Rocket Man Of India Dr. Kailashvadivoo Sivan

Rocket Man Of India Dr. Kailashvadivoo Sivan , Rocket Man Of India Dr. Kailashvadivoo Sivan , भारत के रॉकेटमैन डॉ.के.सिवन

Rocket Man Of India

( Dr. Kailashvadivoo Sivan)

22 जुलाई 2019 को भारत ने चंद्रयान -2 को चाँद के दक्षिणी ध्रुव की ओर सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया।बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण इस मिशन की सफलता की पूरी जिम्मेदारी थी डॉ.के.सिवन पर ।क्योंकि वो इस वक्त इसरो के मुखिया है।उन्होंने अपनी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।डॉ.के.सिवन भारत के एक जाने-माने वैज्ञानिक है और वो रॉकेट के स्पेशलिस्ट भी माने जाते हैं।

Rocket Man Of India

के.सिवन का प्रारंभिक जीवन

डॉ.के.सिवन का जन्म कन्याकुमारी जिले के सराकल्लविलाई गांव में एक गरीब किसान के घर 14 अप्रैल 1957 को हुआ था।यह जिला दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु का एक तटीय जिला है।उनकी माता का नाम चेल्ल्म तथा पिता का नाम कैलाशवडीवू था।उनके पिता खेतीबड़ी का काम करते थे

इसीलिए वो भी पढ़ाई के साथ-साथ अपने अन्य भाई बहनों की तरह खेतों में पिता का हाथ बटांते थे।लेकिन आर्थिक अभाव व परेशानियों ने उनका कभी पीछा नहीं छोड़ा।

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घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।

उनके पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उनका पूरा बचपन बहुत अभावों में गुजरा।आर्थिक तंगी के कारण पिता खेतों में काम करने के लिए मजदूर नहीं रख सकते थे।इसी वजह से उनका सारा परिवार खेती करने में पिता की मदद करता था।के.सिवन भी कालेज से आकर पिता की खेतों में मदद करते थे।

हालाँकि अपने परिवार में ग्रेजुएट होने वाले वो पहले ही शख्स थे।उनके भाई और दो बहने गरीबी की वजह से अपनी पढ़ाई नहीं पूरी कर पाए।आर्थिक तंगी का आलम यह था कि के.सिवन के पास पैरों में पहनने को जूते और सैंडल तक नहीं होते थे।वो कॉलेज भी धोती पहन कर ही जाया करते थे।उन्होंने पहली बार पैंट मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) जाकर पहनी।

शिक्षा-दीक्षा 

डॉ.के.सिवन की प्रारंभिक शिक्षा एक सरकारी स्कूल में हुई थी।जहां तमिल माध्यम से पढ़ाया जाता था।सिवन पढ़ाई में शुरू से ही बहुत अच्छे थे।इसीलिए पिता के साथ साथ परिवार के अन्य लोगों ने भी उन्हें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

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उन्होंने नागेरकोयल के एसटी हिन्दू कॉलेज से B.Sc पढ़ाई की।वह भी गणित विषय में।उन्होंने B.Sc की परीक्षा में 100% अंक हासिल किये।इस तरह वो स्नातक करने वाले अपने परिवार के पहले सदस्य बन गये।हालांकि डॉ.के.सिवन के माता-पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।लेकिन फिर भी उन्होंने के.सिवन की आगे की पढाई जारी रखी।इसी वजह से उनके अन्य भाई-बहन आगे नहीं पढ़ सके।

उच्च शिक्षा

  1. 1980 में सिवन ने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(एमआइटी) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग(BE) की पढ़ाई की
  2. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंसेज(आइआइएससी) से इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर(ME) की डिग्री हासिल की
  3. 2006 में सिवन ने आईआईटी मुंबई से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी(PhD)की डिग्री प्राप्त की

भारत के रॉकेटमैन डॉ.के.सिवन

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में उनका योगदान

  1. 1982 में के.सिवन भारत अंतरिक्ष अनुसंधान गठन संगठन से जुड़ गए।उसके बाद उन्होंने “पोलर सैटलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV)” परियोजना में अपना कार्य प्रारभ्भ किया
  2. अप्रैल 2011 में वह जीएसएलबी (GSLV) के परियोजना के निदेशक बनाये गये।
  3. जुलाई 2014 में उन्हें इसरो के “लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर” का निदेशक नियुक्त किया
  4. 1 जून 2015 को उन्हें “विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर” का निदेशक बना दिया गया
  5. 15 जनवरी 2018 को सिवन ने इसरो के मुखिया का पदभार संभाला।उन्होंने ए.एस.किरण कुमार की जगह ली।

