Examples Of Paragraph Writing:परीक्षा से पहले मेरी

Examples Of Paragraph Writing 

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Examples Of Paragraph Writing

अनुच्छेद लेखन के उदाहरण 

CBSE Sample Question Paper 2020-21 paragraph Writing

Example 1 .

परीक्षा से पहले मेरी मनोदशा

संकेत बिंदु

  1. परीक्षा नाम से भय
  2. पर्याप्त तैयारी
  3. प्रश्नपत्र देखकर भय दूर हुआ

छात्र जीवन , जीवन का सबसे सुनहरा दौर होता है। जब बच्चे मौज-मस्ती के साथ-साथ खूब मेहनत कर अपने जीवन को एक दिशा देने के लिए प्रयासरत रहते है। लेकिन इस जीवन में “परीक्षा” नाम के एक शब्द से सभी छात्रों को बहुत अधिक डर लगता है। हो भी क्यों ना , क्योंकि इन्हीं परीक्षाओं के मूल्यांकन के आधार पर हमारे भविष्य की रूपरेखा तय होती हैं। इसीलिए जैसे-जैसे मेरी परीक्षायें नजदीक आ रही थी । मेरे अंदर डर बढ़ता जा रहा था।

हालाँकि अब मैं अपना अधिक समय पढ़ाई में ही बिता रहा था। हर विषय के हर अध्याय को बार-बार दोहरा कर याद करने की कोशिश कर रहा था। फिर भी मुझे यह डर लग रहा था कि कहीं परीक्षा की घबराहट में , मैं कुछ भूल न जाऊं। परीक्षा का तनाव कम करने के लिए मैं शाम को थोड़ी देर के लिए पास के ही एक पार्क में घूमने चला जाता था । परीक्षा शुरू होने के लगभग एक सप्ताह पहले ही मैंने अपने हर विषय की पर्याप्त तैयारी कर ली थी। लेकिन फिर भी मन में परीक्षा को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं थी।

आखिरकार परीक्षा का दिन आ पहुंचा। मैं सुबह जल्दी उठकर अपनी सारी तैयारी के साथ परीक्षा भवन में पहुंच गया। प्रश्नपत्र मिलने से पहले भी मन में डर समाया हुआ था लेकिन मैंने अपने आप को तनावमुक्त रखने का भरसक प्रयास किया। आखिरकार हमारे क्लास टीचर ने हमें प्रश्नपत्र दिया। प्रश्न पत्र लेने के बाद मैंने हर प्रश्न को ध्यान से पढ़ना शुरू किया और 10 मिनट तक पढ़ता चला गया ।

पूरे प्रश्नपत्र को पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मैं इस प्रश्नपत्र को आसानी से हल कर सकता हूं क्योंकि मुझे सभी प्रश्नों के जवाब याद थे। अब मेरी सारी घबराहट दूर हो चुकी थी। और मैं आराम से एक-एक कर सभी प्रश्नों के उत्तर लिखने में व्यस्त हो गया।

Example 2.

Examples Of Paragraph Writing 

कोरोना वायरस 

संकेत बिंदु

  1. कोरोनावायरस का संक्रमण
  2. बचाव के उपाय
  3. लॉकडाउन के सकारात्मक प्रभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस यानि COVID-19 को एक महामारी घोषित किया हैं। इस महामारी की शुरुवात दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई । लेकिन धीरे-धीरे यह महामारी दुनिया के प्रत्येक देश में फैल गई।

आकर में इन्सान के बाल से भी लगभग 900 गुना छोटा यह वायरस बेहद जानलेवा हैं। और इसका संक्रमण एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत तेजी से होता है जिस कारण यह कुछ ही समय में पूरी दुनिया के लोगों में फैल गया। इस बीमारी के संक्रमण से हजारों लोग अब तक अपनी जान गँवा बैठे हैं और लाखों लोग अभी भी संक्रमित हैं। 

इसके संक्रमण के शुरुवात में जुकाम , खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या होती है।यह वायरस इंसान के फेफड़ों में सीधा असर करता है। इस बीमारी से बचने के लिए अभी दुनिया में किसी के पास कोई टीका , दवा या वैक्सीन नहीं है। इसीलिए इस बीमारी में सावधानी व सामाजिक दूरी ही सबसे बड़ा व एकमात्र बचाव है। इसीलिए आप संक्रमित लोगों के आसपास ना जाए , भीड़भाड़ वाले इलाकों , समारोहों या सामाजिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखें। 

