Daughter’s day बेटियों के लिए क्यों है खास।

World Daughter’s Day , Why do we celebrate Daughter’s day ? When is Daughter’s day celebrated ,क्यों और कब मनाया जाता है बेटी दिवस ? Daughter’s day का महत्व  in hindi

Daughter’s day 

मां की परछाई होती है बेटियां, तो पिता‌ की परी। दादी के आंगन की मासूम कली होती हैं बेटियां, तो दादाजी के होठों की मुस्कान।भाई की कलाई में रेशम की डोर से दुआओं को बांधती है बहन ,छोटी बहन की‌ दोस्त होती हैं बड़ी बहन।घर में खुशियों की सौगात होती है बेटी, सच में लक्ष्मी का रुप होती है बेटी।

Daughter's day बेटियों के लिए क्यों है खास।

Daughter’s day मनाने का उद्देश्य ( Why is Daughter’s day celebrated)

Daughter’s day मनाने का मुख्य उद्देश्य अपनी बेटियों को यह महसूस कराना है कि वो हमारे लिए कितनी अनमोल व खास है।उनके बिना परिवार संस्था का अस्तित्व नहीं है।और घर आंगन सूना है। Daughter’s day के दिन कन्या भूण हत्या को रोकने का संदेश भी दिया जाता है। 

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Daughter’s day कब मनाया जाता है

( When is Daughter’s day celebrated)

Daughter’s day या बेटी दिवस हर साल सितंबर माह के चौथे रविवार को मनाया जाता है। हालांकि हमारे देश भारत में अभी Daughter’s day मनाने का इतना प्रचलन नहीं है लेकिन धीरे-धीरे इस आधुनिक टेक्नोलॉजी व सोशल मीडिया की बदौलत इस देश में भी यह जल्द ही प्रचलन में आ जाएगा और फिर इसे पूरे जोश खरोश के साथ मनाया जाएगा।

लेकिन मै उम्मीद करती हूँ कि लोग सिर्फ Daughter’s day को मनाकर भूल ना जाये या औपचारिकता पूरी न करें।बल्कि वाकई में बेटी को दिल से अपनाए व उसका सम्मान करें।

बेटी एक रूप अनेक 

बेटी दो घरों में खुशियां बिखेरती है। जन्म लेती है तो लक्ष्मी रुप में मां बाप का घर आंगन महक उठता है उसकी खुशबू से और शादी होकर ससुराल पहुंचती है तो पति के घर की गृह लक्ष्मी बन कर उसका भाग्य सवांरती है।साथ ही दो अनजान परिवारों को अपने प्यार व विश्वास की डोर से एक मजबूत रिश्ते में बांधती हैं।

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महिलाओं के अंदर प्यार करने की, विश्वास करने की ,नये रिश्ते अपनाने की, मातृत्व की, क्षमा , त्याग करने की क्षमता सहज रुप से हमेशा रहती है या यूं कहें कि उनको यह ईश्वरी वरदान होता है।इसीलिए बेटियां एक ओर जहां मां बाप के साथ हमेशा भावनात्मक रूप से जुड़ी रहती हैं ।वही दूसरी ओर नए परिवार को भी पूरी तरह से अपना लेती है।

बेटियों के जन्म में कई परिवारों में आज भी नहीं मनाई जाती है खुशियां

इतनी खूबियों के बावजूद भी बेटियों के जन्म में कई परिवार आज भी खुशियां नहीं मनाते। क्यों ? कन्या के जन्म के वक्त मां बाप और परिवार वाले उतने खुश नहीं होते जितने बेटे के जन्म के वक्त। बेटे के जन्म के जैसी खुशी बेटी के जन्म में क्यों नहीं होती ? जबकि बेटियों के बगैर नई पीढ़ी इस दुनिया में आ ही नहीं सकती या यूं कहें कि परिवार या इस संसार की कल्पना ही संभव नहीं है ?

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कन्या भूण हत्या आज भी बरकरार 

भारत जैसे देश में जहां पुत्र के जन्म में अपार खुशियां मनाई जाती हैं।पुत्र को वंश का वारिस या कुल को आगे बढ़ाने वाला समझा जाता है।और बेटी को गर्भ में ही मार दिया जाता है।यही नहीं एक बेटे की चाह में कई बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता हैं। बेटियों को गर्भ में मार देने का काम सिर्फ अशिक्षित या गरीब तबका ही नहीं करता बल्कि हमारे समाज में पढ़ा लिखा व सम्य कहलाने वाला वर्ग भी इसमें शामिल रहता है।

