Essay On Women Education:महिला शिक्षा का महत्व

Essay On Women Education  , महिला शिक्षा का महत्व पर हिन्दी में निबन्ध

Essay On Women Education  

महिला शिक्षा का महत्व पर निबन्ध

Essay On Women Education 

प्रस्तावना 

“महिलाएं समाज की वास्तविक वास्तुकार होती हैं।” और यह बात तो सर्वविदित है कि अगर कोई भी घर या ऑफिस सही वास्तु के हिसाब से ना बना हो तो , वह शुभ फल नहीं देता है।यही बात महिलाओं की शिक्षा के लिए भी लागू होती हैं। क्योंकि महिलाएं ही समाज का स्वरूप निर्धारित करती हैं।

अगर महिलाएं खुद अच्छी स्थिति में नहीं होंगी , तो वो भला सभ्य समाज के निर्माण में क्या भूमिका निभाएंगी। यह हम सब समझ सकते हैं।हम सब Women Empowerment की बात तो बहुत करते हैं। लेकिन अगर वाकई में महिलाओं को सशक्त बनाना है तो , शिक्षा ही उस दिशा में पहला कदम होगा। 

महिला शिक्षा का अर्थ (Meaning of Women Education)

महिलाओं को शिक्षित करने का अर्थ है एक सभ्य समाज , देश और एक सभ्य विश्व का निर्माण करना। दुनिया की आधी आबादी को शिक्षित करे बिना , क्या वाकई में एक खुशहाल परिवार , एक सभ्य व विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।और क्या भविष्य में एक शिक्षित पीढ़ी को जन्म दे सकते है। अगर नहीं , तो अब आप समझ ही गए होंगे कि महिलाओं की शिक्षा क्यों आवश्यक है।

महिला शिक्षा का महत्व ( Importance of Women Education)

  • किसी भी परिवार का मुखिया भले ही घर का पुरुष , लेकिन महिला उस घर का एक मजबूत स्तंभ होती है। जिस पर पूरे घर का भविष्य टिका रहता है। और घर को सुचारू और सुनियोजित तरीके से चलाने के लिए दोनों का समझदार व शिक्षित होना आवश्यक है।
  • समझदारी , बुद्धि , विवेक तो शिक्षा से ही आती है। इसीलिए महिलाओं का शिक्षित होना अति आवश्यक है। अगर महिला शिक्षित होती है तो वह अपने घर परिवार के अन्य सदस्यों को , यहां तक कि अपने नवजात संतान को भी शिक्षित करना शुरू कर देती है। 
  •  विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षित महिला अपने धैर्य व बुद्धि विवेक का इस्तेमाल कर परिस्थितियों को अपने अनुकूल बना देती हैं। 
  •  एक महिला की शिक्षा उस वक्त सबसे ज्यादा काम आती है। जब परिवार किसी तरह की आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा हो। ऐसे में महिला घर से बाहर निकल कर कोई नौकरी कर परिवार को आर्थिक मजबूती दे सकती है।या घर पर ही रह कर स्वरोजगार के माध्यम से परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकालने में मदद करती है। 
  •  एक शिक्षित मां अपने बच्चों के स्कूल संबंधी समस्याओं को भी आसानी से सुलझा सकती हैं। तथा स्कूल द्वारा दिए गए उनके होमवर्क को भी पूरा करने में मदद कर सकती हैं। 
  •  आज के इस प्रतिस्पर्धा के दौर पर जब बच्चों को एक सही मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है। तो एक शिक्षित मां ही अपने बच्चों को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे सकती हैं। 
  • पति के जीवन में आने वाली अनेक समस्याओं और उतार-चढ़ावों में शिक्षित पत्नी अपनी समझदारी से उसकी जीवन की राह आसान बनाने में मदद करती हैं। 
  • यही नहीं आज पढ़ी लिखी महिलाएं अपने घर व परिवार को तो व्यवस्थित ढंग से चला ही रही हैं। इसके साथ ही समाज में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। 
  •  समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण बनती जा रही है।उन्होंने अपनी मेहनत व सफलता के दम पर हर क्षेत्र में अपने नाम का झंडा फहराया है। 
  •  उच्च व प्रशिक्षित पढ़ी-लिखी महिलाएं भारत ही नहीं , विश्व के अनेक उच्च व महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। और अपनी योग्यता से अपनी भूमिकाओं को प्रखरता व विश्वसनीयता के साथ निभा रही हैं। 
  • शिक्षा महिलाओं की बुद्धि विवेक ,सोचने समझने की शक्ति को बढ़ाती है।उनके अंदर सकारात्मक विचारों का प्रवाह होता है। 

