Success Stories in Hindi ,दो प्रेरणादायक कहानियां

Success Stories in Hindi. ये प्रेरणादायक कहानियां उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल हैं। जो जिंदगी में आने वाली छोटी-छोटी मुश्किलों व असफलताओं से हार मान लेते हैं।और अपनी असफलताओं से घबरा कर प्रयास करना छोड़ कर देते हैं।और फिर अपनी किस्मत को कोसने लगते हैं।

जिंदगी में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत ,अथक प्रयास ,बिना रुके लक्ष्य का लगातार पीछा करना अति आवश्यक हैं।क्योंकि सफलता पाने लिए कड़ी मेहनत के अलावा कोई और विकल्प नहीं हैं। इन दोनों कहानियों को पढ़कर आपको महसूस होगा कि , अगर आपके अन्दर कुछ कर गुजरने का जूनून हो तो, बड़ी से बड़ी बाधा भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती है।

Success Stories in Hindi

Story No.1 

IPS Manoj Sharma 

IPS मनोज शर्मा की प्रेरणादायक कहानी

2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस मनोज शर्मा आज हर उस युवा के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। जो विपरीत परिस्थितियों में हार मान लेते हैं।मनोज शर्मा के ही एक मित्र अनुराग पाठक ने उनके ऊपर एक किताब लिखी है। जिसका शीर्षक “12th फेल ,हारा वही जो लड़ा नहीं “।

Manoj Sharma Success Stories in HindiPic Credit-amarujala.com

इस किताब की शुरुआत का हर पन्ना भले ही संघर्षों , आशाओं और निराशाओं से भरा हो। लेकिन किताब का अन्तिम पन्ना शानदार सफलता से लिखा गया हैं। 

इस किताब की कहानी IPS मनोज शर्मा जी के जीवन के संघर्षों पर आधारित हैं।यह एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी है जो आगे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। अपनी महिला मित्र (Girl Friend ) को दिया हुआ ( IPS बनने का) वादा मनोज शर्मा जी ने पूरे दिलो जान से निभाया। और IPS बन कर दिखाया। 

जीवन परिचय 

मनोज शर्मा का जन्म मुरैना मध्य प्रदेश में हुआ था। नवीं ,दसवीं और ग्यारहवीं की परीक्षा में नकल के सहारे उन्होंने तीसरा स्थान प्राप्त किया। लेकिन 12वीं में परीक्षा के दौरान बेहद सख्ती होने के कारण नकल करना नामुमकिन हो गया था। इस वजह से वह 12वीं की कक्षा में फेल हो गए।

हालांकि 12वीं कक्षा में पास होने के लिए उन्होंने नकल की सारी तैयारी कर ली थी। लेकिन उस वक्त के वहां के एसडीएम ने स्कूल में नकल ना होने देने के पुख्ता इंतजाम कर दिये। जिसके कारण उनकी सारी तैयारी धरी की धरी रह गई।और वो 12वीं कक्षा में फेल हो गये।

बस इसी घटना ने उनके जीवन में प्रभाव डाला। वो एसडीएम की पावर देखकर आश्चर्यचकित थे। और उन्होंने उनके जैसे ही पावरफुल इंसान बनने का निर्णय कर डाला।हालांकि उस वक्त तक उनका इरादा 12वीं पास करके , टाइपिंग सीख कर ,कोई एक नौकरी पकड़ लेने तक ही सीमित था।

 संघर्षपूर्ण जीवन ने सफल होने की प्रेरणा दी

चूँकि वो 12वीं कक्षा में फेल हो चुके थे।फेल होने कारण उन्हें अपने गांव वालों के सामने शर्म महसूस होने लगी।और उनके पिता को भी इससे अत्यधिक दुख हुआ। ऐसे वक्त में उनके बचपन के एक दोस्त राकेश शर्मा ने उनका हौसला बढ़ाया। और अगले ही साल मनोज शर्मा ने 70% अंकों से हायर सेकेंडरी की परीक्षा पास कर दी।वो कॉलेज के टापर्स भी रहे। 

इसी बीच उन्होंने अपने भाइयों के साथ टेंपो चलाने का काम शुरू किया। लेकिन टेंपो भी कुछ दिनों बाद पुलिस द्वारा पकड़ा गया। अपने टेंपो को छुड़ाने के लिए मनोज एसडीएम से मदद मांगने गए।

लेकिन जब वो एसडीएम से मिलने गये तो ,उन्होंने टेंपो छुड़ाने की बात ना कह कर। बस उनसे एक ही प्रश्न पूछा कि “उन्होंने एसडीएम बनने की तैयारी कैसे की” ।

