आत्मनिर्भर भारत के लिए हमें अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए 

My duties for an Atma Nirbhar Bharat,

While I exercise my rights , I must not forget to undertake my duties to usher in an Atma Nirbhar Bharat.

My duties for an Atma Nirbhar Bharat

जब मैं अपने अधिकारों का प्रयोग करता हूं तो , मुझे एक आत्मनिर्भर भारत में अपने कर्तव्यों का पालन करना नहीं भूलना चाहिए। 

Content /संकेत बिन्दु /विषय सूची 

  1. प्रस्तावना
  2. नागरिकों के अधिकार 
  3. नागरिकों के कर्तव्य 
  4. उपसंहार 

प्रस्तावना

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।और यहां पर कई धर्म , जाति , संप्रदाय के लोग एक गुलदस्ते में भांति-भांति के फूलों की तरह एक साथ रहते हैं। यही हमारे लोकतंत्र की खासियत है और यही हमें दुनिया में एक अलग पहचान भी देती है। 

While I exercise my rights , I must not forget to undertake my duties to usher in an Atma Nirbhar Bharat.

हमारे देश का संविधान , देश के सभी नागरिकों को एक समान अधिकार देता हैं और देश के कानून की नजर में सब एक समान है। लेकिन हमारे अपने देश के प्रति कुछ कर्तव्य भी हैं जिन्हें हमें पूरी ईमानदारी के साथ निभाने चाहिए। क्योंकि कर्तव्य और अधिकार दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। और प्रत्येक नागरिक के लिए दोनों का पालन करना अनिवार्य है। 

नागरिकों के अधिकार

हमारे संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को जीने के सभी अधिकार समान रूप से दिए हैं ताकि  देश का हर नागरिक अपने देश में सुरक्षित व सम्मानित तरीके से जी सकें।देश के प्रत्येक नागरिक को सबसे पहले अपने शारीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान देना आवश्यक है क्योंकि भारत का हर नागरिक भारत की उन्नति व विकास के लिए या आत्मनिर्भर भारत के लिए मानव पूंजी के रूप में अपना योगदान दे सकता है। 

हर व्यक्ति को अपने आर्थिक विकास के लिए हर वक्त प्रयत्नशील रहना चाहिए। ताकि वह अपने परिजनों का अच्छे से भरणपोषण कर सके और आर्थिक रूप से समृद्ध होकर समाज में एक सम्मानीय स्थान प्राप्त कर सके।साथ में देश और समाज की उन्नति में भी अपनी भागीदारी निभा सके।

हमारे संविधान में नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकार दिए गए हैं। समानता के अधिकार में भारत के सभी नागरिकों को एक समान माना गया है। इसीलिए नागरिकों में लिंग , जाति , धर्म  व सम्प्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।

इसी तरह हमें स्वतंत्रता का अधिकार भी प्राप्त है। हम किसी भी समय अपने देश के किसी भी हिस्से में जा सकते हैं। किसी भी स्थान पर रह सकते हैं और अपनी इच्छा अनुसार कोई भी व्यवसाय या नौकरी कर सकते हैं।इसमें संविधान हमारी पूरी पूरी मदद करता है।

हमें अपने कमाए हुए पैसों को खर्च करने की भी आजादी है।हम अपने पैसों को किस तरह खर्च करेंगे और कहां खर्च करेंगे , यह पूरी तरह से हम पर ही निर्भर करता है। 

हम अपने विचारों को दुनिया व समाज के सामने प्रकट करने के लिए भी आजाद हैं।यानि हम अपनी सोच व विचारों को किसी भी रूप में दुनिया के सामने रख सकते हैं। बशर्ते वह देश के खिलाफ न हो।  

शिक्षा के अधिकार में 14 वर्ष से कम उम्र के प्रत्येक बच्चे को स्कूल जाना अनिवार्य किया गया है। ताकि हर बच्चा बाल्यावस्था में सिर्फ शिक्षा पर ही ध्यान दें। क्योंकि शिक्षा ही समाज की उन्नति का आधार। देश के विकास का रास्ता भी। 

इसी तरह 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से कोई जोखिम पूर्ण कार्य नहीं कराया जा सकता है। जैसे कारखानों , खदानों और फैक्ट्रियों में काम नहीं कराया जा सकता। यह शोषण के विरुद्ध अधिकार में वर्णित है।

भारत के प्रत्येक नागरिक को अपनी भाषा और संस्कृति को बनाए रखने और उसका विकास करने का पूर्ण अधिकार भी है। देश के किसी भी नागरिक को किसी भी अपराध का दोषी तब तक नहीं माना जाता है जब तक वह कानून नहीं तोड़ता या जब तक जुर्म साबित नहीं हो जाता है। 

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संविधान द्वारा दिए गए आपके अधिकारों का कोई भी हनन नहीं कर सकता है। अगर कोई हनन करता है तो कोर्ट आपके अधिकारों की रक्षा करता है।

अपने देश में किसी भी व्यक्ति को खरीदा या बेचा नहीं जा सकता। किसी भी व्यक्ति का शोषण करना अपराध है। 

नागरिकों के कर्तव्य (My duties for an Atma Nirbhar Bharat)

अगर हम संविधान या देश के द्वारा दिए गए अपने अधिकारों का प्रयोग करते हैं तो हमें अपने कर्तव्यों का निर्वहन भी करना चाहिए।  प्रत्येक व्यक्ति के स्वयं अपने लिए , अपने परिवार , पड़ोसी , समाज और देश के लिए कुछ कर्तव्य भी होते हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है। 

इसीलिए भारत के प्रत्येक नागरिक को संविधान में बताए गए हर नियम व कानून का पालन ईमानदारी से करना अनिवार्य है। देश के राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह जैसे झंडा , राष्ट्रगीत , राष्ट्रगान आदि का आदर व सम्मान करना चाहिए। यह हमारा अपने देश के प्रति प्रथम कर्तव्य हैं।राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों का कभी भी अपमान नहीं करना चाहिए।

 प्रत्येक देशवासी का कर्तव्य है कि वह अपने देश की आन , बान , शान पर मर मिटने को हर वक्त तैयार रहें। क्योंकि इसी माटी ने हमें सब कुछ दिया है तो इस माटी के प्रति भी हमारा कर्तव्य है कि हम इसकी हिफाजत अपने प्राणों को देकर भी करें। देश की रक्षा को अपना प्रथम कर्तव्य मानकर उसे निभाना चाहिए।  

जब भी देश में संकट आए या विपरीत परिस्थितियां हो तो , हमें देश की सुरक्षा के लिए या देश में अमन चैन व शांति बहाल करने के लिए , अगर अपने प्राणों को भी कुर्बान करना पड़े तो , झिझक नहीं चाहिए। 

जाति , धर्म , लिंग के भेदभाव से ऊपर उठकर हमें समाज में भाईचारे , सौहार्द व एकता की भावना का विकास करना चाहिए।जब देश में शांति रहेगी तभी समृद्धि भी आएगी और देश तरक्की के रास्ते पर भी चलेगा। 

समाज में फैली कुरीतियों व कुप्रथाओं का त्याग कर देना चाहिए।क्योंकि यह किसी भी व्यक्ति या समाज को पीछे की तरफ धकेलते हैं। विकास के पथ पर सबसे बड़े बाधक हैं। 

हमें अपने गौरवशाली परंपरा , संस्कृति का महत्व समझ कर उसको सहेज कर रखना चाहिए। और उसका विकास करना चाहिए। क्योंकि यही हमारी असली पहचान है। हमारा गौरव हैं। 

अपने पर्यावरण जैसे पेड़-पौधे , जीव- जंतु , नदी , जंगल आदि की रक्षा का दायित्व भी हमारा ही है। नए पेड़ पौधों को लगाकर अपने वातावरण व अपनी धरती को हरा-भरा बनाए रखना चाहिए। ताकि हमारा पर्यावरण स्वास्थ्य व सुंदर हो। 

समाज में वैमनस्य , धार्मिक उन्माद , राग द्वेष फैलाने , तोड़फोड़ आगजनी करने वाले तत्वों से दूर रहना चाहिए। और सम्भव हो सके तो , उन्हें ऐसा करने से रोकना चाहिए। आपसी सौहार्द , भाईचारे व एकता को बढ़ाने में विशेष ध्यान होना चाहिए। 

किसी भी सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। समय पर सरकार द्वारा बनाए गए टैक्सों का भुगतान अवश्य करना चाहिए। क्योंकि ये टैक्स हमारे लिए विकास कार्यों पर खर्च होता है। 

उपसंहार 

 हम अपने अधिकारों की बात तो खूब बढ़ चढ़कर करते हैं। लेकिन हम कहीं अपने कर्तव्यों को भूल जाते हैं। हमें अपने कर्तव्यों को भी याद रखना चाहिए। जहां हम अपने अधिकारों का जम कर प्रयोग करते हैं , तो वही हमें अपने देश व समाज के लिए अपने कर्तव्यों को नहीं भूलना चाहिए। अगर देश का प्रत्येक नागरिक अपने दायित्व और कर्तव्य की सीमाएं को समझें।और उनका ईमानदारी से पालन करें।तो हम विकास की ऊंचाइयों को छू सकते हैं। 

हमारा अतीत गौरवशाली था ,  तो भविष्य भी गौरवशाली व समृद्धिशाली रहें। इसके लिए प्रत्येक भारतवासी को मिलकर प्रयास करना होगा। हमें भारत के विकास व भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अपना पूर्ण सहयोग देना होगा। जब हम अपने अधिकारों और अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी से करेंगे। तभी हमारा भारत श्रेष्ठ व वैभवशाली भारत बनेगा। 

While I exercise my rights , I must not forget to undertake my duties to usher in an Atma Nirbhar Bharat.

जब मैं अपने अधिकारों का प्रयोग करता हूं तो मुझे एक आत्मनिर्भर भारत में अपने कर्तव्यों का पालन करना नहीं भूलना चाहिए। 

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