Unemployment : उत्तराखंड में बेरोजगारी की समस्या

Unemployment

Unemployment in Uttarakhand , उत्तराखंड के बेरोजगार युवा ,उत्तराखंड में बेरोजगारी की समस्या in hindi

Unemployment in Uttarakhand

प्रकृति ने अपार प्राकृतिक सौंदर्य से नवाजा है उत्तराखंड को ।ऊंचे ऊंचे पहाड़ ,नदियां, तालाब, झीलें ,सदाबहार हिम से ढकी हिमालय की शानदार चोटियों, अनगिनत जड़ी बूटियां, विभिन्न प्रकार की फसलें, फल-फूल साथ ही साथ भगवान शिव का निवास स्थान ( कैलाश (हिमालय), बागेश्वर ,जागेश्वर ,केदारनाथ), मां सती के अनेकों धाम ( पूर्णागिरि और नैना देवी)।

और उत्तराखंड का विस्मित कर देने वाला भू भाग आधा पहाड़ और आधा मैदान।फिर भी उत्तराखंड के युवा बेरोजगार ?? और उत्तराखंड में बेरोजगारी ( Unemployment) ???

उत्तराखंड के पहाड़ों से पलायन 

बेरोजगार युवा अपने गांव, अपनी भूमि छोड़ने को मजबूर !!! उत्तराखंड के यही पहाड़ क्या युवाओं की बेरोजगारी और पलायन का कारण बन गए हैं ? क्योंकि बेरोजगारी भी युवाओं के पलायन का एक अहम कारण बन गया है।पढ़े-लिखे नौजवान अपना गांव, अपना शहर छोड़कर रोजगार की तलाश में राज्य के दूसरे शहरों में चले जाते हैं।या फिर राज्य के बाहर निकल पड़ते हैं।

डेढ़ करोड़ की आबादी वाले उत्तराखंड में लगभग 10 लाख युवा बेरोजगार घूम रहे हैं।आज से लगभग 18 साल पहले जब राज्य की स्थापना हुई थी।तब इन बेरोजगारों की संख्या 2:50 लाख से 3 लाख के बीच में थी।

और हर साल लगभग एक लाख युवा बेरोजगारों की लिस्ट में शामिल होते जा रहे हैं।इसमें पुरुषों की संख्या ज्यादा लगभग 6 लाख और महिलाओं की संख्या लगभग चार लाख के आसपास है। लेकिन देहरादून में यह स्थिति अलग है। वहां पर महिला बेरोजगारों की संख्या ज्यादा है।ये आंकड़े वाकई में डराते हैं।

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ऐसा नहीं है कि इस राज्य में रोजगार की कोई संभावना ही नहीं है। इस राज्य में भी रोजगार की अपार संभावनाएं हैं।मगर कभी भी किसी सरकार ने ईमानदार कोशिश ही नहीं की। चाहे सरकार किसी भी पार्टी की हो।बस एक दूसरे में आरोप-प्रत्यारोप लगाने के अलावा कुछ नहीं करते। और सिर्फ सफेद कागजों में लिखी अपनी उपलब्धियों को गिनाने में ही रह जाते हैं।मगर कोई भी सरकार बेरोजगारों के इन आंकड़े को नहीं देखती है।

चुनाव के वक्त कुछ नेता बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का लॉलीपॉप जरूर थमा कर चले जाते हैं।योजनाओं की घोषणा करते हैं।कुछ विभागों का भी गठन करते हैं जैसे युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की योजना हो या पलायन रोकने के लिए बनाया गया नया विभाग कौशल विकास एवं सेवा योजना विभाग का गठन हो।ऐसा लगता है नेताओं और आने जाने वाली सरकारों के लिए यह एक बढ़िया चुनावी मुद्दा है।

