Baaz aur Saanp Class 8 : बाज और साँप का सार , उत्तर 

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Baaz Aur Saanp Class 8 

बाज और साँप

Baaz aur Saanp Class 8 Summary

Note –

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“बाज और साँप” निर्मल वर्मा जी द्वारा लिखित एक सुन्दर प्रेरणादायक कहानी है। इस कहानी के दो पात्रों (बाज और साँप) के माध्यम से निर्मल वर्मा जी हमें यह संदेश देना चाहते हैं कि बिना हिम्मत हारे और बिना रुके , जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना डट कर करना चाहिए क्योंकि साहसी व बहादुर लोगों को दुनिया जीते जी भी सलाम करती हैं और मरने के बाद भी सलाम करती हैं।

लोग सदैव उनकी प्रशंशा के गीत गाते हैं। इसीलिए बार – बार , लगातार तब तक कोशिश करते रहिए  , जब तक आप सफल नहीं हो जाते हैं।

बाज और साँप कहानी का सारांश 

Baaz Aur Saanp Class 8 Summary 

समुद्र के किनारे स्थित एक ऊँचे पर्वत की , एक अँधेरी गुफा में एक साँप रहता था। धूप में चमकती , झिलमिलाती उस समुद्र की तूफानी लहरें दिन भर उस पर्वत की चट्टानों से टकराती रहती थीं। उसी पर्वत की एक घाटी में एक नदी भी बहती थी जो अंतत: समुद्र में आकर मिल जाती थी।

साँप अपनी गुफा में आराम से बैठकर समुद्र की लहरों की आवाज़ और नदी के शोरगुल को चुपचाप शांति से सुनता रहता था। वह अपनी जिंदगी से पूरी तरह संतुष्ट था। वह अक्सर सोचता था कि वह उस गुफा का मालिक है और अपनी उस गुफा में वह बहुत अधिक सुरक्षित और सुखी है। 

लेकिन एक दिन , अचानक एक बाज घायल अवस्था में उसकी गुफा में गिर पड़ा जिसने उसकी जिंदगी को कुछ क्षण के लिए बदल दिया। 

पहले तो साँप अपनी गुफा में बाज को देख कर डर गया लेकिन जब उसे लगा कि बाज मरणासन्न अवस्था में है तो वह धीरे-धीरे सरकते हुए उसके पास गया। पास जाने पर बाज ने सांप को बताया कि उसका जीवन अब समाप्त होने वाला है लेकिन उसे अपने मरने का कोई दुख नहीं है क्योंकि उसने अपने जीवन के हर पल को भरपूर जिया हैं।

दूर-दूर तक खूब लम्बी उड़ानें भरी हैं। स्वतंत्रता पूर्वक आकाश की असीम ऊँचाइयों को अपने पंखों से छुआ है ।

बाज की साहसिक बातें सुनकर सांप , बाज से कहता है कि आसमान की ऊँचाइयों में क्या रखा है ? वह तो जमीन में रहते हुए भी सुरक्षित , प्रसन्न व सुखी हैं और अपनी इस गुफा में बेहद खुश हैं। बाज ने गुफा के अंदर चारों ओर एक नजर दौड़ाई और गुफा से आने वाली दुर्गंध को महसूस किया जो उसे बिल्कुल पसंद नहीं आई। 

फिर बाज ने साँप से कहा कि आकाश में उड़ना बेहद आनन्ददायक होता है। इसीलिए वो एक अंतिम बार फिर से आकाश में उड़ना चाहता है। साँप , बाज को अपनी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिये उत्साहित करने लगा और फिर बाज ने अपनी पूरी हिम्मत व साहस बटोर कर एक बार उड़ने की कोशिश की।

किंतु उसके टूटे हुए पंखों में इतनी शक्ति नहीं थी कि वो उसके घायल शरीर का बोझ सँभाल सकें इसीलिए वह सीधे समुद्र में जा गिरा और थोड़ी देर बहता हुआ समुद्र की लहरों में गायब हो गया। साँप , बाज का ऐसा हाल देखकर हैरान हो गया और उसने मन ही मन सोचा कि आसमान में उड़ने में ऐसा क्या आनंद आता है कि बाज ने अपने प्राण तक गँवा दिए। 

अब साँप के मन में भी आकाश में उड़ने की इच्छा जागती है और वह भी उड़ने की कोशिश करता हैं। चूंकि सांप का शरीर प्रकृति ने उड़ने के हिसाब से नहीं बनाया है। इसीलिये जैसे ही वह उड़ने के लिये अपने शरीर को हवा में उछालता है तो औंधे मुंह ज़मीन पर आ गिरता है लेकिन किसी तरह से बच जाता है।

अब सांप सोचता हैं कि उड़ने में कोई आनंद नहीं है। सारे पक्षी मूर्ख होते हैं। असली सुख तो धरती में ही हैं। ये पक्षी तो व्यर्थ में ही आकाश की ऊँचाइयों को नापना चाहते थे लेकिन अब मैं कभी- भी उड़ने की कोशिश नहीं करूंगा। आराम से सुरक्षित जमीन पर रहूंगा। 

अभी सांप अपनी गुफा में बैठा यही बातें सोच ही रहा था कि तभी उसके कानों में सुंदर गीतों की मधुर ध्वनि सुनाई पड़ी। इस समंदर में इतने मधुर स्वर में कौन गा रहा है ? यही देखने के लिए सांप अपनी गुफा से बाहर आया तो देखा कि समुद्र की लहरें उस बाज की प्रशंशा में मधुर गीत गा रही थी जिसने बिना हार माने , बिना हिम्मत गँवाये , आकाश में उड़ने की चाहत में अपने प्राणों की बाजी लगा दी। 

