Essay On Raksha Bandhan: रक्षाबंधन या राखी पर निबन्ध

Two Essay On Raksha Bandhan : रक्षाबंधन या राखी पर दो हिन्दी निबन्ध

निबन्ध -1 

Essay On Raksha Bandhan

रक्षाबंधन या राखी पर हिन्दी निबन्ध

प्रस्तावना 

दीपावली , दशहरा ,  होली , रक्षाबंधन आदि त्यौहार हमारे देश में बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं।  रक्षाबंधन हमारे देश का अति प्रिय व पवित्र त्यौहार है। हर साल सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्यौहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। रेशम के धागे न सिर्फ हमारे हाथ में बंधते हैं , बल्कि हमारे मन भी स्नेह और आत्मीयता के बंधनों में बांध जाते हैं। 

रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने का कारण  

एक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर राजा बली का घमंड चूर किया था। इसीलिए इस त्यौहार को “बलेव” नाम से भी जाना जाता है। महाराष्ट्र में यह त्यौहार नारियल पूर्णिमा या श्रावणी पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है।इस दिन लोग समुद्र या नदी तट पर जाकर नये जनेऊ धारण करते हैं। और जलाशयों की पूजा की जाती है।

रक्षाबंधन के संबंध में एक और पौराणिक कथा प्रचलित है।एक बार देव और दानवों के बीच युद्ध हुआ।और देवता पराजित हो युद्ध स्थल से भयभीत होकर भागने लगे और भागकर वो इंद्रदेव की शरण में चले गए। 

देवताओं को भयभीत देकर इंद्राणी ने उनके हाथों में रक्षा सूत्र बांधा। इससे देवताओं का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने दानवों पर विजय प्राप्त कर ली। कहा जाता है कि तभी से राखी बांधने की प्रथा शुरू हुई। 

इतिहास भी राखी के पवित्र बंधन का गवाह हैं।कहा जाता हैं कि चित्तौड़ की राजमाता कर्मावती ने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजकर अपना भाई बनाया था और राजमाता कर्मावती के संकट के समय बादशाह हुमायूं  अपनी बहन की रक्षा के लिए चित्तौड़ा पहुंचा था। 

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रक्षाबंधन की तैयारियों (Essay On Raksha Bandhan)

रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने विश्वास व स्नेह का धागा बड़े प्यार से अपने भाई की कलाई में बांधती है।रेशम की यह डोर भाई बहनों के रिश्तों की डोर को और मजबूती प्रदान करती है।इस दिन भाई अपनी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करने का , हर वक्त उसका साथ निभाने का वादा देता है।

रक्षाबंधन के अवसर पर भाई बहन का स्नेहा निखर उठता है।बहनें बड़े सज- धज कर उत्साह के साथ अपने भाइयों के माथे पर टीका लगाकर मंगलकामनाओं के साथ उसके हाथ में राखी बांधती है। भाई बहन को प्यार स्वरूप उपहार देता है। 

इस दिन शादीशुदा बहनें भी अपने मायके आ कर अपने भाइयों को राखी बांधती है।अगर किसी कारण से बहन नहीं आ पाती तो भाई ही उसके पास जाकर राखी बनवा लेता है।

पेड़ों व जवानों को भी बांधी जाती हैं राखी

हालांकि राखी का त्यौहार भाई-बहनों का त्यौहार माना जाता है।लेकिन इस दिन कई लोग अपने बड़े-बुजुर्गों जैसे दादा ,पिता , गुरु-जन को भी राखी बांधते है।

कुछ लोग जो पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं। वो पेड़ों को राखी बांध कर पर्यावरण और पेड़ों को बचाने का संकल्प लेते हैं।कुछ महिलाएं सीमा पर तैनात जवानों को भी राखी बांधती है।और उनके प्रति आभार प्रकट करती हैं।

रक्षाबंधन का बदला स्वरूप 

आज समय बदल गया है।आज भाई बहन अपनी व्यस्तता के कारण अगर एक दूसरे से मिलने नहीं जा पाते हैं। तो ऐसे में ऑनलाइन स्टोर से राखी व उपहार खरीद कर एक दूसरे को भेजे जाने का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। और यह उनकी समस्याओं का आसान हल भी है। इस डिजिटल माध्यम से ही सही भाई बहन आपस में जुड़े रहते हैं। और एक दूसरे को अपनी भावनाओं से अवगत कराते हैं। 

राखियों में भी व्यवसायिकता आ गई है। धन कमाने के लिए एक से बढ़कर एक कीमती की राखियां बनाई जाती हैं।रक्षाबंधन के त्यौहार में सुरक्षा की भावना का ही अधिक महत्व है। ना कि कीमती राखियों का।

उपसंहार 

सचमुच रक्षाबंधन पारिवारिक व सामाजिक एकता का एक सुंदर एवं पवित्र पर्व है। प्रत्येक नारी के प्रति बहन सी पवित्र भावना रख नारी सम्मान की प्रेरणा देता है। राखी के धागों का संबंध मन की पवित्र भावनाओं से है। सचमुच वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में रक्षाबंधन का महत्व पहले से अधिक बढ़ गया हैं। 

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निबन्ध -2  

Essay On Raksha Bandhan

रक्षाबंधन या राखी पर हिन्दी निबन्ध

प्रस्तावना

भाई बहनों का रिश्ता दिल की गहराइयों से जुड़ा होता है।निस्वार्थ प्यार , आत्मीयता , एक दूसरे के लिए कुछ कर गुजरने की भावना , भाई बहन के प्यार की पहचान है।भारतवर्ष में इसी भाई बहन के प्यार को समर्पित रक्षाबंधन का त्यौहार सावन माह की पूर्णिमा (जिसे राखी पूर्णिमा कहते हैं ) को मनाया जाता है। इसलिए इसको श्रावनी पर्व भी कहा जाता है।

क्यों मनाया जाता हैं रक्षाबंधन का त्यौहार

इस त्यौहार के बारे में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार देव व दानवों के बीच  युद्ध हुआ। जिसमें जब देवता हारने लगे। तो वो देवराज इंद्र के पास पहुंचे।इसी दिन देवराज इंद्र की पत्नी शची ने सभी देवताओं को रक्षा सूत्र धागा बांधा था। इस एकता के बल पर देवताओं ने असुरों पर विजय पाई थी।

एक अन्य कथा के अनुसार प्राचीन काल में श्रावणी पूर्णिमा के दिन ऋषि मुनि अपनी साधना की पूर्ण आहुति करते थे। इस अवसर पर वे राजाओं की कलाई में राखी बांधकर उन्हें आशीर्वाद देते थे। रक्षाबंधन के बारे में एक और कथा प्रचलित है। जिसके अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने राजा बलि का घमंड चूर चूर किया था।

इसीलिए गुजरात में रक्षाबंधन के पर्व को “बलेव” भी कहते हैं। महाराष्ट्र में यह पर्व “नारियल पूर्णिमा” के रूप में मनाया जाता है। 

रक्षाबंधन की तैयारियों (Essay On Raksha Bandhan)

रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक त्यौहार है।बहनें रक्षाबंधन की तैयारी कुछ दिन पहले से ही शुरू कर देती है। बाजार एक से एक सुंदर, रंग बिरंगी राखियों से सज जाता है। आजकल तो बाजार में अनेक तरह की सुंदर-सुंदर राखियों मिलती हैं जैसे खिलौने वाली राखियां, कार्टून वाली राखियां व सोने या चांदी की राखी।

रक्षाबंधन की तैयारी हर घर में बड़े उत्साह से की जाती है।सभी बहनें अपने भाइयों के लिए अपनी मनपसंद की राखी बाजार से खरीद कर लाती हैं।कई लोग घर में भी अपने हाथों से सुंदर सुंदर राखियां बनाते हैं।खासकर बच्चे तो अपनी कार्टून वाली राखियां पहनने के लिए कुछ ज्यादा ही उतावले रहते हैं

राखी का उत्साह भरा दिन

राखी के दिन सुबह सबसे पहले भगवान की पूजा अर्चना कर भगवान को राखी भेंट की जाती हैं।उसके बाद बहनें अपने भाई को प्यार से राखी बांधती हैं। और उनके लिए सुखद भविष्य के लिए मंगलकामनाएं करती हैं। भाई भी बड़े स्नेह से अपनी बहनों को उपहार प्रदान करते हैं।

घर में बहनें भाइयों के पसंद के पकवान तैयार करते हैं। और स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ भाई बहनों का यह त्यौहार बड़े ही उत्साह , उमंग से मनाया जाता है। 

रक्षाबंधन के दिन ब्राह्मण भी अपने यजमानों के घर जाकर उनके हाथों में रक्षा सूत्र बांधते हैं।आजादी के बाद रवींद्रनाथ टैगोर ने शांति निकेतन में राखी महोत्सव का आयोजन किया था। जिसका उद्देश्य विश्व में विश्व बंधुत्व की भावना को जगाना , आपसी सौहार्द व भाईचारे को बढ़ाना था।

कुछ पर्यावरणप्रेमी इस दिन पेड़ों को राखी बांध कर पर्यावरण और पेड़ों को बचाने का संदेश लोगों को देते हैं।कुछ महिलाएं सीमा पर जाकर जवानों को भी राखी बांधती है।जो हरदम दुश्मनों से हमारी रक्षा करते है।

विदेशों में भी मनाया जाता हैं रक्षाबंधन का त्यौहार

रक्षाबंधन का त्यौहार विदेशों में भी मनाया जाता हैं। मॉरीशस , नेपाल व अन्य देशों में रहने वाले हिन्दू परिवार इसे बड़े धूमधाम से मनाते है। 

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डिजिटल दुनिया का राखी में प्रभाव 

आजकल की व्यस्ततम जिंदगी में कई बार बहिन भाई के घर नहीं जा पाती हैं।ऐसे में डिजिटल दुनिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।अब कोई भी बहिन ऑनलाइन स्टोर से राखी खरीद कर अपने भाई को भेज सकती हैं।इसी तरह भाई भी ऑनलाइन उपहार खरीद कर अपनी बहनों को भेज सकते हैं ।कुछ समय से वर्चुअल राखियों को भेजने का प्रचलन चलन तेजी से बढ़ा है।

उपसंहार 

रक्षाबंधन का त्यौहार हर भाई को बहन के प्रति अपने कर्तव्य की याद दिलाता है। रक्षाबंधन का त्यौहार हर किसी को खुशी देता है।इस दिन पर्यावरण प्रेमी पेड़ों को राखी बांध कर उन्हें बचाने तथा और पौधे लगाने का संदेश लोगों को देते हैं। वो लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हैं।

Two Essay On Raksha Bandhan : रक्षाबंधन या राखी पर दो हिन्दी निबन्ध

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