Unemployment के इस वृक्ष को नेता जानबूझ कर खाद पानी देकर जीवित रखते हैं। क्योंकि इस मुद्दे को उछाल कर अपने घोषणा पत्र को शानदार बनाया जा सकता है। और चुनावी वादे को ऐसे प्रस्तुत किया जा सकता है कि जिससे उनकी चुनावी नैया आसानी से पार हो जाय है।शायद इसीलिए कोई भी इस तरह ईमानदार कोशिश करता नहीं दिखता है। और सबसे बड़ी बात वो इस मुद्दे को हमेशा जीवित रखना चाहते हैं।

वरना दुनिया में कोई ऐसी समस्या नहीं जिसका समाधान संभव नहीं है। चाहे किसी व्यक्ति विशेष की समस्या हो या किसी राज्य या देश की ? आप देखिए किसी भी नेता के बच्चे बेरोजगार हैं।अगर वह बेरोजगार नहीं है तो फिर आम युवा बेरोजगार क्यों हैं ?

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हिमांचल राज्य है उदाहरण 

आप दूर क्यों जाते हैं।हिमांचल राज्य को ही देख लीजिए जहां पर सरकार और आम लोगों की एक ईमानदार कोशिश ने सैकड़ों लोगों का पलायन तो रोका ही , साथ में पलायन कर गए लोगों के घर वापसी का रास्ता भी सुनिश्चित किया।उनको स्वरोजगार से जोड़ा। सिर्फ एक ईमानदार कोशिश व अनोखी सोच ने पारंपरिक खेती के बजाय फलों की खेती व पर्यटन को बढ़ावा दिया । क्या उत्तरांचल में यह संभव नहीं है ? क्योंकि हिमाचल और उत्तरांचल में बहुत समानता है ऐसे और भी अनेक राज्य हैं जहां पर्यटन का क्षेत्र बहुत बड़ा रोजगार का क्षेत्र बना है।

हालांकि सरकार सभी लोगों को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती।लेकिन जो सरकारी पद रिक्त हैं उनको भरा तो जा ही सकता है। इस वक्त राज्य में लगभग 40,000 से ज्यादा पद रिक्त हैं । लेकिन उनको भरने की कोई व्यवस्था नहीं है। और न ही भरने में सरकार की कोई दिलचस्पी दिखती है। सिर्फ 2,000 लोग ही प्रतिवर्ष नौकरी पाते हैं ।

सरकार हर साल नौकरी देने की बात तो करती है। लेकिन धरातल में ऐसी उसकी कोई मंशा नहीं लगती।वरना सरकार यह ऐलान क्यों करती कि 3 साल से ज्यादा लंबे समय से जो पद खाली हैं।उन्हें समाप्त कर दिया जाए और लगभग 25,000 पद खत्म कर दिए।

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शिक्षा, रोजगार और पलायन उत्तराखंड की मुख्य समस्यायें 

उत्तराखंड एक ऐसा राज्य बन गया है जहां तीन समस्याएं भयंकर रूप ले रही है शिक्षा, रोजगार और पलायन । खासकर पहाड़ी भूभाग में। क्योंकि यह तीनों समस्याएं आपस में जुड़े हुए हैं ।इसलिए तीनों ही समस्याओं का समाधान करना अति आवश्यक है। पहाड़ में बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए सरकारी स्कूलों की हालत बहुत खराब है।इसलिए मां-बाप बच्चों को लेकर शहर पलायन कर जाते हैं ।

दूसरी समस्या रोजगार की। अगर अच्छी शिक्षा नहीं होगी तो रोजगार भी नहीं मिलेगा। इसलिए हाईस्कूल इंटरमीडिएट पढ़े बच्चे छोटे-मोटे रोजगार की तलाश में या तो राज्य के दूसरे शहरों में निकल जाते हैं या फिर राज्य से के बाहर।यह उन युवाओं का गांव से पलायन नहीं होता बल्कि वह अपने जीवन की खुशियों व सुकून से पलायन कर जाते हैं।

