मां के दिल से in hindi

मां के दिल से in hindi ,

हर बच्चा (चाहे वह बेटा हो या बेटी ) अपने माँ बाप के लिए उनकी जिंदगी है।ईश्वर का दिया हुआ एक अनमोल उपहार है।जो माँ बाप की जिंदगी को खुशियों से भर दिया है।

मां के दिल से in hindi

मां के दिल से

मेरे बेटे ने अभी-अभी टीन एज (Teen age) की उम्र में कदम रखा ही  है।लेकिन उसमें टीनएज (Teen age)जैसी कोई बात अभी मैंने महसूस नहीं की है।अभी वह 8वी क्लास में  पहुंच चुका है। लेकिन उसकी हरकतें अभी भी किसी सात-आठ साल के बच्चे जैसी ही है।

छुट्टी के दिन सुबह देर से उठना ,फिर न नहाने के सौ बहाने ढूंढना, घर की दीवार पर दिनभर क्रिकेट की बॉल से मारना ,खाना खाने के लिए  100 नखरे दिखाना, हर सब्जी में कोई ना कोई खोट निकालना।ताकि खाने को उसका पसंदीदा जंक फूड जैसे मैगी ,बर्गर, डोसा, मोमो ,पास्ता आदि  मिल सके।

मेरा सारा दिन उसे यह मत कर, वह मत कर कहने में निकल जाता है।और उसका सारा दिन TV देखने या फोन पर गेम खेलने में निकल जाता है।और इसी चक्कर में कभी-कभार होमवर्क करना भी भूल जाता है।पढ़ाई में ठीक-ठाक है।काफी गोल मटोल ,भोला और मासूम सा है। इसलिए स्कूल में टीचर्स का फेवरेट बच्चा है।

क्यों मनाया जाता हैं Mother’s Day ?

मासूम सवाल कठिन जबाब 

एक रात को जब हम सोने की तैयारी कर रहे थे।तो अचानक मुझसे बोला कि आज स्कूल में गणित के टीचर ने उनसे यह पूछा कि आगे चलकर भविष्य में कौन क्या बनेगा।और मैं विभिन्न पदों के नाम बोलता जाऊंगा और जिसको जो बनना हो।वह उस पर हाथ खड़ा करेगा।सबसे पहले टीचर ने बोला इंजीनियर कितने बच्चे बनेंगे हाथ खड़ा करें।तो कुछ बच्चों ने हाथ खड़े किए। फिर ऐसे ही सर ने कई और नाम लिए जैसे डॉक्टर ,टीचर ,वैज्ञानिक आदि।

टीचर बोलते गए और बच्चे अपनी अपनी पसंद से हाथ खड़ा करते गए।लेकिन मेरी समझ में  नहीं आया कि मैं किस पर हाथ खड़ा करूं।अंत में सर ने बोला कितने बच्चे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM)बनना चाहते हैं।तो मम्मा मेरे पास कोई ऑप्शन तो था नहीं।सो मैंने हाथ उसी में खड़ा कर दिया।

जब झूठ बोलना पड़ा महंगा 

मम्मा सर ने बताया कि इसके लिए तो एक कठिन परीक्षा पास करनी होती है।लेकिन मेहनत करने से सफल हो सकतेे है।लेकिन मां आप तो हमेशा कहती थी।अगर मैं स्कूल में हमेशा फर्स्ट आया तो  मुझे नौकरी आसानी से मिल जाएगी।लेकिन मां टीचर तो कह रहे थे कि आपको वहां भी Exam देना होगा। क्या आप झूठ बोलते थे।

दरअसल जब वह छोटी क्लास में था।तो एग्जाम्स के टाइम पर पढ़ने में कभी-कभी आनाकानी करता था।तो मैं उसे अक्सर बोल देती थी कि अगर तुम फर्स्ट नहीं आए तो तुम्हें कहीं भी नौकरी नहीं मिलेगी।लेकिन आज वही झूठ भारी पड़ गया।मैंने उसको फिर भी बहुत समझाने की कोशिश की।कि अगर उसके 10वी व 12वीं में अच्छे मार्क्स नहीं आए तो उसे B.Sc में एडमिशन नहीं मिलेगा।और ग्रेजुएट हुए बिना वह सिविल सर्विसेज की परीक्षा में नहीं बैठ सकता है।

इसलिए मार्क्स भी अपनी जगह जरूरी होते हैं।लेकिन वह मेरी बात कहां मानने वाला था।वह मुझसे बोला कि जब नौकरी के लिए उसे मेहनत करनी ही है।तो फिर अभी मेहनत क्यों करूं ? जब मैं सिविल सर्विसेज का फॉर्म भरूगा।तो सारी मेहनत उसी समय इकट्ठा ही कर लूंगा।अब उसकी इस बात का मेरे पास कोई जवाब नहीं था।

क्यों मनाया जाता हैं Father’s Day ?