गीत गाते हुए समुद्र की लहरें कह रहीं थी कि “उनका यह सुंदर गीत उन सभी बहादुर व हिम्मती लोगों को समर्पित है जो अपने लक्ष्य व अपनी स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए अपने प्राणों की परवाह भी नहीं करते हैं और इस दुनिया में वही व्यक्ति चतुर है जो अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर , आने वाले हर खतरे का बहादुरी से सामना करे और अपनी जिंदगी को पूरी आजादी के साथ भरपूर जिए”।

यहां पर लेखक समुद्र की लहरों के माध्यम से सभी को यह संदेश देना चाहते हैं कि लगातार और बार-बार प्रयास करने से ही सफलता मिलती है। भले ही आपको शुरुवात में असफलता का सामना क्यों ना करना पड़े लेकिन आप तब तक प्रयास करते रहें जब तक आप अपने लक्ष्य को प्राप्त नही कर लेते। 

उसके बाद समुद्र की लहरें बाज से कहती हैं कि ” ओ निडर बाज !! शत्रुओं से लड़ते हुए तुमने अपना कीमती रक्त बहाया है पर वह समय दूर नहीं है , जब तुम्हारे खून की एक-एक बूँद जिंदगी के अँधेरे में प्रकाश फैलाएगी और साहसी व बहादुर लोगों के दिलों में स्वतंत्रता प्राप्ति का जज्बा पैदा करेगी।

बाज , तुम मर कर भी अमर हो और जब भी इस दुनिया में वीरता के गीत गाए जाएंगे , तुम्हारा नाम उन गीतों में श्रद्धा के साथ लिया जाएगा”। 

और अंत में लहरें कहती हैं कि “हमारा गीत जिंदगी के उन दीवानों के लिए है जो मृत्यु से नहीं डरते”।

बाज़ की बहादुरी व कुर्बानी के आगे समुद्र की लहरें भी नतमस्तक थी। लेखक की ये पंक्तियों स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए लोगों के दिलों में प्रेम व साहस पैदा करती हैं।

बाज और साँप के प्रश्न उत्तर

Baaz Aur Saanp Class 8 Question Answer 

Note –

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प्रश्न 1.

घायल होने के बाद भी बाज ने यह क्यों कहा, “मुझे कोई शिकायत नहीं है”। विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर-

बाज ने अपना पूरा जीवन पूरी स्वतंत्रता के साथ जिया। उसने जीवन के हर पल का आनंद उठाया और हर सुख को भोगा। अपने साहस और हिम्मत से उसने आसमान की असीम ऊंचाइयां को नाप दिया और मृत्यु के भय से डरे बिना हर खतरे का सामना किया। इसीलिए मृत्यु को निकट देख उसे अपने आप से कोई शिकायत नहीं थी। 

प्रश्न 2.

बाज जिंदगी भर आकाश में ही उड़ता रहा फिर घायल होने के बाद भी वह उड़ना क्यों चाहता था ?

उत्तर-

बाज बहुत साहसी प्रवृत्ति का था और उसे खतरों से खेलने में मजा आता था। उसने आसमान की असीम ऊंचाइयों में स्वछंदता पूर्वक उड़ने का आनंद प्राप्त किया था। इसीलिए अब वह अपना अंतिम समय उस गुफा के दुर्गंध भरे वातावरण में नहीं बिताना चाहता था।

और मरने से पहले एक बार फिर आसमान में उड़ कर उस असीम सुख को प्राप्त कर लेना चाहता था जो उसे आसमान की ऊंचाइयों में उड़ने से मिलती थी। इसीलिए वह उड़ना चाहता था। 

प्रश्न 3.

साँप उड़ने की इच्छा को मूर्खतापूर्ण मानता था। फिर उसने उड़ने की कोशिश क्यों की ?

उत्तर –

सांप सोचता था कि सारे पक्षी मूर्ख होते हैं जो आसमान में उड़ने के लिए लालायित रहते हैं। लेकिन जब उसने देखा की बाज घायल अवस्था में भी आकाश में उड़ने के लिए कितना बेचैन था और सिर्फ आसमान में उड़ने की खुशी पाने के लिए उसने अपने प्राण तक गँवा दिये ।

यह बात उसे बेचैन कर रही थी। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर आकाश में उड़ने में क्या खुशी मिलती है। वह इसी रहस्य को जानना चाहता था। इसीलिए उसने आकाश में उड़ने का फैसला किया।

प्रश्न 4.

बाज के लिए लहरों ने गीत क्यों गाया था ?

उत्तर

बाज वाकई में अदम्य साहसी था।घायल होने के बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने जीवन के अंतिम समय में भी , अपनी इच्छा पूर्ति के लिए ,  अपने प्राणों की बाज़ी लगाकर , स्वछंदता पूर्वक आकाश में उड़ने का एक अंतिम प्रयास किया। इसीलिए लहरों ने बाज की हिम्मत व साहस की प्रशंसा के गीत गाए।

प्रश्न 5.

घायल बाज को देखकर साँप खुश क्यों हुआ होगा ?

उत्तर-

सांप बहुत कायर था। वह सोचता था कि वह अपनी गुफा में बिल्कुल सुरक्षित व सुखी है। लेकिन जब अचानक उसकी गुफा के पास एक घायल बाज आ गिरा तो , वह काफी भयभीत हो गया और उसे अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी।

लेकिन जब उसने देखा कि बाज स्वयं ही घायल और अधमरा हैं और उसे कोई हानि नहीं पहुंचा सकता हैं तो वह अपने आप को सुरक्षित महसूस करने लगा। इसीलिए वह खुश हो गया।  

Baaz aur Saanp Class 8 

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