महिला शिक्षा की आवश्यकता

चाहे पुरुष हो या महिला , शिक्षा की आवश्यकता दोनों को बराबर है।क्योंकि परिवार से लेकर समाज व राष्ट्र तक में दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।अगर उनमें से एक भी अपनी भूमिका को अच्छे से ना निभाए तो , वह राष्ट्र तरक्की नहीं कर सकता। 

महिलाओं को शिक्षित करने का मतलब सिर्फ उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता दिलाना नहीं है।या पढ़ लिखकर पुरुषों से प्रतिद्ंद करना नहीं है , या अपने को उनसे श्रेष्ठ साबित करना नहीं है। बल्कि उनके साथ खड़े होकर कंधे से कंधा मिलाकर चलना। एक स्वस्थ व सभ्य समाज व देश का निर्माण करना है। 

लेकिन यह बात भी सच है कि महिलाओं को शिक्षित कर उन्हें हर तरह की स्वतंत्रता दिलाई जा सकती हैं।चाहे वो मानसिक हो या आर्थिक स्वतंत्रता। शिक्षा ही महिलाओं की सोचने समझने , विपरीत परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ा सकती है।

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 भारत में महिला शिक्षा (Essay On Women Education)

आज भी हमारे देश में महिलाओं की शिक्षा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।आज भी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की शिक्षा का प्रतिशत बहुत कम है।शहरी क्षेत्रों में तो फिर भी ठीक है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह हालात और भी बुरे हैं।

कुछ जगहों में तो लड़कियों को प्राथमिक शिक्षा के बाद माध्यमिक व उच्च शिक्षा के लिए स्कूल भेजने के बजाय उनकी शादी कर मां-बाप अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाते हैं।एक बार शादी हो जाने के बाद लड़कियों पारिवारिक समस्याओं में ही उलझ कर रह जाती हैं। ऐसे में आगे की पढ़ाई लिखाई का ध्यान उनके दिमाग में ही नहीं आता हैं। 

आज भी हमारे समाज में Women Empowerment के लिए कई सारी योजनाएं चलानी पड़ती है। क्योंकि आये दिन महिलाओं के साथ हिंसा , मारपीट , छेड़छाड़ , बलात्कार , दहेज हत्या आदि जैसे अपराध होते हैं।

यह सब सिर्फ अनपढ़ महिलाओं के साथ ही नहीं , बल्कि पढ़ी लिखी , सभ्य समाज में रहने वाली महिलाओं के साथ भी होता हैं।अशिक्षा के कारण आज भी हमारे समाज में बच्चियों को पैदा होने से पहले ही मार दिया जाता है।कई महिलाएं दहेज की बलि चढ़ जाती हैं। 

आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं ज्यादातर घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। क्योंकि उनके पास जीवन की प्राथमिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कोई आजीविका का साधन नहीं होता हैं। और अपनी प्राथमिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्हें मजबूरी वश दूसरों के ऊपर निर्भर रहना पड़ता हैं।

इस वजह से वो ज्यादा हिंसा या शोषण का शिकार होती हैं।अगर ऐसे में कोई महिला शिक्षित हो तो वह घर से बाहर निकल कर या घर में ही स्वरोजगार अपनाकर अपनी आजीविका चला सकती हैं।  और शोषण का शिकार होने से बच सकती है। महिला शिक्षा महिलाओं को ना सिर्फ आर्थिक रूप से सशक्त करती हैं , बल्कि उनके सामाजिक सम्मान में भी वृद्धि करती हैं। 

निश्चित रूप से भारत में पहले की अपेक्षा आज के समय में शिक्षित महिलाओं के प्रतिशत का ग्राफ जरूर बढ़ रहा है।लेकिन अभी भी उतना नहीं है जितना होना चाहिए।आज जरूर मां बाप बेटियों की पढ़ाई के प्रति जागरूक हुए हैं।उन्हें उच्च शिक्षा दिलाने व उनके सपनों को पूरा करने के प्रति प्रतिबद्ध दिखते हैं।आज पढ़े-लिखे माता-पिता अपनी बच्चियों को पढ़ाई की स्वतंत्रता दे रहे हैं। 

पहले की अपेक्षा आज माता-पिता अपनी बच्चियों को पूरा पूरा सहयोग दे रहे हैं। और आज बेटियां जिस क्षेत्र में भी जाना चाहे , माता-पिता उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं। और यह होना भी चाहिए।

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उपसंहार

अगर महिलाओं व बच्चियों को शोषण से बचाना है और उनका संपूर्ण विकास करना है। उनके अंदर बौद्धिक शक्ति को जगाना है , तो उनका शिक्षित होना अति आवश्यक है।पढ़ी-लिखी बेटियां या महिलाएं अपने बुद्धि विवेक का इस्तेमाल कर , अपनी परिस्थितियों से खुद निपट सकती हैं।और आर्थिक रूप से सशक्त हो , अपना जीवन सम्मानपूर्वक व स्वतंत्रतापूर्वक जी सकती हैं।

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