अभी 7वी क्लास के एग्जाम शुरू होने से 5 या 6 दिन पूर्व एक दिन वह स्कूल से घर पहुंचा।अभी गेट में ही था।मुझसे बोला आप तो हमेशा कहती थी।अगर तुम्हारे 95 से 100% के बीच में मार्क्स नहीं आए तो तुम अगली क्लास में नहीं जा पाओगे।लेकिन मैडम तो कह रही थी कि 40% से ऊपर मार्क्स लाने जरूरी है।मुझसे बड़ी मासूमियत से पूछने लगा कि मां अगर मैं 40%  भी लाऊंगा तो भी 8वी में जाऊंगा और अगर मैं 100%  लाऊंगा।तब भी तो 8वी मैं ही जाऊंगा ।कोई 10वी में थोड़ी ना चला जाऊंगा। फिर इतनी मेहनत क्यों ?

जब जाना सबने 8वी क्लास मैं ही है।चाहे वह 40% वाला हो या 100%वाला। मैं हैरान थी उसकी बातें सुनकर मुझे कोई जवाब नहीं सूझ रहा था।यह तो सिर्फ एक बात ही है ऐसी कई बातें हर रोज वह मुझसे करता रहता है।

जब भी मैं उसके उम्र  के बच्चों की माऔ से मिलती हूं।तो मैं उनसे एक सवाल जरूर पूछती हूं कि आखिर कौन सी उम्र होती है जिस उम्र में इन बच्चों को अक्ल आती है।लेकिन मेरी तरह ही उनके पास भी कोई जवाब नहीं होता है।

सबके साथ लगभग एक ही तरह की समस्याएं हैं।और सभी बच्चों के फोन में गेम खेलने से परेशान रहते हैं।क्योंकि आजकल लगभग सारे बच्चे फोन में गेम खेलने में ही व्यस्त रहते हैं।

सच तो यह है कि वह हर रोज बढ़ रहा है।उसके अंदर कई बदलाव आ रहे हैं।वह ना तो बच्चा है जिसे मैं बहाना बनाकर बहला सकती हूं।और ना इतना बड़ा है कि चीजों को खुद ब खुद समझ जाए ।इसलिए मुझे आज अब उसके हर सवाल का जवाब बड़े ही सोच समझकर सावधानी से देना पड़ता है।

हालांकि आज भी सुबह स्कूल जाने से पहले उसे उठाने में मुझे वही मशक्कत करनी पड़ती है जैसे  नर्सरी के टाइम पर करती थी।उसकी अजीब अजीब सी हरकतें और कभी अपने आप ही मेरे पास आकर मेरे गले से लग जाना। कभी अपनी बात मनवाने के लिए मक्खन बाजी करना। आज भी जिद पकड़ कर बैठ जाना यह तो आम बात है ।

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हर दिन कुछ नया सीखने की इच्छा 

सच में वह अपने कई रंग दिखाकर हमारी जिंदगी को भी रंगीन कर देता है।हर उम्र की अपनी अपनी समस्याएं हैं।जब वह छोटा था तो और समस्याएं थी।आज वह teen age में है तो उसकी समस्याएं और हैं। लेकिन यह सच है कि अब उसको बहलाया फुसलाया नहीं जा सकता।बच्चों की सीखने की क्षमता बड़ो से कई गुना अधिक होती है।

कई बार तो मुझे अपने स्मार्टफोन की कई चीजें सीखने के लिए उससे मदद लेनी पड़ती है।लेकिन इस मदद के बदले भी वह बहुत सारी सौदेबाजी करता है।जैसे यहां घुमाने ले जाओगे ,वह खाना खिलाओगे आदि ।वह इस वक्त मेरा सबसे अच्छा दोस्त है।

ईश्वर का दिया हुआ एक अनमोल उपहार

यूं ही लड़ते झगड़ते ,प्यार करते ,एक दूसरे से सौदेबाजी करते-करते हम जिंदगी में हर दिन आगे बढ़ रहे हैं।और हर दिन हम एक दूसरे से कुछ न कुछ नया सीखते रहते हैं।लेकिन जो भी है वह मेरी जिंदगी है।मेरे लिए वह ईश्वर का दिया हुआ एक अनमोल उपहार है।जिसने मेरी जिंदगी को खुशियों से भर दिया है।मैं हर पल उस ईश्वर को धन्यवाद देती हूं जिसने मुझे मां बनने का गौरव प्रदान किया।

            

हर मां के पास अपने बच्चे से जुड़ी ऐसी कई रोचक बातें होती है।अगर आप उनमें से कुछ शेयर करना चाहती हैं तो प्लीज जरुर शेयर करिए। अपने कमेंट जरूर भेजें।मां के दिल से 

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