Rubaiyan Class 12 Question Answer : रुबाइयाँ व गजल के

Rubaiyan Class 12 Question Answer ,

Rubaiyan Class 12 Question Answer Hindi Aaroh 2 Chapter 9 , रुबाइयाँ के प्रश्न उत्तर कक्षा 12 हिंदी आरोह 2 पाठ 9 

Rubaiyan Class 12 Question Answer

रुबाइयाँ के प्रश्न उत्तर

Note –

  1. रुबाइयों का भावार्थ पढ़ने के लिए Link में Click करें – Next Page 
  2. गजल का भावार्थ पढ़ने के लिए Link में Click करें – Next Page 
  3. गजल के MCQS पढ़ने के लिए Link में Click करें – Next Page 
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प्रश्न 1.

शायर “राखी के लच्छे” को बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है ?

उत्तर –

रक्षाबंधन का त्यौहार सावन (जुलाई – अगस्त) के महीने में आता है। उस समय हर वक्त आकाश में काले धने बादल छाये रहते हैं। और बीच – बीच में बिजली भी कड़कती (चमकती) रहती है ।जिससे तेज बारिश होती हैं। यानि बिजली के चमकने और काली घटाओं का आपस में गहरा संबंध है।

ठीक उसी प्रकार राखी के लच्छे भाई – बहिन के रिश्ते की पवित्रता को व्यक्त करते हैं। शायर के अनुसार घटा का जो संबंध बिजली से है। ठीक वही संबंध भाई – बहन का राखी के लच्छों से है। इसीलिए शायर “राखी के लच्छों” की तुलना “बिजली की चमक” से करता है। 

प्रश्न 2.

“खुद का परदा खोलने” से क्या आशय है ?

उत्तर-

“खुद का परदा खोलने से” आशय है कि खुद अपने आप , अपनी कमियों के बारे में दूसरों को बताना । शायर के अनुसार जो लोग दुनिया वालों के सामने उनकी बुराई कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश करते हैं । दरअसल वो अपना असली रूप दुनिया वालों को दिखा कर अपना ही नुकसान करते हैं।

क्योंकि यह बात सनातन सत्य हैं कि जो व्यक्ति आज आपके सामने दूसरों की बुराई कर रहा हैं। वो व्यक्ति कल दूसरों से आपकी भी बुराई कर सकता हैं। यह समझना जरूरी हैं।

प्रश्न 3.

“किस्मत हमको रो लेवे है , हम किस्मत को रो ले हैं”। इस पंक्ति में शायर की किस्मत के साथ तनातनी का रिश्ता अभिव्यक्त हुआ है। चर्चा कीजिए ?

उत्तर –

शायर की यह पंक्ति , कठिन कर्म करे बिना सफलता की इच्छा रखने वालों पर एक व्यंग्य हैं। यहां पर शायर अपनी किस्मत को कोसते हैं कि उन्हें जो चाहिए था वो उनकी किस्मत ने उन्हें नहीं दिया और शायर की किस्मत शायर को कोसती हैं कि उसने कभी मेहनत से कर्म नही किया। और इस तरह दोनों एक – दूसरे को कोसकर अपना दर्द बयां करते हैं।

प्रश्न 4.

टिप्पणी करें ?

(क)

गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता।

उत्तर –

हर बच्चा अपनी माँ के लिए चाँद या चाँद के टुकड़े के समान ही होता हैं। जिस तरह अँधेरा होते ही आसमान की गोद में चाँद खिल उठता है। ठीक उसी प्रकार माँ की गोद में आते ही बच्चा भी चहक उठता हैं। इसीलिए कवि ने इन दोनों की आपस में तुलना कर इनके गहरे रिश्ते को दर्शाया है।

(ख)

सावन की घटाएँ व रक्षाबंधन का पर्व।

उत्तर –

सावन के महीने (जुलाई -अगस्त) में आकाश में काले धने बादलों के छाने , बिजली के चमकने व तेज वर्षा के होने की पूरी – पूरी संभावनायें रहती हैं । रक्षाबंधन का त्यौहार भी सावन के महीने में ही आता हैं। यानि आसमान में छायी काली धटाओं के बीच रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाता हैं।

अन्य प्रश्न 

प्रश्न 1.

