Geetika Joshi ,Who Change The Education System

Geetika Joshi , motivational Story for students in hindi

Geetika Joshi ,Who Change The Education System in Uttarakhand ,एक सराहनीय पहल उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों के रूपांतरण की।सफर खंडहर से सुंदर पाठशालाओं तक का। उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में गीतिका जोशी जी की एक मुहिम जो बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाई in hindi

Geetika Joshi

motivational story for students in hindi

यह कहानी नहीं एक सच्चाई है एक महिला ऑफिसर की।जिनके द्वारा लिया गया छोटा सा कदम एक जबरदस्त मुहिम में बदल गया और उत्तराखंड के कई जीर्ण-शीर्ण और खंडहर बने सरकारी स्कूल सुंदर पाठशालाओं में तब्दील हो गए । और छोटे-छोटे नन्हे मुन्ने बच्चों के होठों पर मुस्कान बिखर गई।

Geetika Joshi , A Motivational Story of a Lady Officer

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के ताडीखेत ब्लॉक में गीतिका जोशी जी की मार्च 2015 में उत्तराखंड शिक्षा विभाग के द्वारा डिप्टी एजुकेशन ऑफिसर के रूप में नियुक्ति हुई थी। चूंकि ताडी़खेत ब्लॉक पूरा पहाड़ी इलाका है इसीलिए मार्च के महीने में भी वहां पर अत्यधिक ठंड रहती है।और उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों की हालत तो किसी से छिपी नहीं है।

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उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद ख़राब 

अधिकतर भवन बहुत बुरी हालत में है या खंडहर बन चुके हैं।कहीं किसी भवन की दीवारों पर दरारें पड़ी हैं तो कहीं छतों से पानी टपकता रहता है।और बच्चे पहाड़ों की हाड कंपकंपाती ठंड में ऐसे ही भवनों के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

एक दिन जब गीतिका जोशी जी अपनी ड्यूटी के तहत अपने ऑफिस के पास ही स्थित एक सरकारी स्कूल में निरीक्षण हेतु गई तो निरीक्षण के दौरान वह स्कूल की हालत देखकर बहुत ही हैरान और परेशान हुई ।स्कूल का भवन जर्जर हालत में था। छत से लगातार बारिश का पानी टपक रहा था।दीवारें पूरी तरह सीलन से भरी हुई थी जिनसे लगातार बदबू आ रही थी।

और छोटे छोटे बच्चे इसी भवन के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर थे।क्योंकि अधिकतर बच्चे गरीब घरों से आते थे।जिनके पास ठंड से बचने के लिए पर्याप्त स्वेटर व अन्य गर्म नही कपड़े थे जिस कारण वो इस कड़कड़ाती ठंड में बुरी तरह से कांप रहे थे और इस ठंड को बढ़ावा देने में ठंडे मौसम के साथ साथ स्कूल के भवन का भी बहुत बड़ा योगदान था।

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यह देखकर वह बहुत विचलित हुई और फिर उन्होंने सरकारी स्कूलों के भवनों को सुधारने का निर्णय लिया। हालांकि भवनों की मरम्मत व नए भवनोंं के निर्माण के कार्य के लिए खर्चा सरकार उपलब्ध कराती हैं। लेकिन यह एक लंबी विभागीय प्रक्रिया थी।जिसमें काफी वक्त लगता हैं।

खुद की कमाई से स्कूल के कायाकल्प का फैसला

(Geetika Joshi,motivational story for students in hindi)

और उन्हें महसूस हुआ कि यह काम अगले सर्दी तक भी नहीं हो पायेगा‌।तब उन्होंने तत्काल एक निर्णय लिया और खुद के पैसों से स्कूल का कायाकल्प करने का फैसला किया और उसके बाद उन्होंने अपने बलबूते पर उस स्कूल के उस‌ भवन को ठीक किया और उस स्कूल को एक सुंदर पाठशाला में बदल दिया ।

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धीरे-धीरे उन्हें एहसास होने लगा कि इस पहाड़ी राज्य में न जाने और कितने ह़ी ऐसे सरकारी स्कूल हैं। जहां पर भवनों की हालत इससे भी बुरी है और उन स्कूलों में बच्चे विपरीत हालातों में पढ़ाई कर रहे होंगे।लेकिन उन्होंने महसूस किया कि उनका काम करने का भी एक निश्चित दायरा है और वह सारे स्कूलों की हालत सिर्फ अकेले अपने दम पर ही नहीं बदल सकती हैं।

कठिनाईयों के बाबजूद मुहिम जारी रखी (motivational story for students in hindi)

अपने फैसले पर अडिग रहते हुए उन्होंने एक मुहिम चलाई। और धीरे-धीरे वो अन्य स्कूलों के अध्यापकों को यह बात समझाने में कामयाब रही कि स्कूल की देखरेख की जिम्मेदारी सरकार के साथ साथ उनकी भी बराबर की है ।और इन्हीं स्कूलों से उनकी आमदनी भी हो रही है।और उनकी बातों का अनेक शिक्षक गणों पर सकारात्मक असर पड़ा और शिक्षकों ने अपनी क्षमता के अनुसार अपने-अपने स्कूलों में काम करवाना शुरू कर दिया।