कोरोनावायरस से बचाव के लिए 25 March 2020 से पूरे देश में लॉकडाउन किया गया। जिसके कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिले। सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव तो यह रहा कि लोग अपने घरों में रहने के कारण व सामाजिक दूरी बनाने के कारण इस बीमारी की चपेट में आने से बचे रहें।

दूसरा सभी वाहनों , कल कारखानों , उद्योग धंधों , ऑफिस व स्कूलों के बंद होने से प्रदूषण के स्तर में भी काफी कमी आई। प्रकृति को भी अपने आप को एक बार शुद्ध , साफ व स्वस्थ होने का मौका मिला। लोगों ने अपने घर परिवार व अपने परिजनों के साथ खूब समय बिताया और सबसे अच्छी बात यह रही कि ओजोन परत के स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिला। 

Example 3.

जंक फूड

संकेत बिंदु

  1. जंक फूड क्या होता है ?
  2. युवा पीढ़ी और जंक फूड
  3. जंक फूड खाने के दुष्परिणाम 

जंक फूड एक ऐसा भोजन हैं जो देखने में बहुत ही आकर्षक और खाने में बहुत स्वादिष्ट होता हैं जंकफूड को सेहत के लिए नहीं बल्कि स्वाद के लिए खाया जाता हैं। जंक फूड में पोषक तत्वों की भारी कमी होती है लेकिन इनमें फैट , कैलोरीज , शुगर , नमक और बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बहुत अधिक होती हैं । इनमें कई तरह के हानिकारक रसायन मिलाये जाते हैं।

जंक फूड भले ही स्वास्थ के लिए बहुत हानिकारक होता हैं। मगर ये लगभग सभी आयु वर्ग के लोगों द्वारा बड़े चाव खाया जाता है। खास कर युवा पीढ़ी तो जंक फूड की दीवानी हैं। और कुछ लोगों ने तो इसे खाना अपना स्टेटस सिंबल बना लिया हैं।

टीवी व अखबार में आने वाले विज्ञापनों , होटल व रेस्टोरेंट या अन्य जगहों पर इस जंक फूड को इस शानदार अंदाज में पेश किया जाता है कि युवा पीढ़ी इसको खाने का मोह नहीं छोड़ पाती हैं। हर जगह जंक फूड खाते हुए लोग नजर आ ही जाते है। यह जानते हुए भी कि जंक फूड हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। तब भी लोग उसे बड़े शौक से खाते हैं।

नियमित जंक फूड खाने वाले लोग बहुत सी बीमारियों को खुद ही आमंत्रण देते हैं। और अधिक जंक फूड खाने के दुष्परिणाम डायबिटिज़ , हड्डियों की समस्याएं , मोटापा , ब्लड प्रेशर बढ़ने के खतरे के रूप में सामने आते हैं। लीवर की समस्या , कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से दिल संबंधी बीमारियां व कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। साथ ही पाचन संबंधी परेशानियां भी जन्म लेती हैं।

इसीलिए दीर्धायु व स्वस्थ रहना हैं तो जंक फूड से दूरी बनानी होगी और घर में बने साफ-सुथरे भोजन से दोस्ती करनी होगी। 

Example 4 .

सिनेमा व युवा पीढ़ी 

संकेत बिंदु

  1. भूमिका
  2. युवा पीढ़ी पर सकारात्मक प्रभाव
  3. युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव 
  4. उपसंहार 

सिनेमा विज्ञान की उन अद्भुत देनों में से एक है जिसने न सिर्फ आदमी का मनोरंजन किया बल्कि उसकी सामाजिक चेतना व उसके अंदर राष्ट्रप्रेम की भावना को भी जागृत किया। सिनेमा के प्रभाव से न सिर्फ शहर बल्कि गांव भी अछूते नहीं है। सिनेमा मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय , सस्ता व सरल साधन है जिसे अमीर और गरीब , हर वर्ग के लोग देखना पसंद करते हैं। 

खासकर युवा वर्ग सिनेमा से अत्यधिक प्रभावित होता हैं। देशप्रेम पर बनी फिल्में युवाओं के दिलों में अपने देश के लिए मर मिटने का जज्बा पैदा करती है। सामाजिक समस्याओं पर बनी फिल्में जैसे दहेज , भ्रष्टाचार व देशद्रोह युवाओं को जागृत भी करती है।

अच्छी फिल्मों ने सदा युवाओं का मार्गदर्शन भी किया है।लेकिन कभी-कभी फिल्मों के अश्लील गीतों  , उत्तेजक नृत्य व हिंसक दृश्यों का युवाओं पर बुरा असर पड़ता है।कुछ युवा फिल्मों से हत्या , चोरी , ठगी आदि तरकीबें भी सीख जाते हैं। सिनेमा के कारण युवा तरह-तरह के खर्चीले व उटपटांग फैशन भी सीख जाते हैं।सिनेमा मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक बदलाव का भी एक सशक्त माध्यम है। 

Example 5 .

