New Year Celebration :New Year 1st जनवरी को ही क्यों मनाया जाता हैं ?

New Year 1st जनवरी को ही क्यों मनाया जाता हैं ? New Year क्यों मनाया जाता हैं ? Why do we Celebrate New Year. New Year Celebration , New Year Celebration in India , New Year Gifts , gifts for New Year in Hindi.

New Year 1st जनवरी को ही क्यों मनाया जाता हैं

New Year Celebration 

फिर मन में एक नई उम्मीद सी जागी है, फिर दिल में नए सपने पलने से लगे हैं।

फिर मन के पंछी ने नये हौसले से उड़ान भरी है, क्योंकि फिर एक नया साल बस आने को है। 

हर आने वाला नया साल ,हर किसी के मन में ढेर सारी उम्मीदें जगाता है।लोगों को नए उत्साह ,नए उमंग से भर देता है।नया साल कुछ लोगों को नये संकल्प ,नए इरादे ,बस कुछ कर गुजरने का जुनून देता है।तो कुछ लोगों को अपनी असफलताओं को सफलता में बदलने ,रुके हुए कदमों को आगे बढ़ने के 365 दिन ,365 मौके देता है।

365 दिन ,365 मौके, 365 खाली सफेद पन्ने ,बस उठिये और अपनी मेहनत व जूनून की कलम से लिख डालिये अपनी सफलता की एक अनोखी कहानी। 

असली Santa Claus कौन थे जानिए

नए साल के मौके पर लोग अपने परिजनों ,रिश्तेदारों, परिचितों ,दोस्तों या अपने दिल के करीबी लोगों को शुभकामनाएं देते हैं।31 दिसंबर की आधी रात को जब घड़ी की दोनों सुइयां 12.00 में पहुँचती है।तो बस शुरू हो जाता है लोगों का एक दूसरे को शुभकामनाएं देने का सिलसिला।

कुछ लोग अपनी भावनाओं का इजहार ग्रीटिंग कार्ड भेजकर करते हैं।तो कुछ लोग तोहफे देकर। और इस जमाने में यह काम स्मार्टफोन ने और भी आसान कर दिया है।बस चंद सेकेंडों में ही आपके मन की भावनायें शायरी ,Messages, Quotes, Poem, Songs या सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों के द्वारा आपके अपनों तक पहुंच जाती हैं। 

नया साल 1 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है ?

(Why do we celebrate New year on 1st January )

ऐसा माना जाता है कि आज से लगभग 4,000 साल पहले भी बेबीलोन में 21 मार्च को नया साल बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता था।यह समय बसंत ऋतु के आने की सूचना भी देता था। 

 कहाँ है असली Santa Claus का गाँव जानिए

लेकिन एक जनवरी को मनाया जाने वाला नया साल ग्रिगोरियन कैलेंडर पर आधारित हैं। दरअसल सातवीं सदी से पहले रोमन कैलेंडर में लूनर साइकिल यानी चाँद के हिसाब से दिन या तारीखें तय होती थी।लेकिन इसकी गणना बहुत सटीक नहीं होती थी।

और इस रोमन कैलेंडर में नववर्ष एक मार्च (1 march ) से शुरू होता था। और इसमें कई बार छेड़छाड़ भी की जाती थी। इसके बाद रोम के प्रसिद्ध सम्राट जूलियस सीजर ने 46 वर्ष ईसा पूर्व में इस कैलेंडर में परिवर्तन किया था।

रोम का शासक बनने के बाद जूलियस सीजर ने रोमन कैलेंडर में बदलाव किया।कैलेंडर में बदलाव करने के लिए उसने अलेक्जेंड्रियन एस्ट्रोनॉमर सोसियेनिस से मदद ली। और अपने नाम से नया जूलियन कैलेंडर बनाया।जो लूनर के बजाय सोलर ईयर पर आधारित था।इस पद्धति को मिस्र के लोग पहले से ही अपनाते थे। 

26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है?जानिए 

इस जूलियन कैलेंडर में तीन मुख्य बदलाव किए गए।पहला फरवरी के महीने में हर चार साल पर एक अतिरिक्त दिन जोड़ा गया। जिसके कारण हर चौथे साल फरवरी 29 दिन की होती हैं। इसे लीप ईयर (Leap Year ) कहा जाता हैं।

दूसरा उन्होंने क्विंटिलिस महीने का नाम बदल कर अपने नाम पर जूलियस यानि जुलाई और तीसरा सेक्सटिलिस महीने का नाम बदल कर अपने भतीजे व उत्तराधिकारी आँगस्टस के नाम पर अगस्त रख दिया।