साथ ही साथ उन्होंने गरीब परिवारों से आने वाले बच्चों के लिए नए स्वेटर व‌ अन्य गर्म कपड़ों का इंतजाम भी किया ।ताकि उनको ठंड से बचाया जा सके। वो इस बात को भली-भांति जानती थी कि पाठशाला को ही सुंदर बनाने से ही काम नहीं चलेगा। बच्चों को ठंड से बचाना भी आवश्यक है।

रूपांतरण की शुरुवात ( motivational story for students in hindi)

कुछ समय बाद उस इलाके के एक उच्च प्रशासनिक अधिकारी हिमांशी खुराना ने उनके उस स्कूल का दौरा किया जिसको उन्होंने अपने पैसे से सजाया संवारा था।और हिमांशी खुराना जी उनके काम से बेहद प्रभावित हुए।और उन्होंने  गीतिका जोशी जी को जनप्रतिनिधियों व दूसरे व्यापारियों से इस जन कल्याण कार्य हेतु मदद लेने की सलाह दी।

उन्हीं के दिशानिर्देश से गीतिका जोशी जी ने “रूपांतरण” नाम की एक योजना शुरू की ।जिसका मकसद था सरकारी सरकारी स्कूलों केेे भवनों की हालत को सुधारना।इसके लिए उन्होंने बैंक में एक खाता खुलवाया। जहां पर कोई भी मददगार जो भी सरकारी स्कूल की किसी भी तरह से मदद करना चाहता है वह धनराशि जमा कर सकता है ।

लोगों ने भी बढ़ाया मदद का हाथ (motivational story for students in hindi)

उम्मीद के मुताबिक ही कई लोगों ने इस खाते पर पैसे जमा करवाएं। रानीखेत के विधायक जी ने भी इसमें अपना बहुमूल्य योगदान दिया और लोगों के मदद से जमा होने वाली राशि से ही उन्होंने अन्य स्कूलों का काम भी जारी रखा। पूर्व जिलाधिकारी आशीष श्रीवास्तव जी और वर्तमान जिलाधिकारी नितिन भदौरिया जी ने भी उनके इस कार्य में हर संभव मदद प्रदान की।

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लोगों की मदद व उच्च अधिकारियों से प्राप्त सहयोग का नतीजा यह हुआ कि कई सरकारी स्कूल आज बेहतर हालत में हैं। तथा कई स्कूलों में स्मार्ट क्लासेस की सुविधा बच्चों के लिए मुहैया कराई गयी हैं। स्मार्ट क्लासेस के लिए स्कूलों को सारे जरूरी उपकरण भी उपलब्ध कराए।इसमें लोगों ने भी खुशी-खुशी उनकी मदद की और अब भी कर रहे हैं।अल्मोड़ा जिले के लगभग 57 स्कूल ऐसे हैं जहां पर उन्होंने कार्य किया है।

गीतिका जोशी जी का ऐसा मानना है कि “शिक्षा ही एक‌ ऐसा क्षेत्र है जिसके लिए दान की सर्वाधिक जरूरत है। ताकि आने वाले बच्चों का भविष्य बेहतर बनाया जा सके”।

एक सकारात्मक सोच ने बदल दी बच्चों की जिंदगी 

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गीतिका जी की एक सकारात्मक सोच और उनके द्वारा लिए गये एक ठोस निर्णय ने कई सरकारी स्कूलों के भवनों को एक सुंदर सा रूप तो दिया ही। साथ ही साथ बच्चों की आवश्यकता के हिसाब से उनको सामान भी प्रदान किये और स्कूलों को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित कराया ।ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चे अपनी स्कूली पढ़ाई के अलावा टेक्नोलॉजी से भी वाकिफ हो सकें और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों से किसी तरह भी कम ना हो।

ऐसे ही लोग हमारे समाज, हमारे युवाओं के प्रेरणा स्रोत व मार्गदर्शक हैं। यही लोग हमारे समाज को बदलने का माद्दा रखते हैं क्योंकि ये चलते तो अकेले अपने दम पर हैं लेकिन धीरे-धीरे इनके पीछे कारवां बनता चला जाता है। ऐसे लोग हजारों में एक होते हैं।वैसे तो विभागों में हर रोज कई ऑफिसरों की नियुक्ति होती है और कई ऑफिसर ऐसे ही अपना कार्यकाल पूरा कर चले जाते हैं। लेकिन गीतिका जोशी जी के जैसे साहस भरे कदमों को उठाने की हिम्मत बहुत कम‌ लोग ह़ी रखते हैं।

मैंने अपने पाठकों के साथ यह कहानी इसलिए शेयर की ताकि इसको पढ़ने वाले पाठक ऐसे लोगों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में आगे बढ़े और भविष्य में अपने अलावा औरों के लिए भी कुछ कर गुजरने का माद्दा रखें।

गीतिका जोशी जी आप सच में लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। मैं दिल की गहराइयों से आपका सम्मान करती हूं ।और आप को सलाम करती हूं।

Geetika Joshi , motivational story for students in hindi

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