जबकि पढ़ा-लिखा वर्ग यह बात अच्छी तरह से जानता कि बेटा या बेटी का जन्म मनुष्य के हाथ में नहीं है।लेकिन हमारे समाज में फैले कुछ अंधविश्वास और बेटे की चाह उनको ऐसा करने पर मजबूर करती है।

आज के इस आधुनिक युग यानि 21वी शताब्दी में जहां एक ओर हम Daughter’s day बड़े शान से मनाते है।वहीं दूसरी ओर आज भी बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है सिर्फ एक बेटे की चाह में।और कुछ डाक्टर इस काम को अंजाम देते हैं थोड़े से पैसे के लालच में।

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बेटियां भी कर रही है परिवार का नाम रोशन

बेटियां सब जगह कमाल कर अपना और अपने परिवार का नाम रोशन कर रही है।आजकल बेटियां हर क्षेत्र में अपने नाम का परचम लहरा रही है।चाहे वह पढ़ाई लिखाई का क्षेत्र हो या खेल-जगत, मनोरंजन जगत या अनुसंधान का क्षेत्र , देश का कोई भी उच्च प्रशासनिक पद हो या विदेश में जाकर काम करना या फिर अंतरिक्ष में ही क्यों ना जाना पड़े।

लेकिन फिर भी हमारी सोच हमारी बेटियों के लिए बहुत ज्यादा नहीं बदली है।बेटियों को हमेशा पराया धन ही समझा जाता है इसलिए चाहे बेटी कितनी भी तरक्की क्यों न कर ले।मां बाप उसकी शादी करके ही अपना कर्तव्य पूरा समझते हैं।

लड़कों के मुकाबले दिन-प्रतिदिन कम होती लड़कियां की संख्या 

आज लड़कों के मुकाबले लड़कियां दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही हैं। 2001 की जनगणना के हिसाब से प्रति 1000 लड़कों में लगभग 933 लड़कियों ही है।और कहीं कहीं हरियाणा जैसे राज्यों में तो यह आंकड़ा बहुत ही चौंकाने वाला है।

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अब आप इसी बात से अनुमान लगा सकते हैं कि बेटियों को बचाने के लिए सरकार को बकायदा “बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ ” जैसा अभियान चलाना पड़ रहा है।इस अभियान के अलावा भी सरकार ने बेटियों के जन्म व शिक्षा से संबंधित और भी अनेक अभियान चलाए हुए हैं ताकि कन्या के जन्म के वक्त परिवार थोड़ा खुश हो सके।

मां-बाप का हौसला तोड़ती है अप्रिय धटनाएँ 

कई मां-बाप चाहते तो हैं कि उनके घर आंगन में एक नन्ही सी परी आये लेकिन असामाजिक तत्वोंं द्वारा नन्ही-नन्ही बेटियों के साथ आए दिन होने वाले छेड़छाड़ , अत्याचार , बलात्कार जैसी घटनाओं ने उनके मनोबल को तोड़ दिया है।रही सही कसर ससुराल पहुंच कर दहेज नामक दानव पूरी कर देता है।

दहेज रूपी दानव हर रोज ना जाने कितनी ही बेटियों को निगल जाता है। दहेज के नाम पर या तो बेटी घर से निकाल दी जाती है या उसकी हत्या कर दी जाती है या फिर उसके साथ मारपीट की जाती है।

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ऐसी घटनाएं आप हर रोज अखबार या टी.बी. के माध्यम से सुन सकते हैं जो रोंगटे खड़े कर देते है। दहेज रूपी दानव ने हर वर्ग में अपनी जड़ें फैला रखी है चाहे वह गरीब तबका हो या समाज में सभ्य व शिक्षित माना जाने वाला वर्ग। दहेज हर वर्ग की समस्या है। कहीं मां बाप तो लड़की के जन्म के समय से ही उसके लिए दहेज इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं।

Daughter's day पर पापा की परी

बेटे और बेटी में तुलना क्यों ? 

आपने अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं है ।जब भी कोई लड़की अपने मेहनत और अदम्य साहस के बलबूते पर कुछ भी कर दिखाती है तो लोगों के मुंह से अनायास ही निकल पड़ता है कि हमारी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है। ऐसा क्यों कहा जाता है ?