Christmas Day क्यों मनाया जाता हैं ?जानिए 

इसके बाद से ही विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए साल का उत्सव मनाया जाने लगा। दुनिया भर में तब से लेकर आज तक नया साल 1 जनवरी को मनाया जाता है।हालाँकि रूस का जूलियन कैलेंडर सिर्फ 10 महीने का ही था। 

लेकिन इस जूलियन कैलेंडर में भी कई खामियां थी।सोसियेनिस और जूलियस सीजर से सोलर ईयर की सही गणना करने में थोड़ी सी चूक हो गयी थी। लेकिन इसका असर पूरे कैलेंडर के दिनों पर पड़ा।

इस कैलेंडर के उन्होंने सोलर ईयर में 365,25 दिनों की जगह पर 365,242199 दिन गिने थे।जिससे हर साल में करीब 11 मिनट ज्यादा जुड़ जाते थे।और जिसकी वजह से 1,000 साल के बाद आने वाले पहले साल में करीब 7 दिन नये जुड़ गए थे। 

मध्य युग में नया साल का जश्न मनाने की परंपरा लगभग खत्म हो गई थी। लोगों ने 1 जनवरी को नया साल मनाना छोड़ ही दिया था।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की क्या है खासियत जानिए ?

नया साल मनाने के नयी शुरुवात (New Year Celebration started again )

आधुनिक समय में 1 जनवरी से नए साल की शुरुआत 15 अक्टूबर 1582 से शुरू हुई।1 जनवरी से शुरू होने वाले कैलेंडर को ग्रिगोरियन कैलेंडर के नाम से जाना जाता है।इस कैलेंडर की शुरुआत ईसाईयों ने क्रिसमस की तारीख निश्चित करने के लिए की।

क्योंकि ग्रिगोरियन कैलेंडर से पहले 10 महीने वाला रूस का जूलियन कैलेंडर प्रचलन में था।लेकिन इस कैलेंडर में कई गलतियां होने की वजह से क्रिसमस की तारीख कभी भी निश्चित दिन में नहीं आती थी।हर साल अलग अलग तारीखों में क्रिसमस का दिन आता था। 

मकर संक्रातिं क्यों मनाई जाती है जानिए 

लेकिन ईसाई धर्म में प्रभु ईसा मसीह का जन्मदिन बहुत महत्वपूर्ण होता है।क्योंकि उस दिन प्रभु ईसा मसीह ने ईश्वर पुत्र के रूप में इस धरती पर जन्म लिया था। और मानव मात्र की सेवा पर अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया था।

ग्रिगोरियन कैलेंडर कैसे अस्तित्व में आया 

जूलियन कैलेंडर की कमियां रोमन चर्च के लोगों की समझ में आ गई थी।सन 1570 में रोमन चर्च के पोप ग्रेगरी XIII ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए उस वक्त के एस्ट्रोनॉमर क्रिस्टोफर क्लेवियस को नया कैलेंडर बनाने को कहा। 

और इसी के साथ अमेरिका के नेपल्स के फिजीशियन एलॉयसिस लिलिअस ने एक नया कैलेंडर प्रस्तावित किया।उसके बाद रूस के जूलियन कैलेंडर में कई सुधार हुए।और 24 फरवरी को इसे राजकीय आदेश से औपचारिक तौर पर अपना लिया गया। 

क्योंकि यह राजकीय आदेश पोप ग्रिगोरी ने दिया था।इसीलिए उन्हीं के नाम पर इस कैलेंडर का नाम ग्रिगोरियन कैलेंडर रखा गया था।जो 15 अक्टूबर 1582 में लागू हुआ। और आज भी यही कैलेंडर पूरी दुनिया में चलता है।यानी हर साल 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है।और एक साल 12 महीने और 365 दिन का होता हैं। 

कहाँ है Christmas Island ?जानिए इसकी खासियत

New Year Celebration 

वैसे तो पूरी दुनिया में नया साल ( New Year Celebration) 1 जनवरी को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।लेकिन दुनिया के कई ऐसे देश भी हैं।जो 1 जनवरी के अलावा भी अपने धर्म, संस्कृति और कैलेंडर के हिसाब से अपना नया साल मनाते हैं।भारत भी उन्हीं में से एक हैं।जहां पर साल में कई बार नया वर्ष मनाया जाता है।

दुनिया के लगभग सारे ही देश 1 जनवरी को नया साल बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन अलग-अलग धर्म अलग-अलग समुदाय के लोग एक होकर एक दूसरे को नए साल की  शुभकामनाओं देते हैं।यह सिलसिला 31 दिसंबर की रात से चल पड़ता हैं। कुछ लोग उपहारों का आदान -प्रदान भी करते हैं।  

