत्साह , उमंग उनके मन में जागा है। कुछ नये सपनों ने उनके दिल में दस्तक दी हैं। जिनके बल पर कवि को अपनी नई पीढ़ी को जागृत करना है।

उन्हें पथभ्रष्ट होने से बचाना है और एक सही राह दिखानी हैं। उन्हें उनके जीवन का एक उद्देश्य देकर उन्हें सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ाना। इसीलिए कवि कहते हैं कि मेरा भी अंत नहीं हो सकता। 

प्रश्न 2.

फूलों को अनंत तक विकसित करने के लिए कवि कौन-कौन-सा प्रयास करता है ?

उत्तर-

फूलों यानि युवा पीढ़ी को अंनत तक विकसित करने के लिए कवि अपने सपनों , मन में जन्मी नई भावनाओं , उत्साह व उमंग से उनको जगाने की प्रयास करते हैं। ताकि नवयुवा (फूल व कलियां ) एक नई सुबह देख सकें और अपने जीवन के उद्देश्य को पा सकें । और अंनत समय तक खुश रह सकें ।

प्रश्न 2.

कवि पुष्पों की तंद्रा और आलस्य दूर हटाने के लिए क्या करना चाहता है ?

उत्तर – 

कवि पुष्पों व कलियों की नींद व आलस्य को दूर भागने के लिए उन्हें अपने नव जीवन रूपी अमृत से सींचना चाहते हैं। यानि कवि के मन में जो नए अमृत रूपी विचारों व सपनों ने जन्म लिया हैं। वो उन्हीं का हाथ फेरकर उन्हें जगाना चाहते है। उससे ही वो अपनी नई पीढ़ी को प्रेरित कर , उन्हें उनके जीवन पथ कर आगे बढ़ाना चाहते हैं । उनका मार्ग दर्शन कर उनका जीवन सफल बनाना चाहते हैं। 

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