इसके कुछ समय बाद मनोज ग्वालियर आ गए।उनके पास पैसों की अत्यधिक कमी थी। खाना-पीना भी मुश्किल से हो पाता था। इसीलिए वो मंदिर में भिखारियों के पास ही सोते थे। 

परीक्षा की तैयारी शुरू (Success Stories in Hindi)

इसी दौरान उन्हें एक लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन कम चपरासी की नौकरी मिल गई।जब कभी विद्वानों या कवियों की सभाएं होती थी। तो वो उनके लिए बिस्तर बिछाना ,पानी पिलाने का काम करते थे।

लाइब्रेरी में वो अपना अधिकतर समय किताबों को पढ़ने में बिताते थे।जहां पर उन्होंने गार्गी ,इब्राहिम लिंकन से लेकर मुक्तबोध जैसे बड़े-बड़े लोगों के बारे में पढा। और उनके द्वारा किए गए कामों को समझा।

उनके मन में एक ही प्रश्न उठता था कि अगर ये लोग कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं। और इस तरह मनोज की एसडीएम बनने की तैयारी शुरू हो गई थी। 

 महिला मित्र से किया वादा निभाया

मनोज शर्मा एक लड़की से अत्यधिक प्यार करते थे। लेकिन वो 12वीं फेल होने के कारण उस लड़की को अपने दिल की बात नहीं बता पाते थे।उनको डर था कि कहीं 12वीं फेल होने की वजह से वह लड़की उनको मना ना कर दे। इसीलिए उन्होंने दोबारा अपनी पढ़ाई शुरू कर दी। 

इसके कुछ समय बाद वो ग्वालियर से दिल्ली आ गए। लेकिन आर्थिक तंगी ,पैसे की कमी ने यहां पर भी उनका साथ नहीं छोड़ा। इसीलिए उन्होंने बड़े घरों के लोगों के कुत्तों को घुमाने की नौकरी शुरू कर दी। उस वक्त उन्हें 400/- रूपये प्रति कुत्ते के मिलते थे।

दिल्ली में मनोज शर्मा की मदद उनके एक टीचर विकास दिव्यकीर्ति ने की।उन्होंने इनका एडमिशन बिना फीस के ही एक कोचिंग संस्थान में किया।

अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने UPSC प्री बड़ी आसानी से निकाल लिया। लेकिन आगे नहीं बढ़ पाये। दूसरे और तीसरे प्रयास में तो प्री भी नहीं निकाल पाये। पर चौथी बार की परीक्षा में सफलता पाई।

अंग्रेजी ने किया परेशान (Success Stories in Hindi)

क्योंकि उनकी प्रारंभिक पढ़ाई गांव में हुई थी।जहां पर अंग्रेजी पर बहुत अधिक ध्यान नहीं दिया जाता था।वो अंग्रेजी में कमजोर थे। इसलिए उन्हें यूपीएससी के मेंस (Mains ) की परीक्षा देने में कई सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

इंटरव्यू के दौरान उनसे यह बात पूछी गई कि “उन्हें अंग्रेजी नहीं आती तो वह शासन कैसे चलाएंगे”। इसी के साथ ही मनोज को इंटरव्यू के दौरान एक ट्रांसलेटर भी दिया गया। 

मनोज शर्मा खुद बताते हैं कि “जब वो मेंस की परीक्षा देने गए। तो उसमें 100 नंबर का Tourism पर निबंध लिखना था। उन्होंने बजाए टूरिज्म के टेरेरिज्म पर निबंध लिख दिया”। 

महिला मित्र ने साथ निभाया

मनोज शर्मा जिस लड़की से प्यार करते थे। उन्होंने उससे कहा था कि “अगर तुम साथ दो तो। मैं दुनिया पलट सकता हूं ” ।और उनकी महिला मित्र ने उनका कदम कदम पर साथ दिया।इसके बाद उन्होंने पूरी तैयारी के साथ परीक्षा दी। और मेंस और इंटरव्यू दोनों को क्लियर कर लिया। इसके बाद वह आईपीएस ऑफिसर बन गए। 

उन्होंने अपने चौथे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा 121वी रैंक के साथ पास की।और आईपीएस ऑफिसर बने। इस वक्त मनोज शर्मा जी ग्वालियर से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद पीएचडी भी पूरी कर चुके हैं।

मनोज शर्मा 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस हैं। वर्तमान समय में वो मुंबई में एडिशनल कमिश्नर ऑफ वेस्ट रीजन के पद पर तैनात हैं। 

यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।जो परीक्षा में मिलने वाली असफलताओं से निराश हो जाते हैं।और दोबारा प्रयास करने का साहस नहीं जुटा पाते। कई बार वो असफलताओं से डर कर गलत कदम भी उठा लेते हैं। 

IPS Safin Hasan की प्रेरणादायक कहानी 

Success Stories in Hindi

Story No .2

IAS सुरभि गौतम की प्रेरणादायक कहानी

IAS Surbhi Gautam 

यह कहानी उन सभी Students के लिए प्रेरणादायक हैं।जो अपने हिंदी भाषी होने में शर्म महसूस करते हैं। या जो अपनी असफलता के लिए हिंदी भाषा को जिम्मेदार ठहराते हैं।सफलता की यह शानदार कहानी एक हिंदी माध्यम से पढी लड़की की है।जिसने अपनी 12वीं तक की परीक्षा हिंदी माध्यम से पूरी की।और अपनी हर परीक्षा में प्रथम प्रयास में ही सफलता हासिल की। 

IAS surabhi gautam Success Stories in HindiPic Credited -Facebook

सुरभि गौतम की जिंदगी में भाषा किसी तरह की रुकावट कभी नहीं बनी।सुरभि ने वह सब कर दिखाया। जो बड़े स्कूलों में अंग्रेजी भाषा से पढ़ने वाले बच्चे भी कभी कभी नहीं कर पाते हैं।

सुरभि गौतम गर्व से कहती हैं कि “उनकी पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई हिंदी मीडियम स्कूल से ही हुई है “। 

यह कहानी अत्यंत प्रतिभा की धनी सुरभि गौतम की है। सुरभि गौतम सतना के अमदरा गांव की रहने वाली हैं।उनके पिता मेहर गौतम सिविल कोर्ट में वकील हैं।और डॉ माता सुशीला गौतम अमदरा हायर सेकेंडरी स्कूल में एक शिक्षिका है।

सुरभि बचपन से ही पढ़ने लिखने में अति मेघावी रही।उन्होंने हाई स्कूल में 93.4% अंक हासिल किए।और इन्ही अंको ने सुरभि के आईएएस ( IAS ) बनने के सपने की नींव रखी। 

स्कूल में मूलभूत सुविधाओं का था अभाव

सुरभि ने 12वीं तक की पढ़ाई अमदरा गांव के एक हिंदी माध्यम के स्कूल से की।उनके इस स्कूल में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव था।न शिक्षक थे ,न ही पढ़ाई लिखाई की कोई अच्छी व्यवस्था। यहां तक कि कभी-कभी किताबें भी समय पर नहीं मिलती थी।

गांव में बिजली पानी का हाल और भी बुरा था।कई बार तो बिजली कई दिनों तक आती ही नहीं थी। और कई बार तो उन्हें लालटेन जलाकर भी रात में पढ़ाई करनी पड़ती थी। लेकिन परिस्थिति कैसी भी हो। वह अपने लक्ष्य के लिए दृढ संकल्पित थी।

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पढाई में हमेशा अव्वल (Success Stories in Hindi)

12वीं के बाद सुरभि ने स्टेट इंजीनियरिंग की परीक्षा काफी अच्छे नंबर से पास की। इसके बाद सुरभि ने भोपाल से “इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की पढाई की।यहां भी उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल करने के साथ-साथ यूनिवर्सिटी भी टॉप कर ली। 

कॉलेज के बाद ही सुरभि ने BARC की परीक्षा दी। परीक्षा पास करने के साथ ही इंटरव्यू भी निकाल लिया। माना जाता हैं कि BARC का इंटरव्यू काफी मुश्किल होता है। इस इंटरव्यू को क्लियर करने के बाद सुरभि का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया था।इसके बाद ट्रेनिंग के दौरान ही सुरभि ने आईएएस की तैयारी शुरू कर दी । करीब एक साल तक सुरभि BARC से न्यूक्लियर साइंटिस्ट के तौर पर जुड़ी रही।

कई परीक्षाओं में अपने प्रथम प्रयास में ही सफलता हासिल की

सुरभि गौतम ने एक के बाद एक कई परीक्षाओं में अपने प्रथम प्रयास में ही सफलता हासिल की। जैसे GATE ,ISRO (ऑल इंडिया दूसरा स्थान मिला) ,SAIL की परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर उन्हें बुलावा भी आया। पर वो नहीं गई। 

इसके अलावा MPPSC PRE , SSC LGL , FCI और दिल्ली पुलिस की परीक्षाएं भी अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण की2013 में सुरभि गौतम को IES की परीक्षा में ऑल इंडिया में फर्स्ट रैंक हासिल हुई।

और इसके बाद 2016 के IAS  की परीक्षा में उन्हें ऑल इंडिया में 50वीं रैंक मिली।उन्होंने हर परीक्षा अपने पहले प्रयास में ही अच्छे नंबरों से पास की। 

दृढ निश्चयी व प्रतिभाशाली सुरभि गौतम

सुरभि गौतम बचपन से ही दृढ निश्चयी व प्रतिभाशाली थी।उन्होंने बचपन से ही अपना एक लक्ष्य बनाया था। और वो निरन्तर अपने लक्ष्य के लिए अपनी पूरी मेहनत से समर्पित रही।उनके इस सफर में उनके माता पिता ने उनका साथ दिया।उनका हर कदम पर मार्गदर्शन किया।  

Self-Study के बल पर पायी सफलता 

सुरभि ने कभी भी किसी तरह की कोई ट्यूशन या कोचिंग नहीं ली।उन्होंने जो भी हासिल किया। सब अपने self-study के बल पर ही हासिल किया। 

वो भी तब जब न तो सही समय पर किताबें मिली , नहीं अच्छा स्कूल मिला।लेकिन उसके बाद भी उन्होंने वह सब कर दिखाया। जो नामी-गिरामी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी कभी-कभी नहीं कर पाते हैं।

सुरभि खुद बताती हैं कि “मेरा स्कूल और वहां का एजुकेशन सिस्टम काफी खराब था। स्कूल में कोई पढ़ाई नहीं होती थी। मेरी पढ़ाई लिखाई की सारी जिम्मेदारी मुझ पर या मेरे पेरेंट्स पर ही थी। मैं हमेशा सोचती थी कि मुझे भी अच्छा स्कूल मिलता। काश मेरे स्कूल में भी एक बस होती।

मैं भी यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल जाती। लेकिन उसके लिए मैं अफसोस नहीं करती। क्योंकि मेरे इन्हीं अभावों ने मुझे महत्वाकांक्षी बना दिया। और मैं हर फील्ड में सबसे अच्छा करने की कोशिश करती रहती थी” 

अनेक प्रतिभाओं की धनी हैं सुरभि गौतम

सुरभि एक प्रतिभावान बेटी है।वो ना सिर्फ पढ़ाई में अच्छी है। बल्कि इसके साथ साथ वह कई अन्य प्रतिभाओं की धनी भी है। वह एक अच्छी पेंटर भी है। वह बहुत अच्छी पेंटिंग बनाती हैं। साथ में कविताएं लिखती हैं।स्केचिंग ,रंगोली, कढ़ाई बुनाई इन सब में भी सुरभि को महारत हासिल है। 

बारहवीं कक्षा के आते-आते सुरभि अपने गांव तथा उसके आसपास के लोगों के लिए एक मिसाल बन चुकी थी। लोगों को भले अपने बच्चों के रिजल्ट का इंतजार नहीं रहता था। लेकिन सुरभि के रिजल्ट का इंतजार रहता था। गांव में उनकी पहचान हर साल कॉलेज टॉप करने वाली बच्ची की थी।  गांव के सभी लोग कहते थे कि एक दिन यह लड़की कुछ कमाल दिखाएगी। 

अंग्रेजी भाषा ने खड़ी की समस्या (Success Stories in Hindi)

गांव और शहर के माहौल में बहुत अंतर होता हैं।जब सुरभि गांव से निकल कर आगे की पढ़ाई के लिए शहर आई।तो उस वक्त सुरभि को शहर में एक बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा।वह थी अंग्रेजी भाषा।

हिंदी माध्यम के स्कूल से पढी होने के कारण सुरभि की अंग्रेजी भाषा में पकड़ बहुत अच्छी नहीं थी। जो शुरुआती दिनों में उनके लिए परेशानी का सबब बनी। लेकिन बहुत जल्दी ही उन्होंने इस परेशानी में भी विजय हासिल कर ली। 

सुरभि के साथ कालेज में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों से पढ़े थे। जबकि सुरभि हिंदी माध्यम से पढ़ी थी।शुरू शुरू में सुरभि को इससे काफी दिक्कत हुई। 

सुरभि कहती हैं कि “मैं गांव में अपनी क्लास में पहली सीट में बैठने वाली लड़की थी।लेकिन शहर में आने के बाद इंग्लिश ना आने की वजह से मैं सबसे पीछे बैठती थी।मुझे बहुत बुरा लगता था।

