Rose Valley ,पहाड़ों से पलायन रोकने का एक और प्रयास।

Rose Valley

अल्मोड़ा के ताकुला ब्लाक के पास सतराली के सात गावों की दो सौ एकड़ बंजर भूमि पर अब उगेगा डेमेस्क गुलाब।

Rose Valley

उत्तराखंड सरकार ने अब अल्मोड़ा के ताकुला ब्लाक के पास सतराली इलाके की सात गांवों की लगभग 200 एकड़ बंजर भूमि पर डेमेस्क गुलाब की खेती करने का निर्णय लिया है।

स्थानीय लोगों के सहयोग से इस बंजर भूमि को खूबसूरत “रोज वैली/ Rose Valley” में बदलने का फैसला किया है।पहाड़ों से पलायन रोकने तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के मकसद से सरकार ने एक और नई पहल की है।  

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डेमेस्क गुलाब की खेती करने उद्देश्य

डेमेस्क गुलाब की खेती करने का मुख्य उद्देश्य किसानों की आमदनी को बढ़ाना और पहाड़ों से पलायन रोकना तथा बंजर जमीन को फिर से हरा-भरा करना।

सहकारी समितियों के माध्यम से होगी डेमस्की गुलाब की खेती

डेमेस्क गुलाब की खेती स्थानीय लोगों द्वारा की जायेगी जिसमें सहकारी समितियों लोगो की मदद करेंगी।”राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम” ने डेमिस्ट गुलाब की खेती को बढ़ावा देने के लिए इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है।

गुलाब के तेल के है ऊँचें दाम

बाजार में गुलाब का तेल काफी महंगा बिकता है।इसका बाजार भाव लगभग आठ लाख रुपया प्रति लीटर या कहीं जगहों पर तो इससे भी ज्यादा है।और वैसे भी गुलाब के तेल की हमेशा ही बाजार में बहुत अधिक डिमांड रहती है।इसी डिमांड को देखते हुए सरकार ने इसकी खेती को बढ़ावा देने का विचार किया है।

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बहुत उपयोगी है गुलाब का तेल 

गुलाब के तेल की मांग न सिर्फ राष्ट्रीय बाजार में है।बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी अत्यधिक मांग रहती है।गुलाब का तेल कई वस्तुओं को बनाने में उपयोग किया जाता है।चॉकलेट, कैंडी से लेकर साबुन, धूप, अगरबत्ती यहाँ तक कि गुलकंद को बनाने में भी इसका प्रयोग किया जाता है।

कॉस्मेटिक सामानों में तो इसका अत्यधिक उपयोग इसकी खुशबू तथा इसके बेमिसाल गुणों की वजह से किया जाता है।गुलाब से बनने वाले “रोजवॉटर” की भी बाजार में अत्यधिक मांग है। 

उत्तराखंड में बहुत कम होती है डेमस्की गुलाब की खेती

उत्तराखंड के किसानों द्वारा डेमेस्क गुलाब की खेती बहुत कम की जाती है।इस वक्त सिर्फ 150 हेक्टेयर भूमि में ही डेमेस्क गुलाब की खेती की जा रही है।उत्तराखंड में डेमेस्क गुलाब की खेती की काफी संभावनाएं हैं।

गढ़वाल के कुछ हिस्सों में जैसे चमोली गढ़वाल ,रुद्रप्रयाग, टिहरी और कुमाऊं में भी पिथौरागढ़ और नैनीताल में डेमेस्क गुलाब की खेती लगभग 150 हेक्टेयर जमीन पर की जाती है।जिससे लगभग 1,200 किसानों को रोजगार मिलता है।

सगंध पौध केंद्र ने बनाई रोज वैली योजना (Rose Valley Yojana)

अल्मोड़ा जिले के ताकुला ब्लाक के पास सतराली के सात गावों के लोगो ने अपनी भूमि पर खेती करनी छोड़ दी है जिसकी वजह से इन गांवों की लगभग 200 एकड़ भूमि बंजर हो गयी है।इसी बंजर पड़ी भूमि को “सगंध पौध केंद्र” ने “रोज वैली/Rose Valley” बनाने का निर्णय लिया।

अब ये बंजर भूमि डेमेस्क गुलाब की खुशबू से तो महकेगी ही साथ में लोगों को रोजगार भी देगी

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किसानों को मिलेगा पूरा सहयोग

किसानों व सहकारी समितियों को गुलाब से तेल निकलने और उसे बाजार में बेचने में भी सगंध पौध केंद्र पूरा सहयोग करेगा

बंजर भूमि में भी उगता है डेमेस्क गुलाब

डेमेस्क गुलाब की खास बात यह है कि यह बंजर भूमि में भी आसानी से उग सकता है।और कांटेदार होने की वजह से इसे जंगली जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते है। 

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