31 दिसंबर की रात को कई बड़े होटलों, क्लबों ,सामाजिक संस्थाओं या अन्य संस्थाओं से जुड़े लोगों द्वारा New Year Celebration से संबंधित बड़े-बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसमें हर धर्म ,हर जाति के लोगों को आमंत्रित किया जाता है।इतनी बड़ी संख्या में लोग आपसी भेदभाव ,राग-द्वेष ,वैमनस्य को भूलकर एक जगह इकट्ठा होकर नए साल का जश्न मनाते हैं।

 महाशिवरात्रि का महपर्व क्यों मनाया जाता हैं जानिए

नए साल के ये कार्यक्रम लोगों के बीच एकता ,सद्भावना के पुल का निर्माण करने में सहायक होते हैं।लोग एक दूसरे को मिलकर बधाई देते हैं।उनके सुखद भविष्य की कामना करते हैं।

नए संकल्पों के साथ किया जाता है नये साल का स्वागत 

New Year Celebration के साथ ही कुछ लोग खासकर युवा वर्ग नये साल की शुरुआत कुछ नए संकल्पों के साथ करते हैं।वो आने वाले नए साल में सफल होने के लिए ,जीवन में कुछ कर गुजरने के लिए खुद ही अपने कुछ मापदंड स्थापित करते हैं।और फिर नए साल में उन मापदंडों के हिसाब से चलते हैं। 

इसके अलावा नए साल का स्वागत (New Year Celebration) आतिशबाजी से भी किया जाता है।कई जगहों पर 31 दिसंबर की रात (ठीक 12.00 बजे ) को भव्य आतिशबाजी का भी आयोजन किया जाता है। जिसे देखने हजारों लोग इकट्ठा होते हैं।

क्या है अनुच्छेद 371 जानें  विस्तार से ?

New Year Celebration In India 

भारत में जितने भी धर्म के मानने वाले लोग रहते हैं।उनमें से सिर्फ ईसाई धर्म के लोगों का ही नया साल 1 जनवरी को शुरू होता है।बाकी अन्य धर्मों के लोगों के नववर्ष साल के अलग-अलग महीनों में शुरू होते हैं। लेकिन इसके बाबजूद भारत में हर साल 1 जनवरी को नया साल धूमधाम से मनाया जाता है।भारत का New Year Celebration भी देखने लायक व कमाल का होता है। 

भारत में भी लोग नए साल के स्वागत बड़े ही हर्षोल्लास के साथ करते हैं।कुछ लोग नए साल में होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेकर नए साल का स्वागत करते हैं। तो कई लोग घरों में पूजा पाठ ,अनुष्ठान करा कर भगवान के चरणों में बैठ कर नए साल का स्वागत करते हैं।तो कई लोग तीर्थ स्थानों में जाकर भगवान का आशीर्वाद लेकर अपने नए साल की शुरुवात करते है।

रंगो का त्यौहार होली क्यों मनाई जाती हैं ?जानिए 

नौजवान वर्ग होटलों ,क्लबों ,पिकनिक स्थलों या अन्य जगहों पर अपने दोस्तों के साथ पार्टी या नाच गाना कर अपना समय बिता कर नये साल का स्वागत पूरे जोश व मस्ती साथ करते हैं। 

इसके अलावा कुछ लोग अपने परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते हैं।जैसे मूवी देखना या साथ में डिनर करना या किसी पिकनिक स्थल पर घूमने जाना आदि।यानी हर किसी का नया साल का जश्न मनाने का अपना अलग ही अंदाज ,अलग ही तरीका होता है। 

इसके अलावा स्कूल ,कॉलेजों या निजी संस्थाओं में New Year Celebration से संबंधित विषयों पर निबंध , भाषण प्रतियोगिता या खेल प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है। 

पिथौरागढ़(उत्तराखंड) में खुलेगा देश का सबसे बड़ा टयूलिप गार्डन। जानिए इसकी खासियत 

New Year Celebration In India : भारत में भी 1 जनवरी को नया साल बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।लेकिन हमारे देश में अनेक धर्मों (हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,ईसाई जैन ,बौद्ध आदि ) के मानने वाले लोग रहते हैं।और हर धर्म में नववर्ष की शुरुआत अलग-अलग दिन मानी जाती है।