मैं सोचती थी मैं कहां आ गई। यहां तो मुझे कोई जानता ही नहीं। यह सब कुछ मेरे लिए अजीब था। लेकिन मैंने खूब मेहनत की। बाकी विषयों के साथ-साथ इंग्लिश में भी अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी। और फर्स्ट सेमेस्टर में ही यूनिवर्सिटी टॉप कर ली। और मुझे चांसलर अवार्ड भी मिला।

इंग्लिश सुधारने के लिए मैंने बहुत ज्यादा मेहनत की। किताबों से स्पेलिंग ढूंढ ढूंढ कर सीखती थी। रोज अंग्रेजी के नए 5-10 शब्द लिखकर दीवारों में चिपका देती थी। सुबह उठकर उन्हें देखती थी। सोते समय भी उन्हें देखकर ही सोती थी। और उन शब्दों को उठाकर खुद से बातें करती थी। कोई भी नया अंग्रेजी का शब्द सुनने के बाद मन में बार-बार रिवाइज करती थी। और अपनी इन्हीं कोशिशों से मैंने धीरे-धीरे इंग्लिश सीखी”।

सुरभि के अनुसार “अंग्रेजी सीखने की ललक मुझे कुछ इस तरह सवार हुई कि, कॉलेज के दिनों से लेकर अब तक मेरे सपने हिंदी में आने के बजाय अंग्रेजी में ही आते थे।उनके सपनों में लोग हिंदी में नहीं ,अंग्रेजी में ही बात करते हैं।

कॉलेज के दिनों में सुरभि बाकी बच्चों की तरह नहीं थी।न तो वो फिल्में देखती थी।ना घूमने फिरने में अपना वक्त जाया करती थी। वह मानती थी कि इस सब के लिए तो पूरी उम्र पड़ी है।पहले कुछ बन जाना आवश्यक है।

उन्होंने जो भी हासिल किया। वह अपनी मेहनत के बल पर ही हासिल किया और वह किसी भी मौके को गंवाना नहीं चाहती थी।

रिमेटिक फीवर की समस्या (Success Stories in Hindi)

12वीं क्लास तक सुरभि को रिमेटिक फीवर की समस्या थी। जिस कारण उन्हें इलाज के लिए हर 15 दिन में गांव से 120 किलोमीटर दूर जबलपुर जाना पड़ता था।इस समस्या के दौरान सुरभि को शारीरिक तौर पर तेज दर्द सहन करना पड़ता था। इसी वजह से उनकी हड्डियां काफी कमजोर थी। हर 15 दिन में उन्हें हाई डोज इंजेक्शन दिया जाता था।

इस इंजेक्शन के लगने के बाद सुरभि को तीन-चार दिन तक बुखार रहता था। लेकिन फिर भी इस बहादुर लड़की ने हार नहीं मानी।

आज के बच्चों को सुरभि कहना चाहती हैं। “मैंने कॉलेज की पढ़ाई बहुत अच्छे से और काफी मेहनत से की।मैंने कभी भी कोई कोचिंग नहीं ली।अगर आपको आसानी से कोचिंग मिल रही है तो चले जाइए। वरना चीजों को स्टेक पर रखकर कोचिंग जाने की जरूरत नहीं है। 

ग्रेजुएशन के टाइम पर ही ग्रेजुएशन के सब्जेक्ट बहुत अच्छे से पढ़ें । अगर कॉलेज अच्छा नहीं है तो भी। क्योंकि मेरा कॉलेज भी कोई बहुत अच्छा नहीं था। वह भी एक नॉर्मल इंजीनियरिंग कॉलेज ही था। “

अपनी मेहनत से अपना सपना सच किया  

उन्होंने अपनी सिविल सर्विसेज की पूरी तैयारी self-study से की थी।वह भी बिना किसी की मदद के। सुरभि गौतम ने अपनी  IAS की परीक्षा इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग जैसा बेहद मुश्किल विषय के साथ पास की। सुरभि गौतम अपना 25वां जन्मदिन मसूरी की “लाल बहादुर शास्त्री नेशनल      अकेडमी आफ एडमिनिस्ट्रेशन” में मनाना चाहती थी।उनका सपना साकार हो गया।

सुरभि गौतम कहती हैं कि “सपने देखें , सपने देखने में पैसे नहीं लगते और बड़े सपने देखिए।और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत भी करिए। इतनी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यदि मैं आगे बढ़ सकती हूं। इतने सारे एग्जाम क्लियर कर सकती हूं। तो आप क्यों नहीं  ?सपने सच होते हैं बस आपको उन पर भरोसा होना चाहिए”। 

विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने वाले लोग ही विजयी या सफल होते हैं।  

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