रुबाइयाँ किसे कहते हैं ?

उत्तर –

रुबाइयां , उर्दू – फारसी भाषा की एक छंद शैली होती है जिसकी पहली , दूसरी और चौथी पंक्ति एक जैसी मात्रा पर खत्म होती है मगर तीसरी पंक्ति स्वतंत्र यानि अलग होती है । जैसे

आंगन में लिए चांद के टुकड़े को खड़ी

हाथों पे झुलाती है उसे गोद – भरी

रह- रह के हवा में जो लोका देती है

गूँज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हंसी

इसमें खड़ी , भरी और हंसी में एक जैसी मात्रा हैं जबकि तीसरी पंक्ति अलग हैं।

प्रश्न 2.

इन रुबाइयों से हिंदी , उर्दू और लोकभाषा के मिले – जुले प्रयोग को छाँटिए ?

उत्तर –

हिंदी के वाक्य –

  1. आँगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी
  2. हाथों में झुलाती है उसे गोद-भरी
  3. गूँज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हँसी
  4. किस प्यार से देखता है बच्चा मुँह को
  5. दीवाली की शाम घर पुते और सजे
  6. रक्षाबंधन की सुबह रस की पुतली
  7. छायी है घटा गगन की हलकी-हलकी
  8. बिजली की तरह चमक रहे हैं लच्छे
  9. भाई के है बाँधती चमकती राखी

उर्दू के वाक्य

  1. उलझे हुए गेसुओं में कंघी करके
  2. देख आईने में चाँद उतर आया है

लोकभाषा के वाक्य-

  1. रह-रह के हवा में जो लोका देती है।
  2. जब घुटनियों में ले के है पिन्हाती कपड़े
  3. आँगन में दुनक रहा है जिदयाया है
  4. बालक तो हई चाँद पै ललचाया है

प्रश्न 3.

फ़िराक की रुबाई के आधार पर माँ – बच्चे के वात्सल्यपूर्ण चित्र को अपने शब्दों में प्रस्तुत कीजिए ?

उत्तर-

फ़िराक की रुबाई के आधार पर एक माँ अपने नन्हे बच्चे को अपनी गोद में बैठा कर प्यार करती है। उसे अपनी बांहों में झूला झुलाती है। कभी – कभी उसे हवा में उछाल कर थाम लेती है। माँ के इस कार्य से बच्चा प्रसन्न हो उठता है और बच्चे की हंसी से पूरा घर – आंगन गूंज उठता है।

माँ जब अपने नन्हे बच्चे को नहला – धुला कर उसके बालों में कंघी कर उसे घुटनों के बीच खड़ा कर कपड़े पहनाती हैं तो बच्चा अपनी माँ के चेहरे को बड़े प्रेम से देखता हैं। शायर ने माँ और बच्चे के बीच के गहरे आत्मीय संबंधो को दर्शाया हैं।

प्रश्न 4.

बच्चे के द्वारा माँ के चेहरे को एकटक निहारने के चित्र को प्रस्तुत कीजिए ?

उत्तर-

माँ अपने बच्चे को साफ – स्वच्छ पानी से नहला कर , उसके उलझे बालों में कंघी कर उन्हें सुलझती है। फिर जब माँ उसे अपने घुटनों के बीच खड़ा कर कपड़े पहनाती है तो नन्हा बच्चा अपनी माँ के चेहरे को टकटकी लगाकर बड़े प्यार से देखने लगता हैं। उस समय उसे अपनी माँ किसी फरिस्ते के समान लगती हैं।

प्रश्न 5.