राष्ट्रीय एकता

संकेत बिंदु

  1. भूमिका
  2. राष्ट्रीय एकता के अभाव के दुष्परिणाम
  3. महत्व एवं आवश्यकता
  4. उपसंहार

जाति , धर्म , सम्प्रदाय के ऊपर उठ कर , किसी राष्ट्र के लोगों का एक दूसरे के लिए प्रेम , भाई-चारा , सौहार्द की भावना व दिलों में अपने देश के लिए मर मिटने का जज्बा , उस देश की राष्ट्रीय एकता को प्रदर्शित करता है। और जिस देश के लोगों के बीच में जितनी एकता होगी , वह राष्ट्र उतना ही मजबूत व अखंड होगा। कोई भी बाहरी ताकत या दुश्मन देश कभी भी उस राष्ट्र की तरफ आंख उठाकर नहीं देख सकता है।

और भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए तो राष्ट्रीय एकता बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पर अनेक धर्म , जाति , संप्रदाय के लोग एक साथ में निवास करते हैं। और अगर उनके बीच में एकता की भावना नहीं होगी तो , इस देश को टूटने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। लेकिन हमारे देश के लोग राष्ट्रीय एकता के महत्व को अच्छे से समझते हैं। इसीलिए हमेशा उसे मजबूत करने का प्रयास करते हैं।  देश के नागरिकों के सामूहिक प्रयास से हमारा देश हर दिन आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा रहा है। 

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Example 6 .

हमारे राष्ट्रीय पर्व

संकेत बिंदु

  1. राष्ट्रीय पर्व का अभिप्राय 
  2. हमारे राष्ट्रीय पर्व 
  3. मनाने के कारण तथा ढंग
  4. महत्व और संदेश

राष्ट्रीय पर्व , वो पर्व होते हैं जिन्हें पूरा राष्ट्र एक साथ , एक दिन , एक उद्देश्य के लिए और एक जैसे तरीके से मनाता हैं। और हमारे देश में भी तीन राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस , गणतंत्र दिवस और गांधी जयंती बड़े धूमधाम से मनाये जाते हैं। इन तीनों राष्ट्रीय पर्वों को सारा देश एक साथ बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाता है। 

इन तीनों राष्ट्रीय पर्वों को मनाने के पीछे महत्वपूर्ण कारण भी हैं। 15 अगस्त 1947 के दिन भारत ने करीबन 150 साल बाद आजादी का सूरज देखा था। तभी से प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को “स्वतंत्रता दिवस” के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देश अपनों अमर शहीदों को बड़े ही सम्मान व श्रद्धा के साथ याद व नमन करता है।

26 जनवरी 1950 को भारत को एक “सम्पूर्ण गणराज्य” घोषित कर पूरे देश में भारतीय संविधान लागू किया गया था। इसीलिए हर साल 26 जनवरी को “गणतंत्र दिवस” बनाया जाता है। और 2 अक्टूबर को हमारे देश के राष्ट्रपिता “महात्मा गाँधी जी” का जन्म दिवस पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है।गांधीजी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर अडिग रह कर इस देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया था ।

ये तीनों राष्ट्रीय पर्व पूरे देश को एकता के सूत्र में बाँधते हैं और सम्पूर्ण देशवासियों के दिलों में देशभक्ति की भावना का संचार करते हैं। अपने देश की आन-बान-शान के लिए मर मिटने का संदेश भी देते हैं। 

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Example 7.

बढ़ती बेरोजगारी : एक ज्वलंत समस्या 

संकेत बिंदु

  1. भूमिका 
  2. समस्या का स्वरूप और प्रकार 
  3. कारण व दुष्परिणाम 

बेरोजगारी किसी भी राष्ट्र के सम्पूर्ण विकास में सबसे बड़ी बाधा है। आज भारत ही नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व में बेरोजगारी एक प्रमुख व गंभीर मुद्दा है । भारत में शिक्षित बेरोजगार और अशिक्षित बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन इन बेरोजगारों में पढ़े लिखे शिक्षित युवाओं की संख्या ज्यादा है। जो एक अदद नौकरी व रोजी रोटी की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।

जनसंख्या वृद्धि , तकनीकी शिक्षा का अभाव , रोजगार के अवसरों की कमी , लधु एवं कुटीर उद्योग-धंधों का समाप्त होना , औद्योगिक क्षेत्र की धीमी रफ्तार आदि ऐसे अनेक कारक हैं जो बेरोज़गारी का कारण बनते हैं।

बेरोज़गारी से तंग आकर व्यक्ति गलत राह पर चल पड़ता हैं और जिसके परिणाम चोरी , लूटपाट , दंगा-फसाद , नशा या अन्य अपराधों के रूप में सामने आते हैं। दिनोंदिन बढ़ती बेरोजगारी शांति , स्थिरता और देश के विकास में भी हर रोज नई चुनौतियों खड़ी कर रही हैं। एक व्यक्ति की बेरोजगारी सिर्फ उसे ही नहीं बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करती है । बेरोजगारी समाज के लिए एक अभिशाप है।

Example 8.

मधुर वचन है औषधि , कटु वचन है तीर।

संकेत बिंदु

  1. भूमिका तथा उक्ति का तात्पर्य 
  2. मधुर वचनों का महत्व
  3. कटु वचनों का हानियों 
  4. उपसंहार 
संसार के सभी प्रणियों में सिर्फ इन्सान ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसे बोलने की शक्ति मिली हुई हैं। इसीलिए वह इस धरती के सारे प्रणियों में सर्वश्रेष्ठ हैं। लेकिन यही वाणी मनुष्य के लिए कभी वरदान तो कभी अभिशाप बन जाती हैं । इसीलिए कबीर दास जी कहते हैं कि
“मधुर वचन है औषधि, कटु वचन है तीर।
श्रवण द्वार हौ संचरे, साले सकल सरीर।।”

अर्थात मधुर वचन उस औषधि (दवा) के सामान हैं जो भयंकर से भयंकर रोग का निवारण पल भर में कर देती हैं। और कडवे वचन उस तीर की भांति जो सीधे जाकर ह्रदय को आघात करते हैं। यह मधुर वचनों का ही प्रभाव हैं कि व्यक्ति अपने सारे काम आसानी से करवा सकता हैं।

समाज में भी लोगों का प्रिय बन सम्मान प्राप्त कर सकता हैं और नौकरी या कार्यस्थल में भी आसानी से तरक्की पा सकता हैं। यहाँ तक कि अपने दुश्मनों को भी अपने वश में कर सकता हैं। यानि सिर्फ मधुर वचन बोलकर ही व्यक्ति अपनी जिंदगी आसान बना सकता हैं।

लेकिन कड़वे वचन बोल कर व्यक्ति खुद के बने-बनाये काम भी बिगाड़ लेता हैं। बैठे-बिठाये लोगों को अपना दुश्मन बना लेता हैं और कभी-कभी अपने कडुवे बचनों से समाज की नजरों में धृणित भी बन जाता हैं। इसीलिए व्यक्ति को सदैव मधुर वचन बोलने चाहिए।

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Example 9.

मेरी पहली रेल यात्रा 

संकेत बिन्दु

  1. यात्रा से पहले उत्सुकता 
  2. यात्रा की तैयारी
  3. प्लेटफार्म पर रेल का आना 

भारत में यात्रा करने के लिए सबसे सुलभ और सस्ता साधन रेल ही है। यहां के अधिकतर लोग यात्रा के लिए ट्रेन का ही प्रयोग करते हैं।  मेरी पहली रेल यात्रा मेरे लिए यादगार रही । मैं उस समय लगभग 15 साल का था जब मैंने अपने माता पिता के साथ दिल्ली से बड़ोदरा तक की रेल यात्रा की।

गर्मियों की छुट्टियों में मेरे माता पिता ने “स्टैचू ऑफ यूनिटी” देखने जाने का प्रोग्राम बनाया। मैं इस यात्रा के लिए बहुत उत्सुक था क्योंकि एक तो पहली बार रेल से यात्रा कर रहा था और दूसरा “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” जैसे ऐतिहासिक स्थल को देखने का मौका मिल रहा था।

यात्रा से कुछ दिन पहले ही अपने माता पिता के साथ मैंने भी यात्रा की पूरी तैयारी कर ली थी। मैंने अपने बैग में अन्य जरूरी सामानों के साथ साथ कैमरा भी रख लिया था ताकि मैं अपनी यात्रा को यादगार बना सकूं। यात्रा का दिन नजदीक आया और हम सुबह सवेरे रेलवे स्टेशन की तरफ चल पड़े।

