Essay On My Favorite Book : मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध

Essay On My Favorite Book : मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध

निबंध हिंदी में हो या अंग्रेजी में , निबंध लिखने का एक खास तरीका होता है। हर निबंध को कुछ बिंदुओं (Points ) पर आधारित कर लिखा जाता है। जिससे परीक्षा में और अच्छे मार्क्स आने की संभावना बढ़ जाती है।

हम भी यहां पर “मेरी प्रिय पुस्तक /Essay On My Favorite Book ” पर निबंध को कुछ बिंदुओं पर आधारित कर लिख रहे हैं। आप भी अपनी परीक्षाओं में निबंध कुछ इस तरह से लिख सकते हैं। जिससे आपके परीक्षा में अच्छे मार्क्स आयें।

Essay On My Favorite Book

मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध

Content 

  1. प्रस्तावना (Introduction)
  2. मेरी प्रिय किताब (My Favorite Book )
  3. “सत्य के प्रयोग” क्यों हैं मेरी पसंदीदा किताब (Why this is my Favorite Book)
  4. पुस्तक की भाषा (Language of my Favorite book)
  5. किताब से मिली प्रेरणा ( Inspirational Book )
  6. उपसंहार

प्रस्तावना 

Essay On My Favorite Book :किताबों ही इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। कहते हैं कि एक अच्छी किताब सौ दोस्तों के बराबर होती हैं। जो इंसान को विपरीत परिस्थितियों में भी सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।  कठिन समय पर भले ही आपके दोस्त , परिचित , आपके रिश्तेदार आप से मुंह मोड़ लें। मगर एक  एक अच्छी और प्रेरणादायक किताब आपको हमेशा जीवन में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती ही रहेगी।

ये किताबें ही हमारी सच्ची साथी व हमारी धरोहर होती हैं।जो हमारी आने वाली पीढ़ी को हमारे पूर्वजों व हमारे बारे में बिना एक शब्द बोले ही सब कुछ बता देंगी। 

मेरी प्रिय किताब (My Favorite Book )

मुझे बचपन से ही किताबें पढ़ने का बहुत शौक है।जब भी समय मिलता है। मैं अपने नजदीकी लाइब्रेरी में जाकर किताबों के साथ अपना समय बिताना पसंद करता हूं।

यूं तो मैंने अनेक किताबें पढ़ी हैं लेकिन इस गर्मियों की छुट्टियों में , मैं एक दिन लाइब्रेरी में जाकर पढ़ने के लिए किताब ढूंढ रहा था। तभी अचानक मेरी नजर महात्मा गांधी द्वारा लिखित “Experiment With Truth यानी सत्य के प्रयोग ” नाम की एक किताब पर पड़ी।

जिसे मैंने उत्सुकता बस पढ़ना शुरू किया। लेकिन जैसे-जैसे में किताब को पढता गया , वैसे वैसे उस किताब में मेरी रुचि बढ़ती गई।तभी से यह किताब मेरी पसंदीदा किताबों की लिस्ट में शामिल हो गई। 

सत्य के प्रयोग क्यों हैं मेरी पसंदीदा किताब (Why this is my Favorite Book)

मूल रूप से गांधी जी ने यह किताब अपनी मातृभाषा गुजराती में ही लिखी है।जिसका नाम “सत्य ना प्रयोगो” है । लेकिन बाद में इस किताब का अनुवाद हिंदी , मराठी और अंग्रेजी में भी किया गया है। हिंदी में इसका नाम “सत्य के प्रयोग” , मराठी में “सत्याचे प्रयोग” और अंग्रेजी में “Experiment With Truth” है।

समय के साथ-साथ इस किताब को भारत की अन्य भाषाओं में भी अनुवाद किया गया।ताकि अधिक से अधिक लोग इस किताब को पढ़ सकें। और गांधी जी के जीवन के अनुभवों से लाभ उठा सकें। 