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पहाड़ का हर बच्चा सेना में भर्ती होना चाहता है क्योंकि उसके पास सबसे पहले यही चॉइस होती है।अपने जीवन को आर्थिक रुप से मजबूत बनाने के लिए। वो इस के लिए बहुत मेहनत और कोशिश करते हैं। कुछ भाग्यशाली युवा सेना में नौकरी पा जाते हैं और जिंदगी को आसान बना लेते हैं।लेकिन सभी इतने भाग्यशाली नहीं होते।

पहाड़ का जीवन क्या वाकई इतना कठिन है ? हाँ बिना बुनियादी सुविधाओं के तो वाकई में कठिन है।लेकिन कभी हमने यह सोचा कि यही पहाड़ हमको रोजगार भी दे सकते हैं। हमारे पूर्वजों ने इन्हीं पहाड़ों में अपनी जिंदगी को खुशगवार तरीके से जिया ।जबकि उस वक्त तो आज के बराबर साधन भी नहीं थे ।लेकिन वो इन पहाड़ों में उगने वाली हर एक चीज का इस्तेमाल करना जानते थे।

रोजगार के संभावित क्षेत्र ( How to Stop Unemployment)

उत्तराखंड के पहाड़ों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी ( Unemployment ) है।और पलायन का मुख्य कारण भी यही है।लेकिन अगर देखा जाए तो रोजगार भी यही से उपलब्ध हो सकता है।क्योंकि उत्तराखंड का आधा भू भाग जो पहाड़ है उसमें एक से एक खूबसूरत व शानदार जगह हैं।कहीं पर पवित्र धाम है ,तो कहीं पर खूबसूरत वादियां ,तो कहीं से अद्भुत हिमालय दर्शन होता है ,और कोई शहर झीलों का शहर (जिला नैनीताल) है तो कहीं आप पैराग्लाइडिंग का मजा ले सकते हैं, पर्वतारोहण के साथ-साथ स्नो स्कीइंग (ओली) का मजा भी आराम से लिया जा सकता है।

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तो अब आप ही बताइए यहां पर पर्यटन की कितनी संभावनाएं हैं ।जरूरत है बस एक शानदार योजना बनाकर और इस क्षेत्र में पढ़े लिखे योग्य युवाओं को इस योजना से जोड़कर उस को धरातल में लाने की।

एक से एक अनोखी और अद्भुत जड़ी बूटियां भी इसी उत्तराखंड की पहाड़ियों में मिलती है जैसे कीड़ाजड़ी, शिलाजीत( जो कई बीमारियों को ठीक करने के काम आता है ),शेकवा, गंदराय, ब्रह्म कमल का फूल, भोजपत्र की छाल ,ऐसी ही न जाने कितनी जड़ी बूटियां हैं जो इन पहाड़ों में पग-पग पर मिलती है।

बस उनकी पहचान कर जो युवा इस क्षेत्र में प्रशिक्षित हैं। या नए युवाओं को प्रशिक्षित कर उनको प्रोत्साहित कर इस क्षेत्र में काम किया जा सकता है।कुछ फार्मासिटिकल कंपनियों और स्थानीय लोगों के बीच तालमेल बनाकर इन जड़ी बूटियों का दोहन किया जाए तो राजस्व तो बढ़ेगा ही बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।

How to Stop Unemployment

ऐसे ही पहाड़ो में उगने वाले वाले कुछ फसलों ,फल और फूल है। जो चमत्कारिक ढंग से शक्तिवर्धक, शरीर को स्वस्थ रखने और शक्ति प्रदान करने में और कई बीमारियों के इलाज में काम आते हैं। अगर उन फसलों और फलों को उगाने की वैज्ञानिक विधि अपनाई जाए ।अच्छे बीजों का प्रबंध किया जाए और युवाओं को सीधे-सीधे उन से जोड़ा जाए ।

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फसल पकने पर उचित बाजार व मूल्य उपलब्ध कराया जाए तो रोजगार की समस्या कुछ तो हल हो ही जाएगी ।क्योंकि पहाड़ों में उगने वाले फल आधे से ज्यादा तो नष्ट हो जाते हैं। क्योंकि एक बार फल पकने के बाद अत्यधिक समय तक सुरक्षित नहीं रह सकते और उनको सुरक्षित रखने के लिए पहाड़ के लोगों के पास कोई सुविधा नहीं है।