ट्रेन आने में हालांकि अभी आधा घंटा बाकी था लेकिन मुझसे अब सब्र नहीं हो रहा था। मैं सोच रहा था कि कब ट्रेन आए और कब मैं ट्रेन में जाकर बैठू। स्टेशन में काफी भीड़-भाड़ थी। लोगों का आना जाना लगा था। कुली सामान इधर से उधर ले जा रहे थे। तभी अचानक ट्रेन स्टेशन में आ गई और मैं अपने माता-पिता के साथ निर्धारित डब्बे में जाकर बैठ गया।

Example 10.

महानगरों में बढ़ता प्रदूषण

संकेत बिन्दु

  1. भूमिका
  2. प्रदूषण , एक गंभीर समस्या
  3. प्रदूषण का कारण
  4. समाधान

आज पूरी दुनिया के लिए प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है। संसार में शायद ही कोई ऐसी जगह हो जो प्रदूषित ना हो। मगर गांवों की अपेक्षा शहरों में प्रदूषण दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। जो ना सिर्फ मानव के लिए बल्कि पर्यावरण व प्रकृति के लिए भी हानिकारक है।

प्रदूषण की वजह से आज इंसान एक से एक भयंकर रोगों जैसे दिल की बीमारी , हाई ब्लड प्रेशर , सांस संबंधी परेशानियां , यहां तक कि कैंसर जैसी असाध्य बीमारी की चपेट में है। हर साल कई लोग सिर्फ इस प्रदूषण की वजह से ही अपनी जान गंवा रहे हैं।

महानगरों में दिन-प्रतिदिन बढ़ने वाला यह प्रदूषण मानव जनित है। मानव ने अपने स्वार्थ के लिए शहरीकरण की आड़ में , अंधाधुंध विकास के नाम पर प्रकृति व पर्यावरण को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाया है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की गई मगर उनकी जगह नए पेड़ों का रोपण नहीं किया गया। वाहनों व कल- कारखानों से निकलने वाला जहरीला धुआं व रासायनिक , घरों से निकलने वाले जैविक और अजैविक पदार्थ और प्लास्टिक के सामानों का इस प्रदूषण को बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान है।

अगर हमें अपने आप को और अपनी आने वाली पीढ़ी को इस प्रदूषण से बचाना है तो हमें खुद भी जागरूक होना पड़ेगा और दूसरों को भी जागरूक करना पड़ेगा। पेड़-पौधों का फिर से रोपण करना पड़ेगा। कल-कारखानों व वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएं तथा रासायनिकों का सुरक्षित निस्तारीकरण करना आवश्यक है।

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Example 11.

आदर्श विद्यार्थी

संकेत बिन्दु

  1. विद्यार्थी का अर्थ
  2. आदर्श आदर्श विद्यार्थी के लक्षण / दिनचर्या
  3. आदर्श विद्यार्थी के गुण

विद्यार्थी जीवन , जीवन का सबसे सुनहरा दौर होता है। जब व्यक्ति अपने भविष्य नींव को रखता व मजबूत करता है। एक आदर्श विद्यार्थी वह है जो अपने विद्यार्थी जीवन में अपनी पूरी लगन , मेहनत और ईमानदारी के साथ सिर्फ विद्या अध्ययन ही करता हैं।

माता पिता की आज्ञा का पालन करना , उनके बताए मार्ग पर चलना , स्कूल में गुरुजनों का आदर सम्मान करना , उनकी बातों को ध्यान से सुनना और उनका अनुसरण करना , अनुशासन पूर्वक जीवन जीना , गलत बच्चों की संगत से अपने आप को दूर रखना और सदैव नई-नई चीजों के बारे में जानने की कोशिश करना , यही आदर्श विद्यार्थी के लक्षण हैं।

एक आदर्श विद्यार्थी अपने बातचीत , व्यवहार से अलग ही पहचाना जाता है। वह सदैव अपना काम समय पर करता है। इधर-उधर की बातों में अपना समय न गंवा कर सिर्फ अपनी पढ़ाई पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करता है।

विद्यार्थी जीवन में किताबें ही उसकी सबसे अच्छी मित्र होती हैं। आदर्श विद्यार्थी ना सिर्फ अपना बल्कि अपने माता-पिता , स्कूल व गुरुजनों का नाम भी रोशन करता है।  और स्कूल के दूसरे बच्चों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनकर उभरता है।

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