माँ बच्चे को किस प्रकार तैयार करती है ?

उत्तर –

माँ अपने बच्चे को साफ – स्वच्छ पानी से नहला कर उसके उलझे बालों में कंघी कर उन्हें सुलझती है। और फिर उसे अपने घुटनों के बीच खड़ाकर कपड़े पहनाती है।

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प्रश्न 6.

“बच्चे के घरौंदे में जलाती है दिए” से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर –

जिस तरह दीवाली की शाम माँ अपने सजे – संवरे घर में दीपक जलाकर ईश्वर से अपने सभी परिजनों के लिए सुख – समृद्धि की मंगल कामना करती है। ठीक उसी प्रकार वह अपने छोटे बच्चे के मिट्टी के घर (घरौंदे) में भी दीया जलाकर उसके सुखद भविष्य और खुशहाल जीवन की दुआ मांगती है।

प्रश्न 7.

बच्चे को माँ चाँद किस प्रकार धरती पर लाकर देती है ?

उत्तर –

रात में आसमान में चमकते चाँद को देखकर उसे एक खिलौना समझकर जब बच्चा उसे मांगने लगता है तो माँ उसके हाथ में एक दर्पण थमा देती है जिसमें चाँद का प्रतिबिंब दिखाई देता है। दर्पण में चाँद के प्रतिबिंब को दिखाकर माँ बच्चे से कहती है कि यह लो तुम्हारा चाँद।

प्रश्न 8.

बच्चा किस वस्तु के कारण लालची बन जाता है ?

उत्तर-

बच्चा का मन चमकते चाँद को देखकर लालची हो जाता है और फिर वह उसे पाने की जिद करने लगता है।

प्रश्न 9.

फिराक की रुबाइयों में उभरे घरेलू जीवन के बिंबों का सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ?

या 

“फिराक गोरखपुरी की रुबाइयों में ग्रामीण अंचल के घरेलू रूप की स्वाभाविकता और सात्विकता के अनूठे चित्र चित्रित हुए हैं”। पाठ्यपुस्तक में संग्रहीत रुबाइयों के आधार पर उत्तर दीजिए ?

उत्तर-

फिराक की रुबाइयों में ग्रामीण अंचल के घरेलू रूप का स्वाभाविकता और सात्विकता चित्रण मिलता है। माँ का अपने बच्चे को लेकर आँगन में खड़ा होना , उसे अपनी बांहो में झुलाना , बच्चे को नहलाना व कपड़े पहनना , उसके बालों में कंधी करना , बच्चे का चाँद के लिए जिद करना आदि का सजीव चित्रण है।

दीवाली के दिन घर की पुताई व रंगरोगन आदि करना , शाम को दिए जलाना , रक्षाबंधन के त्यौहार का खुशनुमा माहौल आदि सब ग्रामीण व आम जीवन से जुड़ा हुआ है।

प्रश्न 10.

काव्य सौंदर्य बताइये ?

आंगन में लिए चांद के टुकड़े को खड़ी

हाथों पे झुलाती है उसे गोद – भरी

रह- रह के हवा में जो लोका देती है

गूँज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हंसी।

उत्तर –

काव्य सौंदर्य –

  1. यह रुबाई छंद हैं।
  2. यह दृश्य बिंब प्रधान रुबाई हैं जैसे  आंगन में लिए चांद के टुकड़े को खड़ी , हाथों पे झुलाती है उसे गोद – भरी , रह- रह के हवा में जो लोका देती है।
  3. “खिलखिलाते बच्चे की हंसी” एक श्रव्य बिंब हैं।
  4. “चांद के टुकडे” में रूपक अलंकार है । “चांद का टुकडा” एक मुहावरा भी है।
  5. इस काव्यांश में वात्सल्य रस की प्रधानता है।
  6. “लोका देना” लोक भाषा का एक शब्द है।
  7. “रह- रह” में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।

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