धारचूला और मुनस्यारी के लोगों के पास एक अद्भुत हुनर है।जो वहां के विशिष्ट पहचान भी है।दन, कालीन, कंबल या ऊनी वस्त्रों को बनाने का उन लोगों को विशेष हुनर उनके पूर्वजों से मिला है।अगर उनके हुनर को तराशकर सरकार योजनाएं बनाकर उनको बाजार उपलब्ध कराएं और उनकी मेहनत का पूरा मूल्य दिलाएं तो वो अपना घर क्यों छोड़गे ?

How to Stop Unemployment

इसी तरह उसी क्षेत्र के लोग कुछ समय पहले तक भेड़ ,बकरी पालन काफी अत्यधिक मात्रा में करते थे।इनसे प्राप्त होने वाले उन से ऊनी वस्त्र बनाए जाते थे ।जो दिखने में अति सुंदर और पहनने में बहुत ही सुविधाजनक व गर्म होते थे।लेकिन बाजार उपलब्ध ना होने के कारण युवाओं का इस के प्रति आकर्षण बहुत कम हो गया है ।अगर इसे उद्योग के रूप में बनाया जाए और स्थानीय युवाओं को प्रोत्साहित कर इस क्षेत्र  में प्रशिक्षित किया जाए तो इससे ऊन ,दूध व मांस को एक उद्योग के रूप में विकसित किया जा सकता है जो कमाई का बहुत अच्छा साधन बन सकता है।

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ऐसे ही हमारी कुछ सांस्कृतिक एवं पारंपरिक धरोहर हैं ।जो हमें विरासत में मिली है।कुछ ऐसे ही धार्मिक आयोजन ,सांस्कृतिक कार्यक्रम जो समय-समय पर लगभग पूरे उत्तराखंड में आयोजित किए जाते हैं। कुछ अनोखे प्रकृति से व अपनी धरती से जुड़े हुए त्यौहार भी उत्तराखंड में मनाए जाते हैं।अगर इनको सही ढंग से संवारा व संरक्षित किया जाए। फिर उनका सही प्रचार और प्रसार किया जाए तो पर्यटक निश्चित रूप से उनका आनंद लेने उत्तराखंड जरूर आएंगे।

और जो लोग पहाड़ों से पलायन कर गए हैं। उनके खाली पड़े मकानों को तथा खेतों को सरकार मकान मालिक की अनुमति लेकर अपने कब्जे में लेकर उसको कृषि योग्य भूमि बनाकर किसी नए तरह की खेती का प्रयोग भी कर सकती है ।और इन मकानों को जरूरत के अनुसार मरम्मत करा कर फिर से चमकाया जा सकता है।और पर्यटकों को सस्ती दर में उपलब्ध कराया जा सकता है।जिससे खेत व मकान के मालिक को कुछ आय प्राप्त होगी और सरकार को भी  राजस्व की प्राप्ति होगी व आमदनी के स्रोत बढ़ेंगे।

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How to Stop Unemployment

छोलिया नृत्य शायद हमारे पहाड़ का एक अद्भुत और मंत्रमुग्ध कर देने वाला पारंपरिक नृत्य है लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने इसे भूलाना शुरू कर दिया है इस नृत्य को भी एक मंच की आज सख्त जरूरत है।

अब समय आ गया है जब नेताओं को ,सरकारों को और युवा वर्ग को मिलकर एक सफल प्रयास करना ही होगा ।वरना वह दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड के पहाड़ों में सिर्फ जंगल ,जानवर और बंजर पड़े मकान ही नजर आएंगे ।इंसान ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे।

वह कहते हैं ना कि “जब जागो तभी सवेरा” देर तो बहुत हो गई लेकिन अंधेर नहीं हुई है अब तक !!! ।

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