यह किताब मूल रूप से गांधीजी की आत्मकथा (Autobiography ) है । इस किताब का नाम “सत्य के प्रयोग” रखने का मुख्य उद्देश्य शायद यह रहा होगा कि गांधी जी अपने जीवन में सत्य व अहिंसा को सबसे अधिक महत्व देते थे। इसीलिए उन्होंने अपनी आत्मकथा का नाम भी यहीं रखा।

“सत्य के प्रयोग” पुस्तक में गांधीजी ने अपने जीवन में घटित हर घटना को एक कथा के रूप में लिखा है। जिसमें उन्होंने अपने माता पिता , परिजनों , छोटी उम्र में अपने विवाह के अनुभवों को बांटा हैं। इसके साथ ही अपनी पढ़ाई , विदेश यात्रा , वकालत , दक्षिण अफ्रीका में घटित घटनाओं तथा स्वतंत्रता आंदोलन की घटनाओं को विस्तार से लिखा है। 

यहाँ तक कि गांधीजी ने इस किताब में अपनी कमियों एवं बुराइयों का भी खुलकर वर्णन किया है।उन्होंने अपने धूम्रपान , मांसाहार व चोरी करने आदि के बारे में भी कुछ नहीं छुपाया है।उन्होंने अपनी गलतियों को भी ईमानदारी से स्वीकार किया है।उन्होंने यहाँ तक भी लिखा है कि किस प्रकार वो इन बुराइयों के जाल में फंसे और फिर कैसे उन्होंने इस सब से छुटकारा पाया।

पुस्तक की भाषा सरल व सहज (Language of my Favorite book)

इस किताब की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी भाषा बहुत ही सरल व सहज है। तथा इसमें किये गए प्रसंगों का उल्लेख भी हृदय को छू लेने वाले है। इसकी शैली भी बहुत रोचक है।

इस पुस्तक को पढ़ने से पाठक के हृदय में सत्य , अहिंसा , प्रेम , आत्मविश्वास तथा मानव मात्र की सेवा के भाव जागृत होते हैं। 

किताब से मिली प्रेरणा ( Inspirational Book )

वैसे तो गांधीजी का पूरा व्यक्तित्व , उनका पूरा जीवन सिर्फ हम भारतीयों के लिए ही नहीं , वरन पूरे विश्व के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है।सिर्फ भारत के लोग ही नहीं , वरन पूरे विश्व के लोग आज भी गांधीजी के जीवन से प्रेरणा लेते हैं।और उनके बताये मार्ग में चलने का प्रयास करते हैं।

मजबूत अंग्रेजी साम्राज्य की नींव को हिला देने का असंभव कार्य भी उन्होंने सिर्फ सत्य और अहिंसा के बल पर ही संभव कर दिखाया। 

गांधीजी के ये संस्मरण हमें और हमारी आगे आने वाली पीढ़ी को सदैव प्रेरणा देते रहगें । यह किताब हमें बताती है कि एक साधारण व्यक्ति भी किस तरह महान व्यक्ति बन सकता है। और राष्ट्रपिता व महात्मा जैसे सम्मानीय पद को प्राप्त कर सकता है।

गांधीजी एक समाज सुधारक भी थे। जिन्होंने दलित उद्धार और उनके शोषण के खिलाफ आवाज उठायी थी। यह किताब आज के सन्दर्भ में काफी प्रभावशाली है। 

उपसंहार 

गांधीजी की आत्मकथा ने मेरे मन में गहरा प्रभाव डाला।यह किताब हमें बुराइयों से दूर रहने तथा  प्राणी मात्र की सेवा करते हुए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

गांधीजी द्वारा लिखित यह किताब प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक सच्ची मित्र , गुरु और मार्गदर्शक की तरह ही है। मैं चाहूँगा कि प्रत्येक भारतीय गांधीजी की इस आत्मकथा को एक बार अवश्य पढ़ें। 

Essay On My Favorite Book : मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध

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