इसका मतलब यह है कि हम पहले से ही यह मानते हैं कि लड़की लड़कों से कम होती है। इसीलिए जब वह कुछ कर दिखाती है तो लोगों को लगता है कि यह कार्य तो सिर्फ बेटे ही कर सकते हैं।अब यह कार्य बेटी ने कर दिखाया है तो इसका मतलब यह भी हमारे बेटे के बराबर हो गई है।

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क्या आपने कभी भी किसी को यह कहते सुना है कि हमारा बेटा किसी बेटी से कम नहीं? ऐसा क्यों होता है कि बेटे को हमेशा ऊंचा यानी प्रथम स्थान और बेटी को हमेशा दूसरा स्थान दिया जाता है ।कई लोग कहते हैं कि बेटा बेटी एक समान लेकिन क्या वह वाकई में समानता रखते हैं ।

बेटियों के प्रति सोच बदलने की जरूरत है

Daughter’s day मनाने से ही सबकुछ हासिल नहीं होगा जब तक कि हम अपनी सोच न बदलें।आज हमें वाकई में अपनी सोच बदलने की जरूरत है बेटियों के बारे में।जब तक हमारा समाज दोहरी मानसिकता रखेगा,बेटियों या महिलाओं को सिर्फ भोग की वस्तु समझेगा तथा उसके साथ अत्याचार करने वालों को कठोर सजा का प्रावधान नहीं होगा तो यह समाज उन्नति नहीं कर सकता।

बदलते वक्त के साथ बदले हालात 

हालांकि बदलते वक्त के साथ-साथ लोगों ने बेटियों की पढ़ाई तथा उनके आत्म निर्भर रहने के महत्व को समझना शुरू कर दिया है ।इसीलिए लोगों ने अब अपनी बेटियों को भी उच्च शिक्षा देना शुरू कर दिया है।पढ़े-लिखे परिवारों में खासकर जहां पर महिलाएं पढ़ी-लिखी हैं वो अपनी बेटियों के लिए जागरूक हो गई हैं क्योंकि वह शिक्षा के महत्व को समझती हैं।

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इसलिए वह अपनी बेटियों को हर तरह से मदद कर जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है ताकि उसकी बेटी जीवन में आत्म निर्भर बने व सम्मान से सिर उठा कर जिये। इसी की बदौलत आज कई महिलाये सफलता के सर्वोच्च मुकाम में खड़ी हैं और लोगों को आगे बढने की प्रेरणा दे रही हैं।

बेटियों है अनमोल व खास 

अपने देश में तो हर दिन Daughter’s day मनाने की ज़रूरत है।उसे अपने प्यार और विश्वास से सीचने की जरूरत है।क्योंकि बेटियां खुशियों से घर भर देती है ।मां बन कर जन्म देती है नई पीढ़ी को, बहन बनकर राखी का बंधन भाई की कलाई में बांधती है, बेटी बनकर हंसना सिखाती है ,पत्नी बनकर आपके बेटे का जीवन संवार देती है बेटियां। वाकई में ‌साक्षात लक्ष्मी का रुप होती है घर की बेटी।इसीलिए इस Daughter’s day पर हम अपनी बेटियों को महसूस कराएं कि वह हमारे लिए कितनी अनमोल व खास है।

Daughter’s day पर उनके मनपसंद का उपहार लाकर उनको दें। उन्हें वह करने की आजादी दें ,आगे बढ़ने की प्रेरणा दें।जिसको वह पूरे मन से करना चाहती हैं। उसको इस बात का भरोसा दें कि हम हमेशा उसके साथ हैं चाहे परिस्थिति कैसी भी रहे।फिर देखिए आपकी बेटी जग जीत लेगी।

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बेटियों के बिना सूना संसार 

अपने बेटों को भी बचपन से ही बेटियों या महिलाओं की इज्जत करना व उन को सम्मान देना सिखाएं।वरना एक दिन वह आएगा जब भाई के हाथ में राखी बाधने को बहन नहीं होगी, सास के पास बहू नहीं होगी, बेटे के लिए पत्नी ढूंढे नहीं मिलेगी और नवरात्रि के कन्या पूजन में देवी मां के व्रत पूर्ण करने के लिए कन्यायें पूजन के लिए नहीं मिलेंगी।

अब इस सच को स्वीकार करना ह़ी होगा कि अगर किसी भी मां बाप के घर में बेटी जन्म नहीं लेगी तो आपके बेटे के लिए पत्नी और आपके लिए बहू कहां से आएगी और बिना बहू के नई पीढ़ी कैसे जन्म लेगी।बिना बेटियों के तो परिवार या संसार की कल्पना भी संभव नहीं है।

इसीलिए आइये इस Daughter’s day पर संकल्प लें

बेटियों को पैदा होने दो , आगे बढ़ने दो,‌‌ बुलंदियों को छूने के लिए हौसला दो, उनके सपनों को पंख देकर दूर नीले गगन में उड़ने की आजादी दो। उसको भी इन्सान समझो और जीने का हक़ दो।क्योकि वही तो आपका परिवार पूर्ण करती हैं घर में खुशियां बिखेरती हैं।

Happy Daughter’s day………

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