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क्यों कहा जाता है के.सिवन को रॉकेट मैन (Why he is known as Rocket Man Of India)

  • डॉ.के.सिवन 1982 में इसरो से जुड़े।इसके बाद उन्होंने इसरो द्वारा चलाये जाने वाले हर रॉकेट कार्यक्रमों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कीके.सिवनविक्रम साराभाई स्पेस सेंटर” के निदेशक रहे हैंऔर यही वह  विभाग है जो रॉकेट का निर्माण करता है।इसके अलावा के.सिवन ने साइक्रोजेनिक इंजन, पीएसएलवी, जीएसएलवी और रियूसेबल लॉन्च व्हीकल के निर्माण कार्यक्रमों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया
  • 15 फरवरी 2017 को भारत द्वारा एक साथ 104 उपग्रहों को प्रेषित किया गया था जो अपने आप में इसरो का एक विश्व रिकॉर्ड भी है।इसमें भी के.सिवन की अहम भूमिका रही थी
  • 22 जुलाई 2019 को चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर भेजे गये चंद्रयान -2 मिशन की सफलता की जिम्मेदारी भी इनके कन्धों पर ही थी जिसको इन्होंने बखूबी निभाया।
  • के.सिवन इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया, सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया से भी जुड़े हैं।उनके कई लेख भी प्रकाशित हुए हैं।

इसके अलावा उन्होंने इसरो के द्वारा चलाए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।इसीलिए इनको “इसरो के रॉकेट मैन /Rocket Man Of India ” जैसी सम्मानित उपाधि मिली।

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चंद्रयान -2 में हुई तकनीकी खराबी का चंद घंटों में ही पता लगाया

पहले चंद्रयान-2 को 15 जुलाई 2019 को चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर भेजा जाना था लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से इस प्रोग्राम को ऐन वक्त रोकना पड़ालेकिन डॉ सिवन व उनकी टीम ने बिना समय गवांये न केवल उस तकनीकी खराबी को ढूढ़ निकला बल्कि उसे चंद घंटों में ही ठीक भी कर दिया

और इसके बाद 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान-2 को चाँद मिशन पर सफलतापूर्वक भेज भी दिया गया जो चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर 6-7 सितम्बर 2019 को पहुंच जायेगा

पुरस्कार (Rocket Man Of India Awards)

डॉ.के.सिवन को कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है।

  • वर्ष 1999 में उन्हें “श्री हरि ओम आश्रम प्रेरित डॉक्टर विक्रम साराभाई रिसर्च अवॉर्ड” मिला है।
  • वर्ष 2007 में उन्हें इसरो मेरिट अवॉर्ड (ISRO Merit Award) मिला।
  • वर्ष 2011 में उन्हें “डॉ.बिरेन रॉय स्पेस साइंस अवॉर्ड (Dr. Biren Roy Space Science Award ” पुरस्कार मिला। 
  • अप्रैल 2014 में उन्हें चेन्नई की “सत्यभामा यूनिवर्सिटी” से “डॉक्टर ऑफ साइंस” पुरस्कार मिला।
  • तमिलनाडु सरकार ने भी विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए डॉ.के.सिवन को “एपीजे अब्दुल कलाम 2019 ” पुरस्कार से सम्मानित किया है।

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किसे दिया जाता हैं “एपीजे अब्दुल कलाम” पुरस्कार

एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार से उन लोगों को सम्मानित किया जाता है जो वैज्ञानिक विकास,मानविकी और छात्रों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए काम करते हैं।यह पुरस्कार तमिलनाडु के लोगों को दिया जाता है।पुरस्कार में 8 ग्राम का स्वर्ण पदक और साथ में पाँच लाख रूपये नगद दिए जाते हैं। 

डॉ. के.सिवन के शौक

सिवन को खाली समय में तमिल क्लासिकल संगीत सुनना व बागवानी करना बेहद पसंद है।उन्हें राजेश खन्ना की “आराधना (1969)” फिल्म बेहद पसंद है।

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