  1. हिंदू धर्म में नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा (नवरात्रि का प्रथम दिन)से मानी जाती हैं।यह तिथि साल में मार्च या अप्रैल के महीने में पडती है।हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा जी ने इस दिन सृष्टि की रचना की थी।इसीलिए इस दिन से नए साल का आरंभ माना जाता है।इसे हिन्दू धर्म में हिंदू नव संवत्सर या नव संवत्सर कहा जाता है। इसी दिन से विक्रम संवत्सर के नए साल की शुरुआत होती है।
  2. महाराष्ट्र में अप्रैल माह में पड़ने वाले गुड़ी पड़वा या उगादी के दिन नया साल मनाया जाता है। 
  3. पंजाब में नया साल अप्रैल में पड़ने वाली बैसाखी के दिन (बैसाखी पर्व ) से मनाया जाता है।सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार होली के दूसरे दिन से भी नए साल की शुरुआत मानी जाती हैं।
  4. पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में भी बैसाखी के आसपास ही नया साल मनाया जाता है।
  5. मुस्लिम धर्म में इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मोहर्रम महीने की पहली तारीख को मुस्लिम समाज का नया साल हिजरी शुरू होता है।इस्लामी हिजरी कलेंडर चाँद पर आधारित हैं। जिसे पूरी दुनिया के मुसलमान अपने धार्मिक पर्वों का सही समय जानने के लिए इस्तेमाल करते हैं।  
  6. जैन नववर्ष दीपावली के दूसरे दिन से शुरू होता है। इसे वीर निर्वाण संवत भी कहा जाता है। इसी दिन जैन समुदाय के लोग अपना नया साल मानते हैं।
  7. पारसी नववर्ष का नया वर्ष नवरोज उत्सव के रूप में मनाया जाता है।  आमतौर पर 19 अगस्त को नवरोज उत्सव मनाया जाता है।
  8. सिंधी नववर्ष चेटीचंद उत्सव से शुरू होता है।जो चैत्र शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है।सिंधी मान्यताओं के अनुसार इस दिन वरुण देव के अवतार भगवान झूलेलाल का जन्म हुआ था।
  9. ईसाई नववर्ष 1 जनवरी को मनाया जाता है ।जिसकी शुरुवात 15 अक्टूबर 1582 को हुई थी।

होली क्यों मनाई जाती हैं जानिए

New Year Gifts

नए साल पर बहुत सारे लोग अपने प्रियजनों को उपहार भेंट करना पसंद करते हैं। जिसमें all time favorite New Year gifts तो Greeting Cards ,Flowers and Bouquet ,New Year Cake , combo pack of flowers and chocolates , Combo of special cookie and chocolate baskets , combo pack of flowers and New Year cake , Dry Fruits ,Sweets ,Teddy Bear ही हैं।

लेकिन इसके साथ ही all time favorite New Year Gifts में New Year Diaries, New Year Leather Diaries ,Pocket Diaries, Stylish Pen with Pen Holder ,New Year Planners ,New Year wall Hanging Calendar भी दिये जाते हैं।

कुछ लोग New Year Gifts में भगवान गणेश की मूर्ति (Lord Ganesha Idol) ,Laughing Buddha Statue , राधा कृष्णा की मूर्ति ( Radha-Krishna Idol ) को भी New Year Gifts के तौर पर देते हैं।

बसंत पंचमी का त्यौहार क्यों हैं इतना खास ?जानिए 

लेकिन आज कल बाजार में एक से एक डिजाइनर व सुंदर कलात्मक वस्तुएं उपलब्ध हैं।जिन्हें आप New Year Gifts के रूप में उपहार स्वरूप भेंट कर सकते हैं।जैसे घर सजावट की वस्तुओं  Wall Frames ,Wall Clock ,showpieces ,Blue Pottery , coffee mugs ,wooden artistic items,  pillows , bed lamps, Beautiful crafts , key chains , clocks,Wine Talk 6 Piece Set, Turntable Record player ,Stainless Steel Multi Bottle Wine Chiller ,Bed Sheets ,Travel backpack, T-shirts etc.

पति अपनी पत्नी को New Year Gift के तौर पर stylish handbag ,Stunning Silver gift (like Laxmi Ganesha silver Idol ,silver Plate ,spoon ,bowl etc .) ,Diamond or Gold Ring  या डिजाइनर Jewelry भी भेंट कर सकते हैं।

ऐसे ही पत्नियों भी अपने पति को Leather Wallet ,A Bracelet , a branded wristwatch आदि भेंट कर सकती हैं।

Wish You A Happy New Year ……. 

आप सब को नये साल की हार्दिक शुभकामनाएं। ……

You are most welcome to share your comments.If you like this post.Then please share it.Thanks for visiting.

यह भी पढ़ें……

UAPA बिल 2019 क्या है जानें  विस्तार से ?

Fit India Movement क्या है?जानिए

क्या है प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना जानिए

प्रधानमंत्री कौशल भारत योजना क्या है जानिए

 प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की क्या है खास बात

सालुमारदा थिममक्का को वृक्ष माता क्यों कहा जाता है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *